गुरुवार, 17 दिसंबर 2020

दर्द होंठों में दबाकर....

old man feet ;full of dust ;

उम्र भर संघर्ष करके

रोटियाँ अब कुछ कमाई

झोपड़ी मे खाट ताने

नींद नैनों जब समायी

नींद उचटी स्वप्न भय से

क्षीण काया जब बिलखती

दर्द होठों में दबाकर

भींच मुट्ठी रूह तड़पती...


शिथिल देह सूखा गला जब

घूँट जल को है तरसता

हस्त कंपित जब उठा वो

सामने मटका भी हँसता

ब्याधियाँ तन बैठकर फिर

आज बिस्तर हैं पकड़ती

दर्द होंठों में दबाकर

भींच मुट्ठी रुह तड़पती


ये मिला संघर्ष करके

मौत ताने मारती है

असह्य सी इस पीर से

अब जिन्दगी भी हारती है

खत्म होती देख लिप्सा

रोटियाँ भी हैं सुबकती

दर्द होंठों में दबाकर

भींच मुट्ठी रुह तड़पती



                          चित्र साभार गूगल से....








40 टिप्‍पणियां:

मन की वीणा ने कहा…

यथार्थ !
बहुत सुंदर नव गीत सुना जी अभिनव व्यंजनाएं।
आपने दृश्य उत्पन्न कर दिया है।

Meena Bhardwaj ने कहा…

सादर नमस्कार,
आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 18-12-2020) को "बेटियाँ -पवन-ऋचाएँ हैं" (चर्चा अंक- 3919) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।
धन्यवाद.

"मीना भारद्वाज"


Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार १८ दिसंबर २०२० के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

शैलेन्द्र थपलियाल ने कहा…

शिथिल देह सूखा गला जब

घूँट जल को है तरसता

हस्त कंपित जब उठा वो

दूर मटका उसपे हँसता

ब्याधियाँ तन बैठकर फिर

आज बिस्तर हैं पकड़ती
बहुत सुंदर यथार्थ चित्रण करती पंक्तियाँ। वाह क्या खूब।

शुभा ने कहा…

वाह!सुधा जी ,बेहतरीन ।

Sudha Devrani ने कहा…

दिल से धन्यवाद कुसुम जी!उत्साहवर्धन हेतु....
सस्नेह आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद मीना जी!मुझे चर्चा मंच में शामिल करने हेतु...।

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद श्वेता जी! मेरी रचना साझा करने हेतु।

Sudha Devrani ने कहा…

सस्नेह आभार भाई!

Sudha Devrani ने कहा…

बहुत बहुत धन्यवाद शुभा जी!
सस्नेह आभार।

अनीता सैनी ने कहा…

मन को छूता बहुत ही हृदयस्पर्शी सृजन दी।
सादर

Onkar ने कहा…

बहुत बढ़िया

Nitish Tiwary ने कहा…

भावपूर्ण रचना।

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

वृद्धावस्था का भयावह, निराशापूर्ण किन्तु सच्चा चित्रण !

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर नवगीत

Sudha Devrani ने कहा…

सहृदय धन्यवाद प्रिय अनीता जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद आ.ओंकार जी!

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार आपका तिवारी जी!

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद आ.सर!

Sudha Devrani ने कहा…

सहृदय धन्यवाद सखी!

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

आलोक सिन्हा ने कहा…

बहुत बहुत सराहनीय रचना ।

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति.

Shantanu Sanyal शांतनु सान्याल ने कहा…

मर्मस्पर्शी व भावपूर्ण रचना - - साधुवाद।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आदरणीय।

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.आलोक जी!

Sudha Devrani ने कहा…

सहृदय धन्यवाद आ.जेन्नी शबनम जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद सर!
सादर आभार।

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा…

मर्मस्पर्शी कविता

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार सर!

Jyoti Dehliwal ने कहा…

दिल को छूती सुंदर रचना, सुधा दी।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद ज्योति जी!

जितेन्द्र माथुर ने कहा…

अत्यंत मर्मस्पर्शी कविता सिरजी है आपने सुधा जी ।

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार आपका सर!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

उम्र जीवन को किस अवस्वथा में ले आता है जहाँ कई बार मन विचलित हो जाता है ....
व्यथा का सरीक छत्रं करते भाव और शब्द ...

Amrita Tanmay ने कहा…

इस दारुण दृश्य में सच में रुह काँप रही है ... बस आह !

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.नासवा जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.अमृता जी!

संजय भास्‍कर ने कहा…

वाह कितनी सरलता से कितने गूढ़ भावों को लिखा है आपने
बधाई !

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद संजय जी!

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