मंगलमय नववर्ष हो

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  नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं बीत गया पच्चीस अब, बिसरें बीती बात । मंगलमय नववर्ष हो, सुखमय हो दिन रात। शुभता का संदेश ले,  आएगा  छब्बीस । दुर्दिन होंगे दूर अब , सुख की हो बरसात ।। स्वागत आगत का करें , अभिनंदन कर जोर । सबको दे शुभकामना , आये स्वर्णिम भोर । घर आँगन खुशियाँ भरे, विपदा भागे दूर, सुख समृद्धि घर में बसे, खुशहाली चहुँओर ।। हार्दिक शुभकामनाओं के साथ एक और रचना निम्न लिंक पर ●  और एक साल बीत गया

सैनिक, संत, किसान (दोहा मुक्तक)

Sainik, sant, kisan poem


सैनिक

रक्षा करते देश की, सैनिक वीर जवान ।

लड़ते लड़ते देश हित, करते निज बलिदान ।

ओढ़ तिरंगा ले विदा,  जाते अमर शहीद,

नमन शहीदों को करे, सारा हिंदुस्तान ।।


संत

संत समागम कीजिए, मिटे तमस अज्ञान ।

राह सुगम होंगी सभी, मिले सत्य का ज्ञान ।

अमल करे उपदेश जो, होगा जीवन धन्य,

मिले परम आनंद तब, खिले मनस उद्यान ।


किसान

खून पसीना एक कर , खेती करे किसान

अन्न प्रदाता है वही, देना उसको मान ।

सहता मौसम मार वह, झेले कष्ट तमाम,

उसके श्रम से पल रहा सारा हिंदुस्तान ।




        सैनिक, संत, किसान

1) सीमा पर सैनिक खड़े, खेती करे किसान ।

   संत शिरोमणि से सदा,  मिलता सबको ज्ञान।

   गर्वित इन पर देश है , परहित जिनका ध्येय,

   वंदनीय हैं सर्वदा, सैनिक संत किसान ।।



2) सैनिक संत किसान से,  गर्वित हिंदुस्तान ।

    फर्ज निभाते है सदा,  लिये हाथ में जान ।

    रक्षण पोषण धर्म की,  सेवा पर तैनात,

     करते उन्नति देश की,  सदा बढ़ाते मान ।।



हार्दिक अभिनंदन आपका 🙏

पढ़िए एक और रचना निम्न लिंक पर

● मुक्तक - नसीब


टिप्पणियाँ

  1. वाह !! अति सुन्दर सृजन । विविधता से परिपूर्ण अनूठी अभिव्यक्ति सुधा जी !

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर मंगलवार 26 अगस्त 2025 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हार्दिक धन्यवाद आ.रविंद्र जी !मेरी रचना चयन करने हेतु ।
      सादर आभार ।

      हटाएं
  3. सैनिक, संत और किसान देश और समाज के हित में दिन-रात लगे रहते हैं, सुंदर दोहे!

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत हि सुंदर मुक्तक, सुधा दी।

    जवाब देंहटाएं

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