शरद भोर | मनहरण घनाक्षरी छंद में शरद ऋतु का मनोहारी चित्रण
परिचय
प्रकृति का प्रत्येक प्रभात अपने साथ एक नया संदेश लेकर आता है, किंतु शरद ऋतु की भोर का आकर्षण कुछ अलग ही होता है। निर्मल नभ, सुनहरी किरणें, ओस से भीगी धरती, मंद समीर और पुष्पों की भीनी सुगंध मिलकर ऐसा मनोरम दृश्य रचते हैं कि मन सहज ही प्रकृति की अनुपम छटा में खो जाता है। प्रस्तुत मनहरण घनाक्षरी में उसी मनमोहक शरद प्रभात के सौंदर्य और उसके आनंदमय वातावरण को भावों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का विनम्र प्रयास किया गया है।
मोहक निरभ्र नभ
भास्कर विनम्र अब
अति मनभावनी ये
शरद की भोर है
पूरब मे रवि रथ
शशि भी गगन पथ
स्वर्णिम से अंबरांत
छटा हर छोर हैं
सेम फली झूम रही
पवन हिलोर बही
मालती सुगंध भीनी
फैली चहुँ ओर है
महकी कुसुम कली
विहग विराव भली
टपकन तुहिन बिंदु
खुशी की ज्यों लोर है
शब्दार्थ - लोर - अश्रु
निष्कर्ष
शरद की यह मोहक बेला प्रकृति के सौंदर्य का उत्सव है। निर्मल आकाश, स्वर्णिम प्रभात, सुगंधित समीर और तुहिन कणों से सजा यह दृश्य मन को शांति, प्रसन्नता और नवीन ऊर्जा से भर देता है। जब हम प्रकृति के इन सूक्ष्म रूपों को हृदय से अनुभव करते हैं, तब जीवन भी उसी निर्मलता और मधुरता से आलोकित होने लगता है।
✨धन्यवाद🙏
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वाह ! बहुत खूब
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार आदरणीय !
हटाएंक्या बात है सुधा जी! मोहक सरस रचना।
जवाब देंहटाएंसुंदर वर्णन शरद आगमन के साथ मोहक रूप प्रकृति का।
बहुत बहुत सुंदर।
दिल से धन्यवाद एवं आभार कुसुम जी !
हटाएंशरद को शब्दों में बखूबी बाँधा है । भोर की छटा निराली है । सुंदर सृजन ।
जवाब देंहटाएंजी , हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आपका 🙏🙏।
हटाएंवाह! क्या बात है! बहुत मोहक प्रस्तुति!
जवाब देंहटाएंसादर आभार एवं धन्यवाद आ.विश्वमोहन जी !
हटाएंमहकी कुसुम कली
जवाब देंहटाएंविहग विराव भली
टपकन तुहिन बिंदु
खुशी की ज्यों लोर है
मनमोहक सृजन ।
अत्यंत आभार एवं धन्यवाद मीनाजी!
हटाएंजी नमस्ते,
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना शुक्रवार २१ अक्टूबर २०२२ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार श्वेता जी मेरी रचना को पाँच लिंको के आनंद मंच के लिए चयनित करने हेतु ।
हटाएंबहुत ही सुन्दर
जवाब देंहटाएंपूरब मे रवि रथ
जवाब देंहटाएंशशि भी गगन पथ
स्वर्णिम से अंबरांत
छटा हर छोर हैं////
बहुत सुन्दर और मनभावन अभिव्यक्ति प्रिय सुधा जी।मोहक शब्दों में सहजता से उतार कर आपने शरद की भोर को और भी मोहक बना दिया है।हार्दिक बधाई और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।♥️♥️🌹🌹
हृदयतल से धन्यवाद एवं आभाररेणु जी ! आपकी अनमोल प्रतिक्रिया पाकर सृजन सार्थक हुआ।
हटाएंबहुत बहुत सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद एवं आभार भारती जी !
हटाएंसुन्दर रचना। दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ l
जवाब देंहटाएंसुंदर प्रस्तुति। दीपावली की शुभकामनाएं।
जवाब देंहटाएंशरद की भोर को अपने मोहक शब्दों द्वारा आपने और भी म9हक बना दिया है, सुधा दी। बहुत सुंदर रचना।
जवाब देंहटाएंभोर पर इतनी सुंदर घनाक्षरी । मनमोहक, मनोहारी,मनहर वर्णन । बधाई सखी ।
जवाब देंहटाएंवाह! बहुत सुंदर।
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