परित्यक्ता नहीं..परित्यक्त | पति की बेवफाई और सास ससुर का साथ - हिन्दी कहानी

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परिचय क्या एक पत्नी सिर्फ इसलिए सब कुछ सहती रहे क्योंकि उसके पास मायके से विदा लेने बाद जाने के लिए कोई और ठिकाना नहीं है ? क्या प्रेम विवाह करने वाली स्त्री अपने ही रिश्तों में सबसे अधिक अकेली हो जाती है ? यह कहानी है सना की जिसे पति की बेवफाई ने तोड़ने की कोशिश की लेकिन उसके सास ससुर ने उसे परित्यक्ता नहीं बल्कि सम्मानित बेटी बनाकर दुनिया के सामने एक मिसाल कायम कर दी पढ़िए रिश्तों विश्वासघात और स्वाभिमान की हृदयस्पर्शी हिंदी कहानी दिल्ली की हल्की ठंडी सुबह थी। खिड़की से छनकर आती धूप ड्रॉइंग रूम के फर्श पर सुनहरी चादर बिछा रही थी, लेकिन सना के मन में जैसे धूप का एक कतरा भी नहीं बचा था। पिछले कुछ महीनों से वह प्रतीक के व्यवहार में बदलाव साफ महसूस कर रही थी। देर रात तक मोबाइल पर मुस्कुराकर बातें करना, उसके आते ही स्क्रीन लॉक कर देना, छोटी-छोटी बातों पर झल्ला उठना—सब कुछ बदलता जा रहा था। "प्रतीक! आज बच्चों के स्कूल में पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग है... तुम भी चलोगे?" सना ने धीमे स्वर में पूछा। प्रतीक ने मोबाइल से नजर उठाए बिना कहा— "मुझसे क्यों पूछ रही हो? अपने काम खुद नहीं कर ...

आई है बरसात (रोला छंद)

अनुभूति पत्रिका में प्रकाशित रोला छंद

Poem rola chhand

आया सावन मास,  झमाझम बरखा आई।

रिमझिम पड़े फुहार, चली शीतल पुरवाई।

भीनी सौंधी गंध, सनी माटी से आती।

गिरती तुहिन फुहार, सभी के मन को भाती ।।


गरजे नभ में मेघ, चमाचम बिजली चमके ।

झर- झर झरती बूँद, पात मुक्तामणि दमके ।

आई है बरसात,  घिरे हैं बादल काले ।

बरस रहे दिन रात, भरें हैं सब नद नाले ।।


रिमझिम पड़े फुहार, हवा चलती मतवाली ।

खिलने लगते फूल, महकती डाली डाली ।

आई है बरसात, घुमड़कर बादल आते ।

गिरि कानन में घूम, घूमकर जल बरसाते ।।


बारिश की बौछार , सुहानी सबको लगती ।

रिमझिम पड़े फुहार, उमस से राहत मिलती ।

बहती मंद बयार , हुई खुश धरती रानी ।

सजी धजी है आज, पहनकर चूनर धानी ।।


हार्दिक अभिनंदन आपका🙏

पढ़िए बरसात पर एक और रचना निम्न लिंक पर

● रिमझिम रिमझिम बरखा आई


टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुन्दर छंद हैं ... बरखा की बहार जारी है ...

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 04 अगस्त 2025 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  3. 24 मात्राओं में इतनी खूबसूरती से प‍िरो द‍िया है आपने भावनाओं को ...वाह

    जवाब देंहटाएं

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