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बहुत समय से बोझिल मन को इस दीवाली खोला |दीपावली पर भावपूर्ण हिंदी गीत

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परिचय  दीपावली केवल घर को दीपों से सजाने का पर्व नहीं, बल्कि मन के भीतर जमा अंधकार और बोझ को दूर करने का अवसर भी है। “बहुत समय से बोझिल मन को इस दीवाली खोला”  गीत इसी आत्ममंथन की यात्रा है, जिसमें अपेक्षाओं और निराशाओं को छोड़कर आत्मबल, संतोष और सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया गया है। बहुत समय से बोझिल मन को  इस दीवाली खोला भारी भरकम भरा था उसमें  उम्मीदों का झोला कुछ अपने से कुछ अपनों से  उम्मीदें थी पाली कुछ थी अधूरी, कुछ अनदेखी  कुछ टूटी कुछ खाली बड़े जतन से एक एक को , मैंने आज टटोला बहुत समय से बोझिल मन को इस दीवाली खोला दीप जला करके आवाहन,  माँ लक्ष्मी से बोली मनबक्से में झाँकों तो माँ ! भरी दुखों की झोली क्या न किया सबके हित,  फिर भी क्या है मैने पाया क्यों जीवन में है मंडराता ,  ना-उम्मीदी का साया ? गुमसुम सी गम की गठरी में, हुआ अचानक रोला बहुत समय से बोझिल मन को इस दीवाली खोला प्रकट हुई माँ दिव्य रूप धर,  स्नेहवचन फिर बोली ये कैसा परहित बोलो,  जिसमें उम्मीदी घोली अनपेक्षित मन भाव लिए जो , भला सभी का करते सुख, समृद्धि, सौहा...

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