गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

मेरे दीप तुम्हें जलना होगा

 

 है अंधियारी रात बहुत,
अब तुमको ही तम हरना होगा...
हवा का रुख भी है तूफानी, फिर भी
   मेरे दीप तुम्हें जलना होगा !!!

मंदिम-मंदिम ही सही तुम्हें,
हर हाल में रौशन रहना होगा....
  हैं आशाएं बस तुमसे ही,
मेरे दीप तुम्हें जलना होगा !!!

 तूफान सामने से गुजरे जब,
शय मिले जिधर लौ उधर झुकाना...
शुभ शान्त हवा के झोकों संग,
फिर हौले से  तुम जगमगाना !!!

अब हार नहीं लाचार नहीं
हर तिमिर तुम्हेंं हरना होगा...
उम्मीदों की बाती बनकर,
मेरे दीप तुम्हें जलना होगा !!!

राहों में अंधेरापन इतना,गर
तुम ही नहीं तो कुछ भी नहीं....
क्या पाया यों थककर हमने,
मंजिल न मिली तो कुछ भी नहीं !!!

हौसला निज मन में रखकर,
तूफ़ानों से अब लड़ना होगा ....
ज्योतिर्मय मन सार्थक जीवन,
अब तुमको ही करना होगा !!!

जलने मिटने से क्या डरना,
नियति यही किस्मत भी यही....
रौशन हो जहांं कर्तव्य निभे,
अविजित अपराजित रहना होगा !!!

अंधियारों में प्रज्वलित रह तुमको
मेरे जग को ज्योतिर्मय करना होगा
तूफानो में अविचलित रहकर के
अब ज्योतिपुंज बनना होगा

मेरे दीप तुम्हें जलना होगा !!!


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