संदेश

दिसंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मैं मन्दोदरी बनूँ कैसे....?

चित्र
        प्रिय ! मैं हारा, दुख का मारा  लौट के आया      तेरे द्वार...... अब नयी सरकार जागी जनता !! भ्रष्टाचार पर मार...     "तिस पर " सी.बी.आई.के छापे मुझ जैसे डर के भागे...  पछतावा है मुझको अब  प्रिय ! मैने तुझको छोड़ा...  मतलबी निकले वे सब  नाता जिनसे मैंने जोड़ा..... आज मेरे दुख की इस घड़ी में उन सबने मुझसे है मुँह मोड़ा !!! अब बस तू ही है मेरा आधार ! मेरी धर्मपत्नी, मेरा पहला प्यार ! है तुझसे ही सम्भव,अब मेरा उद्धार ।  तू क्षमाशील, तू पतिव्रता....  प्रिय ! तू  बहुत ही चरित्रवान, सर्वगुण सम्पन्न है तू प्रिय ! तुझ पर प्रसन्न रहते भगवान !! अब जप-तप या उपवास कर प्रभु से माँगना ऐसा वरदान!!! वे क्षमा मुझे फिर कर देंगे..... मैं पुनः बन जाउँगा धनवान!!! आखिर मैं तेरा पति-परमेश्वर हूँ   कर्तव्य यही है फर्ज यही , प्रिय ! मैं ही तो तेरा ईश्वर हूँ !!! ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;          ...

रिश्ते

चित्र
थोड़ा सा सब्र , थोड़ी वफा ... थोड़ा सा प्यार , थोड़ी क्षमा जो जीना जाने रिश्ते रिश्तों से है हर खुशी । फूल से नाजुक कोमल ये महकाते घर-आँगन खो जाते हैं गर  ये तो लगता सूना सा जीवन ।         क्या खोया क्या पाया, नानी -दादी ने बैठे-बैठे, यही तो हिसाब लगाया क्या पाया जीवन में ,जिसने इनका प्यार न पाया ।        दादाजी-नानाजी की वो नसीहत  मौसी-बुआ का प्यार ।  चाचू-मामू संग सैर-सपाटे  झट मस्ती तैयार ।        कोई हँसाए तो कोई चिढ़ाए  कोई पापा की डाँट से बचाए  जीवन के सारे गुर सीख जायें  हो अगर संयुक्त परिवार ।   कितनी भी दौड़ लगा लें, कितना भी आगे जा लें । सूरज चंदा से मिले या, तारे भी जमीं पर ला लें । दुनिया भर की शाबासी से दिल को चैन कहाँ है ? अपनोंं के आशीष में ही , अपना तो सारा जहाँ है । जो जीना जाने रिश्ते रिश्तों से  है हर खुशी । बड़ी ही कोमल नाजुक सी डोरी से बंधे प्रेम के रिश्ते । समधुर भावोंं की प्रणय बन्धन से जीवन  को सजाएं रिश्ते । जोश-ज...

नारी : अतीत से वर्तमान तक

चित्र
कुछ करने की चाह लिए अस्तित्व की परवाह लिए  मन ही मन सोचा करती थी बाहरी दुनिया से डरती थी । भावों में समन्दर सी गहराई हौसले की उड़ान भी थी ऊँची  वह कैद चहारदीवारी में भी, सपनों की मंजिल चुनती थी । जग क्या इसका आधार है क्या ? धरा आसमां के पार है क्या,? अंतरिक्ष छानेगी वह इक दिन ख्वाबों में उड़ाने भरती थी । हिम्मत कर निकली जब बाहर, देहलीज लाँघकर आँगन तक । आँगन खुशबू से महक उठा, फूलों की बगिया सजती थी । अधिकार जरा सा मिलते ही, वह अंतरिक्ष तक हो आयी । जल में,थल में,रण कौशल में सक्षमता अपनी  दिखलायी । बल, विद्या, हो या अन्य क्षेत्र परचम अपना है फहराया । सबला,सक्षम हूँ, अब तो मानो अबला कहलाना कब भाया । xxxxxxxxxxxxxxxxxxx जब सृष्टि सृजन की थी शुरूआत सोच - विचार के बनी थी बात क्योंकि-- दिल से दूर पुरुष था तब, नाकाबिल, अक्षम, अनायास सृष्टि सृजन , गृहस्थ जीवन हेतु किया था सफल प्रयास पुरूषार्थ जगाने, प्रेम उपजाने, सक्षमता  का आभास कराने । कोमलांगी नाजुक गृहणी बनकर, वृषभकन्धर पर डाला था भार । अभिनय था अबला होने का...

फ़ॉलोअर

लेबल

कविता -हास्यव्यंग1 कहानी19 कह़ानी1 कहानीकविता1 कुण्डलिया छंद5 कुण्डलिया छन्द3 गजल10 गढ़वाली कविता एवं उसका हिन्दी रूपांतरण1 गढ़वाली गीत1 गर्मी पर कविता1 गर्मी पर बाल कविता1 गीत18 गीतात्मक कविता1 गुरु महिमा कविता1 गुरु महिमा पर दोहा मुक्तक1 घरेलू हिंसा1 चिड़िया1 चौपाई1 छंद कविता1 जल संरक्षण पर कविता1 जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वार्मिंग1 दोहा मुक्तक3 दोहा-मुक्तक1 दोहे7 नवगीत15 नारी सम्मान1 नारी सशक्तिकरण1 परिवार1 पाँच लिंकों का आनंद स्थापना दिवस1 पारिवारिक कहानी2 पारिवारिक रिश्ते1 पावस पर कविता1 पुस्तक समीक्षा1 प्रकृति3 प्रकृति कविता2 प्रार्थना3 प्रेणादायक आलेख1 प्रेरक लघुकथा1 प्रेरणादायक कहानी1 प्रेरणादायक हिंदी कविता1 बरसात पर कविता1 बाल कविता3 बुज़ुर्ग1 भगवान शिव1 भावनात्मक1 भावनात्मक रचना1 मन1 मनहरण घनाक्षरी2 मनहरण घनाक्षरी छंद5 महादेव1 महिला सशक्तिकरण1 महिला सशक्तिकरण पर प्रेरणादायक कहानी।1 माँ का त्याग1 माँ की ममता1 माता पिता1 माता-पिता1 मुक्तक3 मुहावरे पर आधारित लघुकथा1 मोबाइल की लत तकनीक डिजिटल जीवन1 राम भक्ति1 रिश्ते2 रोला छंद2 लघु कथा2 लघु कहानी6 लघुकथा19 लेख3 वर्षा ऋतु1 व्यंग कविता1 व्यंग लेख1 शरद ऋतु2 शराब की लत1 शिक्षा -परीक्षा1 शिव भक्ति1 शिव महिमा1 शुभकामना कविता1 संघर्ष1 संवेदनाएँ1 संस्मरण2 संस्मरणात्मक लेख1 सकारात्मक सोच1 सच्ची घटना1 सद्गुरु1 समीक्षा2 सामाजिक कहानी1 सामाजिक लेख1 साहित्य1 हाइबन1 हायकु3 हास्यव्यंग कविता1 हास्यव्यंग लघुकथाएं1 हिंदी कहानी1 हिंदी भावनात्मक कहानी1 हिंदी लघुकथा प्रेरक लघुकथा रिश्ते मनमुटाव संवाद जीवन दर्शन1 हिंदी लघुकथा माँ का त्याग प्रेरक लघुकथा प्रेरणादायक कहानी1 हिंदी लेख1 हिंदी साहित्य1 हिन्दी कविता1
ज़्यादा दिखाएं