गणपति वंदना भगवान गणेश की भक्तिमय कविता
परिचय श्रीगणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले उनका स्मरण मन में श्रद्धा और विश्वास भर देता है। इसी भक्तिभाव से मैंने गणपति वंदना के रूप में अपने भाव शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है। जय जय जय गणराज गजानन गौरी सुत , शंकर नंदन । प्रथम पूज्य तुम मंगलकारी करते हम करबद्ध वंदन । मूस सवारी गजमुखधारी मस्तक सोहे रोली चंदन । भावसुमन अर्पित करते हम हर लो प्रभु जग के क्रंदन । सिद्धि विनायक हे गणनायक विघ्नहरण मंगलकर्ता । एकदंत प्रभु दयावंत तुम करो दया संकटहर्ता । चौदह लोक त्रिभुवन के स्वामी रिद्धि सिद्धि दातार प्रभु ! बुद्धि प्रदाता, देव एकाक्षर भरो बुद्धि भंडार प्रभु ! शिव गिरिजा सुत लम्बोदर प्रभु कोटि-कोटि प्रणाम सदा । श्रीपति श्री अवनीश चतुर्भुज विरजें मन के धाम सदा। निष्कर्ष विघ्नहर्ता गणपति से यही प्रार्थना है कि उनकी कृपा सब पर बनी रहे और सभी के जीवन में सुख, शांति तथा सद्बुद्धि का प्रकाश बना रहे।