गुरुवार, 29 सितंबर 2022

विश्वविदित हो भाषा

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 मनहरण घनाक्षरी

(घनाक्षरी छन्द पर मेरा एक प्रयास)


 हिंदी अपनी शान है

भारत का सम्मान है

प्रगति की बाट अब

इसको दिखाइये


मान दें हिन्दी को खास

करें हिंदी का विकास

सभी कार्य में इसे ही

अग्रणी बनाइये


संस्कृत की बेटी हिंदी

सोहती ज्यों भाल बिंदी

मातृभाषा से ही निज

साहित्य सजाइये


हिंदी के विविध रंग

रस अलंकार छन्द

इसकी विशेषताएं

सबको बताइये


समानार्थी मुहावरे

शब्द-शब्द मनहरे

तत्सम,तत्भव सभी

उर में बसाइये


संस्कृति की परिभाषा

उन्नति की यही आशा

राष्ट्रभाषा बने हिन्दी

मुहिम चलाइये


डिजिटल युग आज

अंतर्जाल पे हैं काज

हिंदी का भी सुगम सा

पोर्टल बनाइए


विश्वविदित हो भाषा

सबकी ये अभिलाषा

जयकारे हिन्दी के

जग में फैलाइए ।



22 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अपनी राजभाषा
हम करें ये आशा
कि अब तो इसे
राष्ट्रभाषा बनाइये ।

अच्छी प्रस्तुति ।

विश्वमोहन ने कहा…

वाह! बहुत सुंदर।

Kamini Sinha ने कहा…

विश्वविदित हो भाषा

सबकी ये अभिलाषा

जयकारे हिन्दी के

जग में फैलाइए ।

यही हमारी भी कामना है। बहुत सुंदर सृजन,सादर नमस्कार सुधा जी 🙏

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

अनीता सैनी ने कहा…


जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार(३०-०९ -२०२२ ) को 'साथ तुम मझधार में मत छोड़ देना' (चर्चा-अंक -४५६८) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

हिंदी को विश्वविदित भाषा बनाने के लिए जिस अनथक प्रयास, लगन, समर्पण, निष्ठा और प्रतिबद्धता की आवश्यकता है, वह हम हिंदी-प्रेमियों में नहीं है.
गंगावतरण तो भागीरथ प्रयास से ही संभव हो पाया था और हिंदी के विश्वव्यापी प्रचार-प्रसार के लिए भी हम सबको भागीरथ प्रयास ही करना होगा.

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आ.संगीता जी !आपकी अनमोल प्रतिक्रिया पाकर सृजन सार्थक हुआ ।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.विश्वमोहन जी !

Sudha Devrani ने कहा…

जी, कामिनी जी ! दिल से धन्यवाद एवं आभार 🙏🙏

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.जोशी जी !

Sudha Devrani ने कहा…

मेरी रचना को चर्चा मंच पर साझा करने हेतु दिल से धन्यवाद एवं आभार प्रिय अनीता जी !

Sudha Devrani ने कहा…

जी, आदरणीय सर ! एकदम सही कहा आपने।
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आपका ।🙏🙏

Jigyasa Singh ने कहा…

संस्कृति की परिभाषा

उन्नति की यही आशा

राष्ट्रभाषा बने हिन्दी

मुहिम चलाइये..
हिंदी को समृद्ध करती बहुत ही प्रेरक सार्थक रचना ।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार सखी !

Jyoti Dehliwal ने कहा…

सुधा दी, हिंदी का महत्व जानकर ही आजकल गूगल भी हिंदी को महत्व दे रहा है। जब हम अंग्रेजी की गुलामी की मानसिकता आए उबर पाएंगे तब धीरे धीरे ही सही हिंदी का महत्व समझने लगेगा। सुंदर प्रस्तुति।

MANOJ KAYAL ने कहा…

सार्थक एवं ज्ञानबर्धक लेखन

कैलाश मण्डलोई ने कहा…

हिंदी भाषा की आर्थिक अभिलाषा

Sudha Devrani ने कहा…

जी ज्योति जी, सही कहा आपने...
अत्यंत आभार एवं धन्यवाद।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.कैलाश जी !

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार मनोज जी !

Meena Bhardwaj ने कहा…

बहुत सुन्दर कामना समाहित किये हिन्दी भाषा को समर्पित बहुत सुन्दर कृति सुधा जी !

Sudha Devrani ने कहा…

दिल से धन्यवाद एवं आभार मीनाजी !

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