कटता नहीं वक्त, अब नीड़ भी रिक्त | माता-पिता की भावुक हिंदी कविता
परिचय बच्चे जब अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए घर की चौखट पार करते हैं, तब माता-पिता के हृदय में एक साथ कई भाव जन्म लेते हैं—उनकी सफलता का गर्व, उज्ज्वल भविष्य की कामना और घर के सूने हो जाने की कसक। जीवन भर जिन हाथों ने उनका साथ थामा, वही हाथ अब दूर से उन्हें आशीर्वाद देते रहते हैं। प्रस्तुत कविता इन्हीं अनकहे एहसासों और माता-पिता के निस्वार्थ प्रेम की संवेदनशील अभिव्यक्ति है। वो मंजिल को अपनी निकलने लगे हैं, कदम चार माँ-बाप भी संग चले हैं । बीती उमर के अनुभव सुनाकर आशीष में हाथ बढ़ने लगे हैं । सुबह शाम हर पल फिक्र में उन्हीं की अतीती सफर याद करने लगे ह़ै । सफलता से उनकी खुश तो बहुत हैं मगर दूरियों से मचलने लगे हैं । राहें सुगम हों जीवन सफर की दुआएं सुबह शाम करने लगे हैं । मंदिम लगे जब कभी नूर उनका अर्चन में प्रभु से उलझने लगे हैं । कटता नहीं वक्त,अब नीड़ भी रिक्त परिंदे जो 'पर' खोल उड़ने लगे हैं । निष्कर्ष संतान की सफलता हर माता-पिता का सबसे बड़ा सपना होती है। फिर भी उनके चले जाने के बाद घर का हर कोना उनकी यादों से भर जाता है। प्रेम कभी दूरी से कम नहीं होता; वह तो दुआओँ का रूप...