परित्यक्ता नहीं..परित्यक्त | पति की बेवफाई और सास ससुर का साथ - हिन्दी कहानी
परिचय क्या एक पत्नी सिर्फ इसलिए सब कुछ सहती रहे क्योंकि उसके पास मायके से विदा लेने बाद जाने के लिए कोई और ठिकाना नहीं है ? क्या प्रेम विवाह करने वाली स्त्री अपने ही रिश्तों में सबसे अधिक अकेली हो जाती है ? यह कहानी है सना की जिसे पति की बेवफाई ने तोड़ने की कोशिश की लेकिन उसके सास ससुर ने उसे परित्यक्ता नहीं बल्कि सम्मानित बेटी बनाकर दुनिया के सामने एक मिसाल कायम कर दी पढ़िए रिश्तों विश्वासघात और स्वाभिमान की हृदयस्पर्शी हिंदी कहानी दिल्ली की हल्की ठंडी सुबह थी। खिड़की से छनकर आती धूप ड्रॉइंग रूम के फर्श पर सुनहरी चादर बिछा रही थी, लेकिन सना के मन में जैसे धूप का एक कतरा भी नहीं बचा था। पिछले कुछ महीनों से वह प्रतीक के व्यवहार में बदलाव साफ महसूस कर रही थी। देर रात तक मोबाइल पर मुस्कुराकर बातें करना, उसके आते ही स्क्रीन लॉक कर देना, छोटी-छोटी बातों पर झल्ला उठना—सब कुछ बदलता जा रहा था। "प्रतीक! आज बच्चों के स्कूल में पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग है... तुम भी चलोगे?" सना ने धीमे स्वर में पूछा। प्रतीक ने मोबाइल से नजर उठाए बिना कहा— "मुझसे क्यों पूछ रही हो? अपने काम खुद नहीं कर ...

जी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (१४-११-२०२२ ) को 'भगीरथ- सी पीर है, अब तो दपेट दो तुम'(चर्चा अंक -४६११) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
चर्चा मंच के लिए मेरी रचना चयन करने हेतु हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार प्रिय अनीता जी !
हटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 15 नवम्बर 2022 को साझा की गयी है....
जवाब देंहटाएंपाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आ. यशोदा जी मेरी रचना चयन करने हेतु ।
हटाएंबहर!अच्छी सामयिक अभिव्यक्ति
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार ओंकार जी !
हटाएंबहुत सुंदर कविता रची है सुधा जी आपने। एक-एक शब्द में हेमंती गंध रची-बसी है।
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.जितेंन्द्र जी
हटाएंहुलसित हुआ मन अति सुन्दर कृति से। स्वागत है....
जवाब देंहटाएंदिल से धन्यवाद एवं आभार अमृता जी !
हटाएंबहुत सुंदर मनहर रचना
जवाब देंहटाएंदिल से धन्यवाद एव आभार भारती जी !
हटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंजी, हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आपका ।
हटाएंजीवन जीने की प्रेरणा देती और हेमंत की अगवानी करती सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंदिल से धन्यवाद एवं आभार सखी !
हटाएंहेमंत के स्वागत में बहुत सुंदर कोमल भाव लिए प्रकृति के सौंदर्य के साथ सुंदर सृजन।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर सृजन।
हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार आ. कुसुम जी !
हटाएंअप्रतिम शब्द चित्रांकन। हेमंत ऋतु के रंग आँखों के सामने साकार हो उठे सुधाजी।
जवाब देंहटाएंव्योम उतरता कोहरा बन,
धरा संग जैसे आलिंगन ।
तुहिन कण मोती से बिखरे,
पल्लव पुष्प धुले निखरे ।
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार मीनाजी !
हटाएंहुलसित सुरभित यह ऋतु हेमंत
जवाब देंहटाएंआगत शिशिर, स्वागत वसंत ।।
प्राकृतिक छटा बिखेरती मनभावन सृजन सुधा जी 🙏
हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार कामिनी जी !
हटाएंबहुत ही सुंदर कविता से सुंदरतम प्रकृति का स्वागत। बहुत अच्छा।
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार ए्ं धन्यवाद बडोला जी !
जवाब देंहटाएंशब्दों का बहुत ही सुंदर चित्रांकन किया है सुधा दी आपने।
जवाब देंहटाएंहेमन्त ऋतु की प्राकृतिक छटा सृजन में देखते ही बनती है । अत्यन्त सुन्दर कृति ।
जवाब देंहटाएंGreat article. Your blogs are unique and simple that is understood by anyone.
जवाब देंहटाएंअप्रतिम सृजन
जवाब देंहटाएंवाह , बहुत ही मनोरम चित्रण . शब्द संयोजन उत्कृष्ट .बहुत खूब सुधा जी
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर रचना , हेमंत ऋतु के स्वागत में
जवाब देंहटाएंअभिनन्दन आदरणीया !
जय श्री कृष्ण !