तेरी रहमत पे भरोसा है मुझे | एक हृदयस्पर्शी संस्मरण
परिचय भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपने आसपास के छोटे-छोटे जीवों और प्रकृति की संवेदनाओं को अनदेखा कर देते हैं। किंतु कभी-कभी कोई साधारण-सी घटना जीवन का ऐसा गहरा सत्य सामने रख देती है, जो ममता, धैर्य, करुणा और ईश्वर पर अटूट विश्वास का वास्तविक अर्थ समझा जाती है। प्रस्तुत संस्मरण ऐसी ही एक हृदयस्पर्शी अनुभूति का साक्षी है। धू - धू कर धधकती आग और आसमान में लौंकते धुएं को देखा तो उस नन्हीं चिड़िया का ख्याल आया जिसने उस काँस की घास से भरे बड़े से प्लॉट के बीच खड़े उस बबूल के पेड़ पर अपना नीड़ बनाया है । पिछले कुछ दिनों से छत पर धूप सेंकते हुए उसे देखती रही थी। कब उससे एक अनकहा अपनापन जुड़ गया, पता ही नहीं चला। धधकती आग देखकर व्याकुल मन मे तुरंत उसी चिड़िया का ख्याल आया तो मन ही मन बड़बड़ाई, "अरे ! उसके बच्चे तो अभी बहुत छोटे हैं , उड़ नहीं सकते । मन किसी अनहोनी की आशंका से भर उठा। झट से सीढ़ियाँ चढ़ते हुए छत में गई तो देखा आग सूखी काँस पर बड़ी तेजी आगे बढ़ रही है । क्या करूँ ! कैसे बचाऊँ इसके नन्हें चूजों को ? मन में बेचैनी बढ़ी तो सोसायटी इंचार्ज को फोन किया । वे बड़े आश्वस्त होकर बोले, ...