रक्षाबंधन | भाई-बहन के प्रेम और आपसी रक्षा की भावपूर्ण कहानी
परिचय रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर बहन द्वारा बाँधा गया रक्षा-सूत्र ही नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे का साथ निभाने का सुंदर संकल्प है। क्या सचमुच रक्षा का दायित्व केवल भाई का होता है? आइए, शौर्य और उसकी दीदी की इस प्यारी-सी कहानी के माध्यम से जानते हैं कि बहन भी किस तरह बचपन से ही अपने भाई की रक्षा करती रहती है। रक्षाबंधन के दिन हमेशा की तरह आरती की थाल में दो राखियाँ देख शौर्य ने इस बार माँ से पूछा, "मम्मी! सबके घर में सिर्फ़ बहन ही भाई को राखी बाँधती है और हमने फिल्मों में भी यही देखा है न। फिर आप ही क्यों मुझसे भी दीदी को राखी बँधवाती हो" ? तो माँ बोली, "बेटा जानते हो न ये रक्षा बंधन है और इसका मतलब"... "हाँ हाँ जानता हूँ रक्षा करने का प्रॉमिस है रक्षा बंधन का मतलब , पर दीदी इतनी सुकड़ी सी... ये भला मेरी रक्षा कैसे करेगी ? मम्मी ! रक्षा तो मैं इसकी करुँगा बड़े होकर। पड़ौस वाले भैय्या की तरह एकदम बॉडी बिल्डर बनकर...। इसीलिए मम्मी! अब से सिर्फ दीदी ही मुझे राखी बाँधेगी मैं उसे नही" । माँ की बात बीच में ही काटकर शौर्य...