सोमवार, 13 सितंबर 2021

तुम उसके जज्बातों की भी कद्र कभी करोगे

Indian woman
                        चित्र साभार गूगल से....


जो गुण नहीं था उसमें

हरदम देखा तुमने

हर कसौटी पर खरी उतरे

ये भी चाहा तुमने

पर जो गुण हैं उसमें

उसको समझ सकोगे?

तुम उसके जज्बातों की

भी कद्र कभी करोगे   ?


बचपन की यादों से जिसने

समझौता कर डाला

और तुम्हारे ही सपनों को

सर आँखों रख पाला

पर उसके अपने ही मन से

उसको मिलने दोगे ?

तुम उसके जज्बातों की

भी कद्र कभी करोगे ?


सबको अपनाकर भी 

सबकी हो ना पायी

है बाहर की क्यों अपनों 

संग सदा परायी

थोड़ा सा सम्मान 

कभी उसको भी दोगे ?

तुम उसके जज्बातों की

भी कद्र कभी  करोगे ?


सुनकर तुमको सीख ही जाती

आने वाली पीढ़ी

सोच यही फिर बढ़ती जाती

हर पीढ़ी दर पीढ़ी

परिर्वतन की नव बेला में

खुद को कभी बदलोगे

 तुम उसके जज्बातों की

भी कद्र कभी करोगे ?


समाधिकार उसे दोगे तो

वह हद में रह लेगी

अनुसरणी सी घर-गृहस्थी की

बागडोर खुद लेगी

निज गृहस्थी के खातिर तुम भी

अपनी हद में रहोगे ?

तुम उसके जज्बातों की

भी कद्र कभी करोगे ?


   

सोमवार, 6 सितंबर 2021

ये भादो के बादल

Cloudy weather
चित्र साभार,pixabay से...


 भुट्टे मुच्छे तान खड़े

तोरई टिण्डे हर्षाते हैं 

चढ़ मचान फैला प्रतान 

अब सब्ज बेल लहराते हैं


चटक चमकती धूप छुपा 

ये घुमड़ घुमड़ गहराते हैं

उमस भरे मौसम में ये 

राहत थोड़ी दे जाते हैं


हरियाये हैं खेत धान के,

देख इन्हें बतियाते हैं

जान इल्तजा उमड़-घुमड़ 

ये धूप मे वर्षा लाते हैं


श्रृंगित प्रकृति के भाल मुकुट 

जब इन्द्रधनुष बन जाते हैं

नाच मयूरा ठुमक ठुमक

घन गर्जन ताल बजाते हैं


ये भादो के बादल हैं 

अब बचा-खुचा बरसाते हैं

ये चंचल कजरारे मेघा

सबके मन को भाते हैं।


बुधवार, 1 सितंबर 2021

निभा स्वयं से पहला रिश्ता

Girl in introspection
Sketch by my daughter


बहुत हुई जब मन के मन की
तो तन को गुस्सा आया
खोली में छुपकर बैठा मन 
तन जब मन पर गरमाया

अपनी अपनी हाँका करता
फिर भी मैंने तुझको माना
पर मुझमें ही रहकर भी क्या 
 तूने कभी मुझे जाना ?

सबकी कदर औ' फिकर तुझे ,
जब तेरी कोई जो सुने ना
तब गमगीन रहे तू तुझमें
अश्रु मुझ से ही बहे ना।

आँखें असमय फूटी जाती
फर्क तुझे नहीं पड़ता
हाल वही बेहाल है तेरा
अपनी  जिद्द पे तू अड़ता

जाने क्या-क्या शौक तेरे ये
मुझ पर पड़ते भारी
तेरी मनमानी के कारण
मैं झेल रहा बीमारी

तेरा क्या...दुर्गत जो हुआ मैं
तू त्याग मुझे उड़ जायेगा
ढूँढ़ कोई नवतन तू फिर से
 यही प्रपंच रचायेगा।।

सबको मान दिया करता तू
तनिक मुझे भी माना होता
मेरे दुख-सुख सामर्थ्यों को
कुछ तो कभी पहचाना होता

सामंजस्य हमारा होता
निरोगी काया हम पाते
निभा स्वयं से पहला रिश्ता
फिर दुनिया को अपनाते ।।



तुम उसके जज्बातों की भी कद्र कभी करोगे

                        चित्र साभार गूगल से.... जो गुण नहीं था उसमें हरदम देखा तुमने हर कसौटी पर खरी उतरे ये भी चाहा तुमने पर जो गुण हैं उस...