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शारदीय नवरात्र का ,आया पावन पर्व (दोहे)

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  1. शारदीय नवरात्र का, आया पावन पर्व ।        नवदुर्गा नौरूप की, गाते महिमा सर्व ।। 2. नौ दिन के नवरात्र का , करते जो उपवास ।        नवदुर्गा माता सदा , पूरण करती आस ।। 3. जगराते में हैं सजे, माता के दरबार ।      गूँज रही दरबार में, माँ की जय जयकार ।। 4. माता के नवरूप का, पूजन करते लोग ।      सप्तसती के पाठ से, बनें सुखद संयोग ।। 5. संकटहरणी माँ सदा, करती संकट दूर ।      घर घर खुशहाली रहे, धन दौलत भरपूर ।। 6. शारदीय नवरात्र की, महिमा अपरम्पार ।    विधिवत पूजन कर सदा, मिलती खुशी अपार ।। हार्दिक अभिनंदन आपका🙏 पढ़िए एक और रचना कुण्डलिया छंद में ●  व्रती रह पूजन करते

श्राद्ध में करें तर्पण (मनहरण घनाक्षरी)

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  श्राद्ध में करें तर्पण, श्रद्धा मन से अर्पण, पितरों को याद कर, पूजन कराइये । ब्राह्मण करायें भोज, उन्नति मिलेगी रोज, दान, दक्षिणा, सम्मान, शीष भी नवाइये । पिण्डदान का विधान, पितृदेव हैं महान, बैतरणी करें पार  गयाजी तो जाइये । तर्पण से होगी मुक्ति, श्राद्ध है पावन युक्ति, पितृलोक से उद्धार, स्वर्ग पहुँचाइये । पितृदेव हैं महान, श्राद्ध में हो पिण्डदान, जवा, तिल, कुश जल, अर्पण कराइये । श्राद्ध में जिमावे काग, श्रद्धा मन अनुराग, निभा सनातन रीत, पितर मनाइये । पितर आशीष मिले वंश खूब फूले फले , सुख समृद्धि संग, खुशियाँ भी पाइये । सेवा करें बृद्ध जन, बात सुने पूर्ण मन, विधि का विधान जान, रीतियाँ निभाइये । हार्दिक अभिनंदन🙏 पढ़िए एक और मनहरण घनाक्षरी छंद ●  प्रभु फिर आइए

शिक्षक दिवस पर दोहे | गुरु महिमा और शिक्षक सम्मान पर भावपूर्ण दोहे

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परिचय शिक्षक हमारे जीवन को सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक होते हैं। उनके ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन से विद्यार्थी न केवल शिक्षा प्राप्त करता है, बल्कि जीवन के मूल्यों को भी समझता है। शिक्षक दिवस पर प्रस्तुत ये दोहे गुरु के प्रति सम्मान, ज्ञान की महिमा और बदलते डिजिटल युग में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित करते हैं। शिक्षक दिवस पर गुरु महिमा के दोहे    💐शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 💐 शिक्षक शिक्षा दे रहे, गुरु देते हैं ज्ञान । शिक्षा के उत्थान से, ज्ञानी बने महान ।। शिक्षक पुंज प्रकाश के, गुरु दिखलाते राह । विश्वजीत बनते वही, अंतर मिलती थाह ।। सद्गुरु का ले आसरा , पायें अंतर ज्ञान । अनुशासित जीवन जिएं, मिले तभी सम्मान ।। शिक्षक भी संज्ञान लें, डिजिटल युग है आज । पोथी अब लिखते नहीं ,कम्प्यूटर पर काज ।। शिक्षक भी संज्ञान लें , बड़े चतुर हैं छात्र । अनुशासित जीवन करें, केवल शिक्षण मात्र ।। निष्कर्ष शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन की राह दिखाने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। शिक्षक दिवस हमें उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। आशा है...

सैनिक, संत, किसान | देश और समाज को समर्पित दोहा मुक्तक

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परिचय देश और समाज के निर्माण में सैनिक, संत और किसान तीनों की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा करता है, संत अपने ज्ञान और विचारों से जीवन को दिशा देते हैं और किसान अपने परिश्रम से अन्न उपजाकर सबका पोषण करता है। इन तीनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता के भाव को शब्द देने का मेरा यह प्रयास है। सैनिक रक्षा करते देश की, सैनिक वीर जवान । लड़ते लड़ते देश हित, करते निज बलिदान । ओढ़ तिरंगा ले विदा,  जाते अमर शहीद, नमन शहीदों को करे, सारा हिंदुस्तान ।। संत संत समागम कीजिए, मिटे तमस अज्ञान । राह सुगम होंगी सभी, मिले सत्य का ज्ञान । अमल करे उपदेश जो, होगा जीवन धन्य, मिले परम आनंद तब, खिले मनस उद्यान । किसान खून पसीना एक कर , खेती करे किसान । अन्न प्रदाता है वही, देना उसको मान । सहता मौसम मार वह, झेले कष्ट तमाम, उसके श्रम से पल रहा सारा हिंदुस्तान ।         सैनिक, संत, किसान 1) सीमा पर सैनिक खड़े, खेती करे किसान ।    संत शिरोमणि से सदा,  मिलता सबको ज्ञान।    गर्वित इन पर देश है , परहित जिनका ध्येय,    वंदनीय हैं सर्वदा...

