रक्षाबंधन पर रोला छंद | भ्रात की सजी कलाई
परिचय रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का पावन पर्व है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधकर उसके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती है। प्रस्तुत ‘भ्रात की सजी कलाई’ रोला छंद में रक्षाबंधन के इसी प्रेमपूर्ण और भावनात्मक स्वरूप को शब्दों में अभिव्यक्त किया गया है। सावन पावन मास , बहन है पीहर आई । राखी लाई साथ, भ्रात की सजी कलाई ।। टीका करती भाल, मधुर मिष्ठान खिलाती । देकर शुभ आशीष, बहन अतिशय हर्षाती ।। सावन का त्यौहार, बहन राखी ले आयी । अति पावन यह रीत, नेह से खूब निभाई ।। तिलक लगाकर माथ, मधुर मिष्ठान्न खिलाया । दिया प्रेम उपहार , भ्रात का मन हर्षाया ।। राखी का त्योहार, बहन है राह ताकती । थाल सजाकर आज, मुदित मन द्वार झाँकती ।। आया भाई द्वार, बहन अतिशय हर्षायी । बाँधी रेशम डोर, भ्रात की सजी कलाई ।। निष्कर्ष रक्षाबंधन केवल कलाई पर बाँधी गई राखी का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और आत्मीय रिश्ते का उत्सव है। राखी की यह रेशम डोर जीवनभर स्नेह और अपनत्व का संदेश देती रहे—इसी मंगलकामना के साथ मेरी यह रक्षाबंधन पर रोला छंद रचना आपको समर्पित है...