परित्यक्ता नहीं..परित्यक्त | पति की बेवफाई और सास ससुर का साथ - हिन्दी कहानी

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परिचय क्या एक पत्नी सिर्फ इसलिए सब कुछ सहती रहे क्योंकि उसके पास मायके से विदा लेने बाद जाने के लिए कोई और ठिकाना नहीं है ? क्या प्रेम विवाह करने वाली स्त्री अपने ही रिश्तों में सबसे अधिक अकेली हो जाती है ? यह कहानी है सना की जिसे पति की बेवफाई ने तोड़ने की कोशिश की लेकिन उसके सास ससुर ने उसे परित्यक्ता नहीं बल्कि सम्मानित बेटी बनाकर दुनिया के सामने एक मिसाल कायम कर दी पढ़िए रिश्तों विश्वासघात और स्वाभिमान की हृदयस्पर्शी हिंदी कहानी दिल्ली की हल्की ठंडी सुबह थी। खिड़की से छनकर आती धूप ड्रॉइंग रूम के फर्श पर सुनहरी चादर बिछा रही थी, लेकिन सना के मन में जैसे धूप का एक कतरा भी नहीं बचा था। पिछले कुछ महीनों से वह प्रतीक के व्यवहार में बदलाव साफ महसूस कर रही थी। देर रात तक मोबाइल पर मुस्कुराकर बातें करना, उसके आते ही स्क्रीन लॉक कर देना, छोटी-छोटी बातों पर झल्ला उठना—सब कुछ बदलता जा रहा था। "प्रतीक! आज बच्चों के स्कूल में पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग है... तुम भी चलोगे?" सना ने धीमे स्वर में पूछा। प्रतीक ने मोबाइल से नजर उठाए बिना कहा— "मुझसे क्यों पूछ रही हो? अपने काम खुद नहीं कर ...

राजनीति और नेता


       

pencil cartoon with aggression expressionShri Narendra Modi

    
आज मेरी लेखनी ने 
राजनीति की तरफ देखा,
 आँखें इसकी चौंधिया गयी 
मस्तक पर छायी गहरी रेखा।
                                                                               
  संसद भवन मे जाकर इसने
    नेता देखे बडे-बडे,
 कुछ पसरे थे कुर्सी पर ,
     कुछ भाषण देते खडे-खडे।
                     
          कुर्सी का मोह है ,
        शब्दों में जोश है,
 विपक्ष की टाँग खींचने का 
     तो इन्हें बडा होश है।
                
    लकीर के फकीर ये,और 
      इनके वही पुराने मुद्दे,
      बहस करते वक्त लगते 
        ये बहुत ही भद्दे

  काम नहीं राम मंदिर की 
     चर्चा इन्हें प्यारी है,
  शुक्र है इतना कि अभी 
    मोदी जी की बारी है।
                                        
     मोदी जी का साथ है,
     देश की ये आस है।
     कुछ अलग कर रहे हैं,
        और अलग करेंगें,
    यही हम सबका विश्वास है।
                                   
   लडखडाती अर्थव्यवस्था की 
       नैया को पार लगाना है
विपक्ष को अनसुना कर मोदी जी
     आपको देश आगे बढाना है।
                                                             

टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 14 दिसम्बर 2022 को साझा की गयी है...
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. हार्दिक धन्यवाद आ.यशोदा जी ! मेरी रचना को मंच प्रदान करने हेतु ।

    जवाब देंहटाएं
  3. सार्थक सोच । मोदी पर अभी बजी विश्वास कायम है ।
    यशोदा ने 14 दिसंबर लिखा तो एक बार सोचना पड़ा कि आज क्या तारीख है ।

    जवाब देंहटाएं
  4. लडखडाती अर्थव्यवस्था की
    नैया को पार लगाना है
    विपक्ष को अनसुना कर मोदी जी
    आपको देश आगे बढाना है।
    मोदी जी ने आपकी कही सुन ली सुधा जी और यकिनन आपको निराश भी नहीं किया ☺️

    जवाब देंहटाएं
  5. गोपेश मोहन जैसवाल21 दिसंबर 2022 को 5:09 pm बजे

    सुधा जी, राजनेताओं की तारीफ़ और उनका समर्थन तभी कीजिए जब आपको राजनीतिक दलदल में कूदना हो.

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  6. मन के भावों की सुंदर सराहनीय अभिव्यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं

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