शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

"अब इसमें क्या अच्छा है ?...



cute question mark greeting with a smile


जो भी होता है अच्छे के लिए होता है
     जो हो गया अच्छा ही हुआ।
जो हो रहा है वह भी अच्छा ही हो रहा है। 
  जो होगा वह भी अच्छा ही होगा......
    अच्छा ....अच्छा ..... अच्छा.......!!!
"जीवन में सकारात्मक सोच रखेंगे  
••••••••तो सब अच्छा होगा" !!!
          मूलमंत्र माना इसे मैने....
और अपने मन में, सोच में , व्यवहार में
         भरने की कोशिश भी की....
परन्तु हर बार कुछ ऐसा हुआ अब तक,
         कि प्रश्न किया मन ने मुझसे ,
         कभी अजीब सा मुँह बिचकाकर...
           तो कभी कन्धे उचकाकर
       "भला अब इसमें क्या अच्छा है" ??
क्या करूँ ?... कैसे बहलाऊँ ...... इस नादान मन को ? ?
       बहलाने भी कहाँँ देता है ? .........
       जब भी कुछ कहना चाहूँ ;
       ये मुझसे पहले ही कहता है....
बस -बस अब रहने भी दे !....बहुत सुन लिया....अब बस कर !
          हैं विपरीत परिस्थितियां
         समझौता इनसे करने भी दे.....
         अच्छा है या  फिर बुरा है,
         जो है सच उसमें जीने भी दे.....
बस !अपनी ये सकारात्मक सोच को अपने पास ही रहने दे.!
          अपना सा मुँह लिए
           चुप रह जाती हूँ मैं.....
       " अब इसमें क्या अच्छा है "????
       इसी प्रश्न में कहीं खो सी जाती हूँ .......
और फिर शून्य में ताकती खुदबुदाती रह जाती हूँ
                प्रश्न पर निरूत्तर सी......



                                     चित्र: साभार गूगल से....

18 टिप्‍पणियां:

anita _sudhir ने कहा…

बेहद खूबसूरत

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

'क्या?', 'क्यूं?', 'कैसे?'
ऐसे सवाल बच्चे पूछते हैं या फिर अक्ल के कच्चे पूछते हैं.
आपके दिलो-दिमाग में गाँधी जी के तीनों बंदरों के गुण एक साथ समाहित होने पर आपको बधाई !

Jyoti Dehliwal ने कहा…

सुधा दी,कई बार संकटों से तंग आकर इंसान ऐसा सोचता हैं कि इसमें अच्छा क्या हैं। लेकिन हर घटना के पीछे कुछ न कुछ अच्छाई छिपी होती हैं जो परेशान इंसान को दिखाई नहीं देती। परेशान दिल का हाल बखूबी व्यक्त किया हैं आपने।

SUJATA PRIYE ने कहा…

वाह बहुत सुंदर संकलन।सचमुच साकारात्मक सोंच रखने से सब अच्छा होता है।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद अनीता जी !
ब्लॉग पर आपका स्वागत है...

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद सर!
सादर आभार...

Sudha Devrani ने कहा…

बहुत बहुत धन्यवाद ज्योति जी !
सस्नेह आभार...

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद सुजाता जी !
सादर आभार..

उर्मिला सिंह ने कहा…

बहुत सुन्दर

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत उम्दा

Ritu asooja rishikesh ने कहा…

वाह बेहतरीन सुधा जी इसमें भी अच्छा है कि सकारात्मकता की ऊर्जा काम करती है,जैसे सूर्य का प्रकाश ......

Abhilasha ने कहा…

वाह बेहतरीन रचना

मन की वीणा ने कहा…

गजब सुधा जी सच बयां किया आपने कैसी असमंजस की स्थिति होती है ना।
अब इसमें क्या अच्छा है वाहह्ह्

Sudha Devrani ने कहा…

बहुत बहुत आभार उर्मिला जी !
ब्लॉग पर आपका स्वागत है ।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक आभार लोकेश जी !

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद रितु जी !
सस्नेह आभार...।

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद अभिलाषा जी !

Sudha Devrani ने कहा…

जी कुसुम जी !बहुत बहुत धन्यवाद आपका...

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