सावन में भगवान शिव की महिमा पर रोला छंद
परिचय सावन आते ही मन भोलेनाथ की भक्ति में रम जाता है। चारों ओर बम-बम भोले की गूँज और शिव जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है। इसी भक्ति-भाव से प्रेरित होकर मैंने भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हुए ये रोला छंद लिखे हैं। महादेव सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। देवों के तुम देव, सदाशिव औघड़दानी । तीन लोक में नाथ, नहीं है तुम सा दानी ।। जग हित कर विष पान, नीलकंठ कहलाए । त्रिपुरारी त्रिनेत्र, भाल में चंद्र सजाए ।। नीलकंठ है नाम, आपका हे अविनाशी । हरते हर दुख दर्द, उमापति तुम कैलाशी ।। आया सावन मास , भजन भोले के गाते । काँवड लेकर साथ, भक्त जल गंग चढ़ाते ।। शिव ही आदि अनंत, जगत के तारण हारे । पूजन करते भक्त , गूँजते जय-जयकारे ।। करके जलाभिषेक, भक्तजन शीष नवाते । चहुँदिश बम-बम नाद, भक्त शिव महिमा गाते ।। शरणागत की लाज, रखें भोले भण्डारी । देवों के तुम देव, प्रभो दाता त्रिपुरारी ।। पकड़ो अब तुम हाथ, हरो प्रभु अवगुण मेरे । कृपा करो हे नाथ, शरण मैं आई तेरे ।। निष्कर्ष भगवान शिव करुणा, त्याग और कल्...