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ग्रहदोष का असर — एक पारिवारिक कहानी

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परिचय बच्चों की गलतियों को समझाना और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराना परवरिश का जरूरी हिस्सा है। लेकिन जब अपनेपन के कारण किसी एक बच्चे की गलतियों को बार-बार नजरअंदाज किया जाए और उसके व्यवहार का दोष परिस्थितियों या ग्रह-नक्षत्रों पर डाल दिया जाए, तो इसका असर उसके स्वभाव और आदतों पर पड़ सकता है। यह कहानी इसी सोच और उसके परिणाम को एक पारिवारिक प्रसंग के माध्यम से सामने रखती है। “माँजी, खाना खा लीजिए न! ऐसे खाने पर क्यों गुस्सा उतारना? चलिए न माँजी! फिर आपकी दवाओं का समय हो रहा है, तबीयत बिगड़ जाएगी। चलिए, खाना खा लीजिए न!” कितनी देर से सीमा अपनी सासू माँ को मना रही थी, पर सासू माँ आज मुँह फुलाए बैठी थीं। आखिर उनके लाडले पोते बंटी को उसके पापा से डाँट जो पड़ गई थी। बंटी आजकल अपनी दादी के इसी प्यार का गलत फायदा उठा रहा था। कोई भी गलती करता और डाँट पड़ती तो दादी से शिकायत कर देता। वह जानता था कि दादी सबको डाँट-डपटकर उसे बचा लेंगी। नतीजतन, वह बहुत लापरवाह होता जा रहा था। उसका सामान पूरे घर में बिखरा रहता। जूते-चप्पल भी वह कभी सही जगह पर नहीं रखता। उसका कमरा भी हमेशा अस्त-व्यस्त रहत...

वसुधा-अंबर एक हो गए— शिशिर ऋतु पर हिंदी कविता

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शिशिर ऋतु अपने साथ ठंड, कोहरे और सर्द हवाओं का प्रभाव लेकर आती है। इस मौसम में प्रकृति का रूप बदल जाता है। पेड़-पौधों की हरियाली फीकी पड़ने लगती है, पक्षियों का कलरव कम हो जाता है और जनजीवन भी ठिठुरन से प्रभावित होता है। प्रस्तुत कविता में शिशिर ऋतु के इसी प्राकृतिक परिवेश और बसंत के आगमन की प्रतीक्षा को शब्द दिए गए हैं। दिग-दिग्गज हैं अलसाये से खग मृग भी सब सोये से हैं । थर थर थर है शिशिर काँपती, साग-पात सब रोये से हैं । लता वृक्ष सब मुरझाए से, पात बिछड़ने का झेलें गम । मारी-मारी फिरें तितलियाँ, फूलों का मकरंद गया जम । छुपम-छुपाई खेल रहे रवि, और पवन पुरजोर चल रही । दुबके सोये पता ना चलता, रात कटी कब भोर टल रही । दादुर मोर सभी चुप-चुप हैं, कोयल मैना कहीं खो गये । मौन मिलन आलिंगनबद्ध से वसुधा अम्बर एक हो गये । सकल सृष्टि स्तब्ध खड़ी सी, बाट जोहती ज्यों बसंत का । श्रृंगारित होगी दुल्हन सी, शुभागमन हो रति अनंग का । शिशिर की ठिठुरन और निस्तब्धता के बीच प्रकृति बसंत के आगमन की बाट जोहती है। ऋतु परिवर्तन के साथ सूने पड़े वन-उपवन फिर से फूलों और हरियाली से भरने लगेंगे। अंतिम पंक्तियों में रति-अ...

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