राजनीति और नेता
आज मेरी लेखनी ने राजनीति की तरफ देखा, आँखें इसकी चौंधिया गयी मस्तक पर छायी गहरी रेखा। संसद भवन मे जाकर इसने नेता देखे बडे-बडे, कुछ पसरे थे कुर्सी पर , कुछ भाषण देते खडे-खडे। कुर्सी का मोह है , शब्दों में जोश है, विपक्ष की टाँग खींचने का तो इन्हें बडा होश है। लकीर के फकीर ये,और इनके वही पुराने मुद्दे, ...