गुरुवार, 6 जुलाई 2023

दुखती रगों को दबाते बहुत हैं

 

Gajal

दुखती रगों को दबाते बहुत हैं,

कुछ अपने, दुखों को बढ़ाते बहुत हैं ।


सुनकर सफलता मुँह फेरते जो,

खबर हार की वो फैलाते बहुत हैं ।


अंधेरों में तन्हा डरा छोड़़ जाते,

उजालों में वे साथ आते बहुत हैं ।


भूखे से बासी भी भोजन छुपाते,

मनभर को छक-छक खिलाते बहुत हैं ।


बनी बात सुनने की फुर्सत नहीं है,

बिगड़ी को फिर-फिर दोहराते बहुत हैं ।


पूछो तो कुछ भी नहीं जानते हैं ,

भटको तो ताने सुनाते बहुत है ।


बड़े प्यार से अपनी नफरत निभाते,

समझते नहीं पर समझाते बहुत हैं ।


दिखाना है इनको मंजिल जो पाके,

इसी होड़ में कुछ, कमाते बहुत हैं ।


तानों से इनके आहत ना हों तो,

अनजाने ही दृढ़ बनाते बहुत हैं ।







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