प्राणायाम - दिल -दिमाग को स्वस्थ बनाये | प्राणायाम पर कविता
परिचय आज की व्यस्त जीवनशैली में शरीर के साथ मन को स्वस्थ और संतुलित रखना भी जरूरी है। प्राणायाम और ध्यान इसी ओर ध्यान दिलाते हैं। मन की चंचलता, एकाग्रता और आत्मचिंतन के भावों को समेटती मेरी यह कविता प्राणायाम की उपयोगिता को अपने ढंग से अभिव्यक्त करती है। जिम एरोबिक एक्सरसाइज, तन को स्वस्थ बनाते । हेल्दी-वेल्थी तो कहते सब , मन की सोच ना पाते । हर चौथे दिन बंक मारते, मन नहीं जिम जाने का । हेल्दी वेल्थी छोड़ - छाड़, मन जंक फूड खाने का । हास्य-आसन मे 'हा-हा' करते, मूड नहीं खुश रहता । सब कुछ होकर भी नाखुश से, मन खाली सा रहता । कुछ भी नहीं 'मन' पर मालिक बन, अपना रौब दिखाता । कभी उछलता बच्चों सा बन कभी ये रुग्ण बनाता । गौर करें आओ इस मन पर, मन है बड़ा अलबेला ! कभी हँसाता कभी रुलाता, खेले अद्भुत खेला । चेतन, अवचेतन ,अचेतन, भेद हैं इसके ऐसे । आधिपत्य हो जिसका इनपे, शासक स्व का जैसे । 'स्व-राज' तन-मन पर जिसका, मति एकाग्र कर पाता । हेल्दी-वेल्थी और वाइज बन, जीवन सफल बनाता । समझें तो 'मन' समझ ना आता, करें तो है आसान । एक्सरसाइज करते ही हैं, बाद करें कुछ ध्यान । श्वासों...