बीती ताहि बिसार दे -अतीत छोड़कर वर्तमान में जीने की कला
परिचय :- क्या आप भी बार-बार अपनी पुरानी बातों और दुखद यादों में खो जाते हैं? क्या बीता हुआ कल आज की खुशियों पर भारी पड़ता है? यदि हाँ, तो “बीती ताहि बिसार दे” केवल एक कहावत नहीं, बल्कि जीवन को सरल और सुखी बनाने का एक गहरा मंत्र है। अतीत को छोड़कर ही वर्तमान में सच्ची खुशी मिलती है । अतीत की यादें हमें क्यों सताती हैं : अतीत का दामन थामें मन कभी-कभी अतीत के भीषण बियाबान में पहुँच जाता है और भटकने लगता है — उसी तकलीफ के साथ जिससे वर्षों पहले उबर भी चुका था। दुखद यादें धीरे-धीरे मन और ध्यान में उतर जाती हैं। वे बीते घावों की पपड़ियाँ खुरचकर उस दर्द को फिर से ताज़ा कर देती हैं। हमें पता भी नहीं चलता कि यादों के झुरमुट में फँसकर हम अनजाने में उन्हीं कष्टों को दोबारा जी रहे होते हैं, जिनसे हम बड़ी बहादुरी से पार पा चुके थे। नकारात्मक सोच का वर्तमान पर प्रभाव कहा जाता है कि हम जिस पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वही हमारे जीवन में बढ़ने लगता है। ऐसे में, जब हम बार-बार बीते दुखों का ध्यान...