रविवार, 13 नवंबर 2022

गई शरद आया हेमंत


Winter morning

गई शरद आया हेमंत ,

हुआ गुलाबी दिग दिगंत ।

अलसाई सी लोहित भोर,

नीरवता पसरी चहुँ ओर ।


व्योम उतरता कोहरा बन,

धरा संग जैसे आलिंगन ।

तुहिन कण मोती से बिखरे,

पल्लव पुष्प धुले निखरे ।


उजली छिटकी गुनगुनी धूप,

प्रकृति रचती नित नवल रूप ।

हरियाये सुन्दर सब्ज बाग,

पालक बथुआ सरसों के साग ।


कार्तिक,अगहन व पूस मास,

पंछी असंख्य उतरे प्रवास ।

 हुलसित सुरभित यह ऋतु हेमंत

आगत शिशिर, स्वागत वसंत ।।


मंगलवार, 18 अक्तूबर 2022

शरद भोर

 मनहरण घनाक्षरी 

Sun rise

मोहक निरभ्र नभ

भास्कर विनम्र अब

अति मनभावनी ये

शरद की भोर है


पूरब मे रवि रथ

शशि भी गगन पथ 

स्वर्णिम से अंबरांत

छटा हर छोर हैं


सेम फली झूम रही

पवन हिलोर बही

मालती सुगंध भीनी

फैली चहुँ ओर है


महकी कुसुम कली

विहग विराव भली

टपकन तुहिन बिंदु

खुशी की ज्यों लोर है


लोर - अश्रु 





सोमवार, 10 अक्तूबर 2022

अक्टूबर के अनाहूत अभ्र

 

Cloudy sky

हे अक्टूबर के अनाहूत अभ्र !

 ये अल्हड़ आवारगी क्यों ?

प्रौढ़ पावस की छोड़ वयस्कता 

चिंघाड़ों सी गरजन क्यों ?


गरिमा भूल रहे क्यों अपनी,

डाले आसमान में डेरा ।

राह शरद की रोके बैठे,

जैसे सिंहासन बस तेरा ।


शरद प्रतीक्षारत देहलीज पे

धरणी लज्जित हो बोली,

झटपट बरसों बचा-खुचा सब

अब खाली कर दो झोली !


शरदचन्द्र पे लगे खोट से

चन्द्रप्रभा का कर विलोप

अति करते क्यों ऐसे जलधर !

झेल सकोगे शरद प्रकोप ?


जाओ अब आसमां छोड़ो !

निरभ्र शरद आने दो!

शरदचंद्र की धवल ज्योत्सना

 धरती को अब पाने दो !



गुरुवार, 29 सितंबर 2022

विश्वविदित हो भाषा

Nayi soch blog pic

 मनहरण घनाक्षरी

(घनाक्षरी छन्द पर मेरा एक प्रयास)


 हिंदी अपनी शान है

भारत का सम्मान है

प्रगति की बाट अब

इसको दिखाइये


मान दें हिन्दी को खास

करें हिंदी का विकास

सभी कार्य में इसे ही

अग्रणी बनाइये


संस्कृत की बेटी हिंदी

सोहती ज्यों भाल बिंदी

मातृभाषा से ही निज

साहित्य सजाइये


हिंदी के विविध रंग

रस अलंकार छन्द

इसकी विशेषताएं

सबको बताइये


समानार्थी मुहावरे

शब्द-शब्द मनहरे

तत्सम,तत्भव सभी

उर में बसाइये


संस्कृति की परिभाषा

उन्नति की यही आशा

राष्ट्रभाषा बने हिन्दी

मुहिम चलाइये


डिजिटल युग आज

अंतर्जाल पे हैं काज

हिंदी का भी सुगम सा

पोर्टल बनाइए


विश्वविदित हो भाषा

सबकी ये अभिलाषा

जयकारे हिन्दी के

जग में फैलाइए ।



बुधवार, 14 सितंबर 2022

बने राष्ट्रभाषा अब हिन्दी


Hindi diwas



आगे बढ़ ना सकेंगे जब तक,

                 बढ़े ना अपनी हिंदी ।

                भारत की गौरव गरिमा ये,

                 राष्ट्र भाल की बिंदी ।


                बढ़ा मान गौरवान्वित करती,

                मन में भरती आशा।

                सकल विश्व में हो सम्मानित,

                बने राष्ट्र की भाषा ।


               गंगा सी पावनी है हिन्दी,

               सागर सी गुणग्राही ।

               हर भाषा बोली के शब्दों को ,

               खुद में है समाई ।


               सारी भगिनी भाषाओं को, 

               लगा गले दुलराती।

               तत्सम, तत्भव, देशी , विदेशी,

               सबको है अपनाती।


              आधे-अधूरे शब्दों का भी, 

               बन जाती है सहारा ।

               सारे भारत में संपर्कित,

               भावों की रसधारा।


               स्वाभिमान-सद्भाव जगाती,

               संस्कृति की परिभाषा।

               सर्वमान्य हो सकल जगत में,

               यही सबकी अभिलाषा।


                विश्वमंच पर गूँजे इक दिन,

                हिंदी का जयकारा ।

                बने राष्ट्रभाषा अब हिन्दी,

                यही अरमान हमारा ।




गई शरद आया हेमंत

गई शरद आया हेमंत , हुआ गुलाबी दिग दिगंत । अलसाई सी लोहित भोर, नीरवता पसरी चहुँ ओर । व्योम उतरता कोहरा बन, धरा संग जैसे आलिंगन । तुहिन कण मोत...