शनिवार, 23 अक्तूबर 2021

गति मन्द चंद्र पे तरस आया

 

Morning moon
                 चित्र साभार,pixabay.com से


बाद पूनम के चाँद वृद्ध सा

सफर न पूरा कर पाया।

बादल में छुपा तब भोर भानु 

गति मन्द चंद्र पे तरस आया।


दी शीतलता दान विश्व को

पूनम में है पाया मान

नन्हा सा ये बढ़ा शुक्ल में 

पाक्षिक उम्र में वृहद ज्ञान

आज चतुर्थी के अरुणोदय

नभ में दिखी यूँ मलिन काया

बादल में छुपा तब भोर भानु

गति मन्द चंद्र पे तरस आया


हर भोर उद्भव चमक रवि

हर साँझ फिर अवसानी है

दिन मात्र जीवन सफर विश्व

सम और ना गतिमानी है

आदि अंत का जटिल सत्य

इनको न कभी भरमा पाया

बादल में छुपा तब भोर भानु

गति मन्द चंद्र पे तरस आया


नसीहत सदा देती प्रकृति

हम सीखते ही हैं कहाँ

नीयत से ही बनती नियति

कर्मठ बताते हैं यहाँ

प्रखर रवि और सौम्य शशि

दोनों ने ही जग चमकाया

बादल में छुपा तब भोर भानु

गति मन्द चंद्र पे तरस आया


मंगलवार, 19 अक्तूबर 2021

हायकु

    

Bird
चित्र, साभार picabay.com से

  

    [1]

कर स्पर्श से

लाजवन्ती सिकुड़ी ~

गाँव की राह

     

     [2]

मावठ भोर~

फटी बंडी की जेब

टटोले वृद्ध

    

    [3]

मकड़ीजाले~

जीर्ण झुग्गी में बैठे

वृद्ध युगल

      

     [4]

ठूँठ झखाड़~

झरोखे में चिड़िया

तिनका दाबे

 

      [5]

ज्येष्ठ मध्याह्न~

गन्ने लादे नारी के

नंगे कदम

   

      [6]

कुहासा भोर~

मुड़ा खत पकड़े

माँ दूल्हे संग

     

       [7]

भोर कुहासा~

बाला बाँधी फूलों की 

तिरंगी बेणी


     [8]

भोर लालिमा~

कूड़े के ढ़ेर संग

शिशु रूदन

 

     [9]

श्रावण साँझ~

दलदल में फँसा 

हाथी का बच्चा

    

    [10]

मावठ भोर~

लहसुन की क्यारी में

नन्ही चप्पल 


    [11]

फाग पूर्णिमा~

महिला मुख पर

गोबर छींटे


     [12]

गोस्त की गन्ध~

बालिका की गोद में

लेटा मेमना


     


गुरुवार, 14 अक्तूबर 2021

कबूतर की दादागिरी


Pigeon'sdadagiri
                    चित्र साभार pixabay से


एक कबूतर जमा रहा है,

 बिखरे दानों पर अधिकार ।

शेष कबूतर दूर हो रहे,

उसकी दादागिरी से हार ।


गोल घूमता गुटर-गुटर कर ,

गुस्से से फूला जाता ।

एक-एक के पीछे पड़कर,

उड़ा सभी को दम पाता ।


श्वेत कबूतर तो कुष्ठी से,

हैं अछूत इसके आगे ।

देख दूर से इसके तेवर,

बेचारे डरकर भागे ।


बैठ मुंडेरी तिरछी नजर से,

सबकी बैंड बजाता वो ।

सुबह से पड़ा दाना छत पर,

पूरे दिन फिर खाता वो ।


समझ ना आता डर क्यों उसका,

इतना माने पूरा दल ?

मिलकर सब ही उसे भगाने,

क्यों न लगाते अपना बल ?


किस्सों में पढ़ते हैं हम जो,

क्या ये सच में है सरदार ?

या कोई बागी नेता ये,

बना रहा अपनी सरकार ?


नील गगन के पंछी भी क्या,

झेलते होंगे सियासी मार ?

इन उन्मुक्त उड़ानों का क्या,

भरते होंगे ये कर भार ?


शनिवार, 9 अक्तूबर 2021

व्रती रह पूजन करते





Godprayer
चित्र : साभार pixabay से......



{1}

 बदली में छुपते फिरे, सावन मास मयंक।

दर्शन को मचले धरा, गगन समेटे अंक ।

गगन समेटे अंक , बहुत  ही लाड-लड़ाये।

भादो बरसे मेघ, कौन अब तुम्हें छुपाये।

कहे धरा मुस्काय, शरद में मत छुप जाना।

व्रती निहारे चाँद, प्रेमरस तुम बरसाना ।।


                         {2}

नवराते में गूँजते, माँ के भजन संगीत ।

जयकारे करते सभी,  माँ से जिनको प्रीत।

माँ से जिनको प्रीत, व्रती रह पूजन करते।

पा माँ का आशीष, कष्ट जीवन के हरते।

कहे सुधा करजोरि, करो माँ के जगराते।

हो जीवन भयमुक्त, सफल जिनके नवराते।


व्रती -- उपवासी

बुधवार, 29 सितंबर 2021

मौसम बदल जाने को है

Changeweather
                     चित्र साभार photopin.com से



अभी फलित भी ना हुई कि बेल मुरझाने को है
देखते ही देखते ,  मौसम बदल जाने को है

देर से जागे हैं तो , तत्पर संभालें आपको
है गतिज ये दोपहर फिर साँझ ढ़ल जाने को है ।

चार दिन चौमास में , बादल घुमड़ के चल दिये
दमक उठा अम्बर बदन, समझो शरद आने को है।

सिमट रही नदी भी अब, नालों का साथ ना मिला
सैकत भरे इस तीर का , उफान अब जाने को है ।

बुढिया रही बरसात अब, फूले हैं काँस केश से
दादुर दुबक रहे कहीं, 'खंजन' भी अब आने को है ।

खिल रही कली-कली , पुष्पित सभी प्रसून हैं
पयाम पुष्प पा मधुप,  सुर मधुर गाने को है ।

रविवार, 26 सितंबर 2021

आसमाँ चूम लेंगे हम


Happydaughterday
                    चित्र साभार pixabay से... 


