मंगलवार, 18 अक्तूबर 2022

शरद भोर

 मनहरण घनाक्षरी 

Sun rise

मोहक निरभ्र नभ

भास्कर विनम्र अब

अति मनभावनी ये

शरद की भोर है


पूरब मे रवि रथ

शशि भी गगन पथ 

स्वर्णिम से अंबरांत

छटा हर छोर हैं


सेम फली झूम रही

पवन हिलोर बही

मालती सुगंध भीनी

फैली चहुँ ओर है


महकी कुसुम कली

विहग विराव भली

टपकन तुहिन बिंदु

खुशी की ज्यों लोर है


लोर - अश्रु 





21 टिप्‍पणियां:

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

वाह ! बहुत खूब

मन की वीणा ने कहा…

क्या बात है सुधा जी! मोहक सरस रचना।
सुंदर वर्णन शरद आगमन के साथ मोहक रूप प्रकृति का।
बहुत बहुत सुंदर।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आदरणीय !

Sudha Devrani ने कहा…

दिल से धन्यवाद एवं आभार कुसुम जी !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

शरद को शब्दों में बखूबी बाँधा है । भोर की छटा निराली है । सुंदर सृजन ।

Sudha Devrani ने कहा…

जी , हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आपका 🙏🙏।

विश्वमोहन ने कहा…

वाह! क्या बात है! बहुत मोहक प्रस्तुति!

Meena Bhardwaj ने कहा…

महकी कुसुम कली
विहग विराव भली
टपकन तुहिन बिंदु
खुशी की ज्यों लोर है
मनमोहक सृजन ।

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार २१ अक्टूबर २०२२ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

Sudha Devrani ने कहा…

सादर आभार एवं धन्यवाद आ.विश्वमोहन जी !

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद मीनाजी!

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार श्वेता जी मेरी रचना को पाँच लिंको के आनंद मंच के लिए चयनित करने हेतु ।

Onkar ने कहा…

बहुत ही सुन्दर

रेणु ने कहा…

पूरब मे रवि रथ
शशि भी गगन पथ
स्वर्णिम से अंबरांत
छटा हर छोर हैं////
बहुत सुन्दर और मनभावन अभिव्यक्ति प्रिय सुधा जी।मोहक शब्दों में सहजता से उतार कर आपने शरद की भोर को और भी मोहक बना दिया है।हार्दिक बधाई और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।♥️♥️🌹🌹

Bharti Das ने कहा…

बहुत बहुत सुन्दर रचना

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद एवं आभाररेणु जी ! आपकी अनमोल प्रतिक्रिया पाकर सृजन सार्थक हुआ।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार भारती जी !

MANOJ KAYAL ने कहा…

सुन्दर रचना। दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ l

Ankur Jain ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति। दीपावली की शुभकामनाएं।

Jyoti Dehliwal ने कहा…

शरद की भोर को अपने मोहक शब्दों द्वारा आपने और भी म9हक बना दिया है, सुधा दी। बहुत सुंदर रचना।

Jigyasa Singh ने कहा…

भोर पर इतनी सुंदर घनाक्षरी । मनमोहक, मनोहारी,मनहर वर्णन । बधाई सखी ।

गई शरद आया हेमंत

गई शरद आया हेमंत , हुआ गुलाबी दिग दिगंत । अलसाई सी लोहित भोर, नीरवता पसरी चहुँ ओर । व्योम उतरता कोहरा बन, धरा संग जैसे आलिंगन । तुहिन कण मोत...