और एक साल बीत गया | समय और जीवन पर भावपूर्ण हिंदी कविता
परिचय समय अपनी गति से निरंतर आगे बढ़ता रहता है और देखते ही देखते एक और साल हमारी जिंदगी से गुजर जाता है। ‘और एक साल बीत गया’ समय, उम्र, जीवन की भागदौड़ और आत्मचिंतन पर आधारित एक भावपूर्ण हिंदी कविता है। यह रचना हमें जीवन की दौड़ में कुछ पल ठहरकर अपने भीतर झाँकने, जो मिला है उसे सहेजने और संतोष के साथ जीवन जीने का संदेश देती है। प्रदत्त पंक्ति ' और एक साल बीत गया' पर मेरा एक प्रयास और एक साल बीत गया दिन मास पल छिन श्वास तनिक रीत गया हाँ ! और एक साल बीत गया ! ओस की सी बूँद जैसी उम्र भी टपक पड़ी अंत से अजान ऐसी बेल ज्यों लटक खड़ी मन प्रसून पर फिर से आस भ्रमर रीझ गया और एक साल बीत गया ! साल भर चैन नहीं पाने की होड़ लगी और, और, और अधिक संचय की दौड़ लगी भान नहीं पोटली से प्राण तनिक छीज गया और एक साल बीत गया ! जो है सहेज उसे चैन की इक श्वास तो ले जीवन उद्देश्य जान सुख की कुछ आस तो ले मन जो संतुष्ट किया वो ही जग जीत गया और एक साल बीत गया ! निष्कर्ष हर बीतता हुआ साल हमें यह याद दिलाता है कि जीवन केवल अधिक पाने और जोड़ने...