रविवार, 13 नवंबर 2022

गई शरद आया हेमंत


Winter morning

गई शरद आया हेमंत ,

हुआ गुलाबी दिग दिगंत ।

अलसाई सी लोहित भोर,

नीरवता पसरी चहुँ ओर ।


व्योम उतरता कोहरा बन,

धरा संग जैसे आलिंगन ।

तुहिन कण मोती से बिखरे,

पल्लव पुष्प धुले निखरे ।


उजली छिटकी गुनगुनी धूप,

प्रकृति रचती नित नवल रूप ।

हरियाये सुन्दर सब्ज बाग,

पालक बथुआ सरसों के साग ।


कार्तिक,अगहन व पूस मास,

पंछी असंख्य उतरे प्रवास ।

 हुलसित सुरभित यह ऋतु हेमंत

आगत शिशिर, स्वागत वसंत ।।


26 टिप्‍पणियां:

अनीता सैनी ने कहा…

जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (१४-११-२०२२ ) को 'भगीरथ- सी पीर है, अब तो दपेट दो तुम'(चर्चा अंक -४६११) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर

Sudha Devrani ने कहा…

चर्चा मंच के लिए मेरी रचना चयन करने हेतु हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार प्रिय अनीता जी !

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 15 नवम्बर 2022 को साझा की गयी है....
पाँच लिंकों का आनन्द पर
आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Onkar Singh 'Vivek' ने कहा…

बहर!अच्छी सामयिक अभिव्यक्ति

जितेन्द्र माथुर ने कहा…

बहुत सुंदर कविता रची है सुधा जी आपने। एक-एक शब्द में हेमंती गंध रची-बसी है।

Amrita Tanmay ने कहा…

हुलसित हुआ मन अति सुन्दर कृति से। स्वागत है....

Bharti Das ने कहा…

बहुत सुंदर मनहर रचना

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार ओंकार जी !

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.जितेंन्द्र जी

Sudha Devrani ने कहा…

दिल से धन्यवाद एवं आभार अमृता जी !

Sudha Devrani ने कहा…

दिल से धन्यवाद एव आभार भारती जी !

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आ. यशोदा जी मेरी रचना चयन करने हेतु ।

Onkar ने कहा…

बहुत सुंदर

Jigyasa Singh ने कहा…

जीवन जीने की प्रेरणा देती और हेमंत की अगवानी करती सुंदर रचना

मन की वीणा ने कहा…

हेमंत के स्वागत में बहुत सुंदर कोमल भाव लिए प्रकृति के सौंदर्य के साथ सुंदर सृजन।
बहुत सुंदर सृजन।

Sudha Devrani ने कहा…

जी, हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आपका ।

Sudha Devrani ने कहा…

दिल से धन्यवाद एवं आभार सखी !

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार आ. कुसुम जी !

Meena sharma ने कहा…

अप्रतिम शब्द चित्रांकन। हेमंत ऋतु के रंग आँखों के सामने साकार हो उठे सुधाजी।
व्योम उतरता कोहरा बन,
धरा संग जैसे आलिंगन ।
तुहिन कण मोती से बिखरे,
पल्लव पुष्प धुले निखरे ।

Kamini Sinha ने कहा…

हुलसित सुरभित यह ऋतु हेमंत

आगत शिशिर, स्वागत वसंत ।।

प्राकृतिक छटा बिखेरती मनभावन सृजन सुधा जी 🙏

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार मीनाजी !

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार कामिनी जी !

Harihar (विकेश कुमार बडोला) ने कहा…

बहुत ही सुंदर कविता से सुंदरतम प्रकृति का स्वागत। बहुत अच्छा।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक आभार ए्ं धन्यवाद बडोला जी !

Jyoti Dehliwal ने कहा…

शब्दों का बहुत ही सुंदर चित्रांकन किया है सुधा दी आपने।

Meena Bhardwaj ने कहा…

हेमन्त ऋतु की प्राकृतिक छटा सृजन में देखते ही बनती है । अत्यन्त सुन्दर कृति ।

गई शरद आया हेमंत

गई शरद आया हेमंत , हुआ गुलाबी दिग दिगंत । अलसाई सी लोहित भोर, नीरवता पसरी चहुँ ओर । व्योम उतरता कोहरा बन, धरा संग जैसे आलिंगन । तुहिन कण मोत...