फूलों की पंखुड़ियों से
धरा तुम यूँ मखमली हो गयी
महकती बासंती खुशबू संग
शीतल बयार हौले से बही...
खुशियों की सौगात लिए तुम
अति प्रसन्न सी हो.....
धरा तुम महकी - महकी बहकी - बहकी सी हो !!!
सुमधुर सरगम गुनगुनाती
धानी चुनरी सतरंगी फूलों कढ़ी
हौले-हौले से सरसराती,
नवोढ़ा सा सोलह श्रृंगार किये
आज खिली - खिली सजी-धजी सी हो ...
धरा तुम महकी - महकी बहकी-बहकी सी हो !!!
कोई बदरी संदेशा ले के आई क्या ?
आसमां ने प्रेम-पाती भिजवाई क्या....??
प्रेम रंग में भीगी भीगी
आज मदहोश सी हो......
धरा तुम महकी-महकी बहकी - बहकी सी हो !!!
मिलन की ऋतु आई....
धरा धानी चुनरीओढे मुख छुपाकर यूँ लजाई ,
नव - नवेली सुमुखि जैसे सकुचि बैठी मुँहदिखाई.....
आसमां से मिलन के पल "हाल ए दिल" तुम कह भी पायी ?
आज इतनी खोई खोई सी हो....
धरा तुम महकी - महकी बहकी - बहकी सी हो !!!
चाँद भी रात सुनहरी आभा लिए था ...
चाँदनी लिबास से अब ऊब गया क्या ?
तुम्हारे पास बहुत पास उतर आया ऐसे ,
सगुन का संदेश ले के आया जैसे....
सुनहरी चाँदनी से तुम नहायी रात भर क्या ?
ऐसे निखरी और निखरी सी हो......
धरा तुम महकी-महकी बहकी-बहकी सी हो !!!
चित्र : साभार Pinterest से ..