हौसला माँ ने दिया , 'पर'  दे रहे पापा

कहकही सुन डर भला,क्यों खोयें हम आपा

यूँ ना अब से डरेंगे हम ,

आसमाँ चूम लेंगे हम 

खुशी से झूम लेंगे हम ।


ख्वाब हर पूरा करेंगे, भेड़ियों से ना डरेंगे

सीख कर जूड़ो-कराँटे, अपने लिए खुद ही लडेंगे

हर बुरी नजर की नजरें नोंच लेंगे हम

आसमाँ चूम लेंगे हम

खुशी से झूम लेंगे हम ।


देहलीज से निकले कदम अब ना रूकेंगे

निर्भय बढेंगे हौसले अब ना झुकेंगे

संस्कार हैं सरताज अपने, 

बेड़ियां इनको कभी बनने न देंगे हम

आसमांँ चूम लेंगे हम

खुशी से झूम लेंगे हम ।


सब एक जैसे तो नहीं, दुनिया भली है

तम है किसी कोने पे, रौशन हर गली है

जब साथ है अपनों का तो अब ना डरेंगे हम

आसमाँ चूम लेंगे हम

खुशी से झूम लेंगे हम।



कंटकों को चुन जिन्होंने राह बनाई

जीत ली अस्तित्व की हर इक लड़ाई

हैं उन्ही की बानगी फिर क्यों रुकेंगे हम

आसमांँ चूम लेंगे हम

खुशी से झूम लेंगे हम।


है खुला परवाज़ पर हमको मिले हैं

अपनों का है साथ तो अब क्या गिले हैं

अनुसरित पदचिह्न से कुछ और बढकर

आने वालों को पुनः नवचिह्न देंगे हम

आसमाँ चूम लेंगे हम

खुशी से झूम लेंगे हम ।।           

       

मंगलवार, 21 सितंबर 2021

आर्थिक दरकार

financial need
                
               चित्र साभार pixabay.com से


 बड़ी मेहनत से कमाया

इच्छाओं पर अंकुश लगा 

पाई-पाई कर बचाया

कुछ जरूरी जरूरतों के अलावा

नहीं की कभी मन की 

न बच्चों को करने दी

बचपन से ही उन्हें

सर सहलाकर समझाया

और कमी-बेसियों के

संग ही पढाया-लिखाया।

बुढापे की देहलीज में जाते -जाते

अपनी जमापूँजी को बड़े जतन से

बेटी - बेटों में बाँटने के लिए

सपरिवार बैठकर

सबने दिमाग घुमाया

बेटियों के ब्याह में दहेज

का बराबर हिसाब लगाया

बेटियों को विदा कर

बचे - खुचे पैसों में 

बेटे की नौकरी के मार्फत

लोन का जुगाड़ लगाया

दिन-रात एक कर

शहर में दो कमरों का 

छोटा सा घर बनाया

अपनी सफलता पर 

आप ही जश्न मना

दसों रोगों के चलते

असमय ही

विदा ले ली संसार से...


इधर बेटा नई-नई नौकरी

माता-पिता का अंतिम संस्कार

बहन-बहनोइयों का सत्कार

लोन का बोझ ढोते

बड़ा ऐश कर रहा 

लोगों की नजर में........


सुनी-सुनाई कही-कहाई सुन

अब बहनें भी आ धमकी

अपने शहरी घर

कानूनी कागजात लेकर

भाई ! हम भी हैं हिस्सेदार

इस शहरी घर पर 

हमारा भी है अधिकार 

हिस्सा दे हमारा !

 करे भी तो क्या

कानून का मारा ?...


तिस पर ये विभिन्न त्योहार 

रक्षा बंधन फिर भाई दूज

इन्हीं से तो निभता है न

भाई-बहन का पवित्र प्यार!


अब बड़ी आसानी से 

कहते हैं  लोग-बाग

पड़ौसी और रिश्तेदार

माँ-बाप तक ही होता है मायका

भाई बड़ा खुदगर्ज निकला

नहीं उसे  बहिनों से प्यार

मुँह नहीं लगाता उन्हें

हे राम ! माँ-बाप बिना

कैसे सूने हो गये

इन बेचारियों के त्योहार !


क्या करें किसे दोष दें

कौन है इन परिस्थितियों

का जिम्मेदार ?

माँ-बाप और उनके संस्कार ?

या  मध्यम वर्ग की

आर्थिक दरकार ?





गति मन्द चंद्र पे तरस आया

                    चित्र साभार,pixabay.com से बाद पूनम के चाँद वृद्ध सा सफर न पूरा कर पाया। बादल में छुपा तब भोर भानु  गति मन्द चंद्र पे तर...