मिला कुण्डली ब्याहते ! विवाह और रिश्तों पर दोहे
परिचय विवाह के बाद जब दो लोग एक-दूसरे के जीवन का हिस्सा बनते हैं, तो रिश्ते में प्रेम के साथ-साथ समझ और सामंजस्य की भी जरूरत होती है। इसी रिश्ते के अलग-अलग रंगों और मन के भावों को मैंने इन दोहों में शब्द देने का प्रयास किया है। मिला कुण्डली ब्याहते, ग्रह गुण मेल आधार । अजनबी दो एक बन, बसे नया घर - बार । निकले दिन हफ्ते गये, गये मास फिर साल । कुछ के दिल मिल ही गये, कुछ का खस्ता हाल। दिल मिल महकी जिंदगी, घर आँगन गुलजार । जोड़ी जो बेमेल सी, जीवन उनका भार । कुछ इकतरफा प्रेम से, सींचे निज संसार । साथी से मिलता नहीं, इक कतरा भी प्यार । कुछ को बिछड़े प्रेम का, गहराया उन्माद । जीवन आगे बढ़ रहा, ठहरे यादों साथ। साथी में ढूँढ़े सदा, अपना वाला प्यार। गुण उसके दिखते नहीं, करते व्यर्थ प्रहार । अनदेखा कर आज को, बीती का कर ध्यान । सुख समृद्धि विहीन ये, जीवन नरक समान । निष्कर्ष रिश्तों में प्रेम और अपनापन बना रहे तो छोटी-छोटी बातें भी जीवन में मिठास घोल देती हैं। मेरी यही कामना है कि हर दांपत्य जीवन में आपसी समझ, विश्वास और प्रेम बना रहे। ✨धन्यवाद🙏 जीवन के विभिन्न अनुभवों और व्यवहार पर आधारित मेरे क...