तीन कुण्डलिया :- भारत महान, हार और विचलित

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अनुभूति पत्रिका में प्रकाशित  तीन कुण्डलिया कुण्डलिया हिन्दी साहित्य का एक लोकप्रिय छंद है जो अपनी लय, भाव और संदेश के कारण पाठकों को आकर्षित करता है। प्रस्तुत हैं तीन कुण्डलिया— 'भारत महान', 'हार' और 'विचलित'। इन रचनाओं में देशप्रेम, संघर्ष में सकारात्मक सोच तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया है।  भारत महान सारे जग मे हो रहा ,भारत का गुणगान । शुभ संस्कारी भावना, है इसकी पहचान ।  है इसकी पहचान, सभ्यता बड़ी निराली । सर्व धर्म सत्कार, बनाता गौरवशाली । कहे सुधा सुन मीत, लगा लो तुम भी नारे । भारत देश महान, कह रहे जग में सारे।। हार हार करें स्वीकार जो, होते नहीं निराश । सतत परिश्रम कर सदा,मन में रखते आस ।। मन में रखते आस, नहीं बाधा से डरते । गिरकर उठते रोज, कभी ना मन से थकते ।। कहे सुधा निज बात, है यही जीत का सार । करते रहें प्रयास, सौपान बनेगी हार ।। बिचलित विचलित गर मन हो रहा, कर लें प्राणायाम । साधें श्वास - प्रश्वास निज, मिले सुखद आराम ।। मिले सुखद आराम, धैर्य मन में है आता । मिटे बिचार विकार, भाव निर्मल हो जाता ।। कहे सुधा सुन मीत,श्वास साधें जो नियमित...

राजनीति और नेता


       

pencil cartoon with aggression expressionShri Narendra Modi

    
आज मेरी लेखनी ने 
राजनीति की तरफ देखा,
 आँखें इसकी चौंधिया गयी 
मस्तक पर छायी गहरी रेखा।
                                                                               
  संसद भवन मे जाकर इसने
    नेता देखे बडे-बडे,
 कुछ पसरे थे कुर्सी पर ,
     कुछ भाषण देते खडे-खडे।
                     
          कुर्सी का मोह है ,
        शब्दों में जोश है,
 विपक्ष की टाँग खींचने का 
     तो इन्हें बडा होश है।
                
    लकीर के फकीर ये,और 
      इनके वही पुराने मुद्दे,
      बहस करते वक्त लगते 
        ये बहुत ही भद्दे

  काम नहीं राम मंदिर की 
     चर्चा इन्हें प्यारी है,
  शुक्र है इतना कि अभी 
    मोदी जी की बारी है।
                                        
     मोदी जी का साथ है,
     देश की ये आस है।
     कुछ अलग कर रहे हैं,
        और अलग करेंगें,
    यही हम सबका विश्वास है।
                                   
   लडखडाती अर्थव्यवस्था की 
       नैया को पार लगाना है
विपक्ष को अनसुना कर मोदी जी
     आपको देश आगे बढाना है।
                                                             

टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 14 दिसम्बर 2022 को साझा की गयी है...
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. हार्दिक धन्यवाद आ.यशोदा जी ! मेरी रचना को मंच प्रदान करने हेतु ।

    जवाब देंहटाएं
  3. सार्थक सोच । मोदी पर अभी बजी विश्वास कायम है ।
    यशोदा ने 14 दिसंबर लिखा तो एक बार सोचना पड़ा कि आज क्या तारीख है ।

    जवाब देंहटाएं
  4. लडखडाती अर्थव्यवस्था की
    नैया को पार लगाना है
    विपक्ष को अनसुना कर मोदी जी
    आपको देश आगे बढाना है।
    मोदी जी ने आपकी कही सुन ली सुधा जी और यकिनन आपको निराश भी नहीं किया ☺️

    जवाब देंहटाएं
  5. गोपेश मोहन जैसवाल21 दिसंबर 2022 को 5:09 pm बजे

    सुधा जी, राजनेताओं की तारीफ़ और उनका समर्थन तभी कीजिए जब आपको राजनीतिक दलदल में कूदना हो.

    जवाब देंहटाएं
  6. मन के भावों की सुंदर सराहनीय अभिव्यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं

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