संदेश

जनवरी, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

असर

चित्र
माँजी खाना खा लीजिए न ! ऐसे खाने पर क्यों गुस्सा उतारना ? चलिए न माँजी ! फिर आपकी दवाओं का समय हो रहा है , तबियत बिगड़ जायेगी ! चलिए खाना खा लीजिए न ! कितनी देर से सीमा ऐसे ही अपनी सासू माँ को मना रही थी, पर सासू माँ आज  मुँह फुलाए बैठी थी , आखिर उनके लाडले पोते बंटी को उसके पापा से डाँट जो पड़ गयी थी । बंटी आजकल अपनी दादी के इसी प्यार का गलत फायदा उठा रहा था , कोई भी गलती करता और डाँट पड़े तो दादी से शिकायत ! वह जानता था कि दादी सबको डाँट-डपट कर उसे बचा लेंगी , नतीजतन वह बहुत ही लापरवाह होता जा रहा था । उसका सामान पूरे घर भर में बिखरा रहता । जूते - चप्पल भी वह कभी सही तरीके से सही जगह न रखता । उसका कमरा भी हमेशा अस्त-व्यस्त रहता, किताबें और कपड़े पूरे कमरे में तितर-बितर फैले रहते । सीमा (उसकी माँ) उसके कमरे में बिखरे सामानों को समेटते - समेटते थक जाती और जब भी कभी उसे इस बारे में डाँटती या कुछ भी कहती तो वह साथ-साथ जुबान लड़ाता । माँ को तो जैसे कुछ समझता ही नहीं था । तंग आकर सीमा ने आज उसके पापा से शिकायत कर दी । पापा की डाँट पड़ी तो घड़ियाली आँसू बहा आया दादी से लिपटकर । बस फिर दादी शुर...

वसुधा अम्बर एक हो गये

चित्र
दिग-दिग्गज हैं अलसाये से खग मृग भी सब सोये से हैं । थर थर थर है शिशिर काँपती, साग-पात सब रोये से हैं । लता वृक्ष सब मुरझाए से, पात बिछड़ने का झेलें गम । मारी-मारी फिरें तितलियाँ, फूलों का मकरंद गया जम । छुपम-छुपाई खेल रहे रवि, और पवन पुरजोर चल रही । दुबके सोये पता ना चलता, रात कटी कब भोर टल रही । दादुर मोर सभी चुप-चुप हैं, कोयल मैना कहीं खो गये । मौन मिलन आलिंगनबद्ध से वसुधा अम्बर एक हो गये । सकल सृष्टि स्तब्ध खड़ी सी, बाट जोहती ज्यों बसंत का । श्रृंगारित होगी दुल्हन सी, शुभागमन हो रति अनंग का ।

फ़ॉलोअर

लेबल

कविता -हास्यव्यंग1 कहानी19 कह़ानी1 कहानीकविता1 कांवड़1 काव्य रचना1 कुण्डलिया छंद5 कुण्डलिया छन्द3 गजल10 गढ़वाली कविता एवं उसका हिन्दी रूपांतरण1 गढ़वाली गीत1 गर्मी पर कविता1 गर्मी पर बाल कविता1 गीत17 गीतात्मक कविता1 गुरु महिमा कविता2 गुरु महिमा पर दोहा मुक्तक1 घरेलू हिंसा1 चिड़िया1 चौपाई | पावस पर कविता | बरसात पर कविता | सावन | शिव भक्ति1 छंद कविता1 जल संरक्षण पर कविता1 जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वार्मिंग1 जीवन दर्शन1 दोहा मुक्तक3 दोहा-मुक्तक1 दोहे7 नवगीत15 नारी सम्मान1 नारी सशक्तिकरण1 पकौड़े1 परिवार1 पाँच लिंकों का आनंद स्थापना दिवस1 पारिवारिक कहानी2 पारिवारिक रिश्ते1 पावस पर कविता1 पुस्तक समीक्षा1 प्रकृति3 प्रकृति कविता3 प्रार्थना3 प्रेणादायक आलेख1 प्रेम कविता1 प्रेरक लघुकथा1 प्रेरणादायक कहानी1 प्रेरणादायक हिंदी कविता1 बरसात पर कविता2 बारिश पर गीत1 बाल कविता3 बुज़ुर्ग1 भक्ति कविता1 भगवान शिव2 भावनात्मक1 भावनात्मक रचना1 मन1 मनहरण घनाक्षरी2 मनहरण घनाक्षरी छंद5 महादेव1 महिला सशक्तिकरण1 महिला सशक्तिकरण पर प्रेरणादायक कहानी।1 माँ का त्याग1 माँ की ममता1 माता पिता1 माता-पिता1 मुक्तक3 मुहावरे पर आधारित लघुकथा1 मोबाइल की लत तकनीक डिजिटल जीवन1 रक्षाबंधन1 राम भक्ति1 रिश्ते2 रोला छंद2 लघु कथा2 लघु कहानी6 लघुकथा19 लेख3 वर्षा ऋतु2 वसंत पर कविता1 व्यंग कविता1 व्यंग लेख1 शरद ऋतु2 शराब की लत1 शिक्षक दिवस1 शिक्षा -परीक्षा1 शिक्षा-परीक्षा1 शिव भक्ति2 शिव महिमा1 शुभकामना कविता1 संघर्ष1 संवेदनाएँ1 संस्मरण2 संस्मरणात्मक लेख1 सकारात्मक सोच1 सच्ची घटना1 सद्गुरु1 समय1 समीक्षा2 सामाजिक कहानी1 सामाजिक लेख1 सावन1 साहित्य1 हाइबन1 हायकु3 हास्यव्यंग कविता1 हास्यव्यंग लघुकथाएं1 हिंदी कविता3 हिंदी कहानी1 हिंदी भावनात्मक कहानी1 हिंदी लघुकथा प्रेरक लघुकथा रिश्ते मनमुटाव संवाद जीवन दर्शन1 हिंदी लघुकथा माँ का त्याग प्रेरक लघुकथा प्रेरणादायक कहानी1 हिंदी लेख1 हिंदी साहित्य1 हिन्दी कविता1
ज़्यादा दिखाएं