रक्षाबंधन पर रोला छंद | भ्रात की सजी कलाई

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परिचय रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का पावन पर्व है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधकर उसके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती है। प्रस्तुत ‘भ्रात की सजी कलाई’ रोला छंद में रक्षाबंधन के इसी प्रेमपूर्ण और भावनात्मक स्वरूप को शब्दों में अभिव्यक्त किया गया है। सावन पावन मास , बहन है पीहर आई । राखी लाई साथ, भ्रात की सजी कलाई ।। टीका करती भाल, मधुर मिष्ठान खिलाती । देकर शुभ आशीष, बहन अतिशय हर्षाती ।। सावन का त्यौहार, बहन राखी ले आयी । अति पावन यह रीत, नेह से खूब निभाई ।। तिलक लगाकर माथ, मधुर मिष्ठान्न खिलाया । दिया प्रेम उपहार , भ्रात का मन हर्षाया ।। राखी का त्योहार, बहन है राह ताकती । थाल सजाकर आज, मुदित मन द्वार झाँकती ।। आया भाई द्वार, बहन अतिशय हर्षायी ।  बाँधी रेशम डोर, भ्रात की सजी कलाई ।। निष्कर्ष रक्षाबंधन केवल कलाई पर बाँधी गई राखी का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और आत्मीय रिश्ते का उत्सव है। राखी की यह रेशम डोर जीवनभर स्नेह और अपनत्व का संदेश देती रहे—इसी मंगलकामना के साथ मेरी यह रक्षाबंधन पर रोला छंद रचना आपको समर्पित है...

आई है बरसात | वर्षा ऋतु पर रोला छंद)

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परिचय सावन का महीना प्रकृति के सौंदर्य का अनुपम उत्सव लेकर आता है। झमाझम वर्षा, रिमझिम फुहारें, सौंधी मिट्टी की महक, शीतल पुरवाई और मेघों की गर्जना वातावरण को जीवंत बना देती हैं। पेड़-पौधे हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं और नदियाँ-नाले जल से भर उठते हैं। प्रस्तुत रोला छंद में सावन ऋतु की इसी मनमोहक छटा और वर्षा के आनंददायक स्वरूप का सहज एवं भावपूर्ण चित्रण करने का प्रयास किया है। अनुभूति पत्रिका में प्रकाशित  आया सावन मास,  झमाझम बरखा आई। रिमझिम पड़े फुहार, चली शीतल पुरवाई। भीनी सौंधी गंध, सनी माटी से आती। गिरती तुहिन फुहार, सभी के मन को भाती ।। गरजे नभ में मेघ, चमाचम बिजली चमके । झर- झर झरती बूँद, पात मुक्तामणि दमके । आई है बरसात,  घिरे हैं बादल काले । बरस रहे दिन रात, भरें हैं सब नद नाले ।। रिमझिम पड़े फुहार, हवा चलती मतवाली । खिलने लगते फूल, महकती डाली डाली । आई है बरसात, घुमड़कर बादल आते । गिरि कानन में घूम, घूमकर जल बरसाते ।। बारिश की बौछार , सुहानी सबको लगती । रिमझिम पड़े फुहार, उमस से राहत मिलती । बहती मंद बयार , हुई खुश धरती रानी । सजी धजी है आज, पहनकर चूनर धानी ।। निष्...

रिमझिम रिमझिम बरखा आई | सावन और वर्षा ऋतु पर चौपाई छंद

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 परिचय बरसात की रिमझिम फुहारें जब तपती धरती को शीतलता देती हैं, तो प्रकृति हरियाली की सुंदर चादर ओढ़ लेती है। सावन की वर्षा केवल मौसम में बदलाव नहीं लाती, बल्कि मन में उमंग, भक्ति और उल्लास भी भर देती है। खेतों में लहराती फसलें, शिव आराधना, कांवड़ यात्रा, तीज और कजरी के लोकगीत सावन की सांस्कृतिक छटा को और मनोहारी बना देते हैं। इन्हीं प्राकृतिक और सांस्कृतिक भावों को समेटे प्रस्तुत है “रिमझिम रिमझिम बरखा आई” , एक भावपूर्ण चौपाई छंद , जिसमें वर्षा ऋतु, सावन की हरियाली और शिव-भक्ति का सुंदर चित्रण किया गया है।        चौपाई छंद रिमझिम रिमझिम बरखा आई । धरती पर हरियाली छायी ।। आतप से अब राहत पायी । पुलकित हो धरती मुस्काई ।। खेतों में फसलें लहराती । पावस सबके मन को भाती ।। भक्ति भाव में सब नर नारी । पूजें शिव शंकर त्रिपुरारी ।। सावन में शिव वंदन करते । भोले कष्ट सभी के हरते ।। बिल्वपत्र घृत दूध चढ़ाते । दान भक्ति से पुण्य कमाते ।। काँवड़ ले काँवड़िये जाते । गंंगाजल सावन में लाते ।। बम बम भोले का जयकारा । अंतस में करता उजियारा ।। नारी सज धज तीज मनाती । कजरी लोकगीत हैं गात...

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