मुझे बड़ा नहीं होना - दिल छू लेने वाली हिंदी लघुकथा

"मुझे बड़ा नहीं होना"

बचपन की मासूम सोच और भावनाओं पर आधारित दिल छू लेने वाली लघुकथा -


दादा और पोते के बीच भावुक हिंदी कहानी





"दादू ! अब से न मैं आपको प्रणाम नहीं करूंगा ?"
हाथ से हाथ बाँधते हुए दादू के बराबर बैठकर मुँह बनाते हुए विक्की बोला।

"अच्छा जी ! तो हाय हैलो करोगे या गुड मॉर्निंग, गुड नाइट "।

दादू मुस्कुराते हुए बोले,

"सब चलेगा छोटे साहब! आखिर हम मॉडर्न विक्की के सुपर मॉडर्न दादू जो हैं । और हम तुम्हें हर हाल में वही आशीर्वाद देंगे जो हमेशा देते हैं-- खुश रहो और जल्दी से बड़े हो जाओ ।" 

"ओह्ह!  दादू, फिर से वही ? 

विक्की चिढ़कर बोला और अपने नन्हें हाथों से सोफे पर हल्का मुक्का मार दिया ।

"प्लीज दादू अपना आशीर्वाद बदल दीजिए -- खासकर दूसरा वाला ! !"

दादू ठठाकर हँसते हुए बोले, “अरे! बड़ा नहीं होना क्या ?”

विक्की का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।

वह दादू के सामने आकर खड़ा हो गया और उनकी आँखों में देखते हुए बोला—

"नहीं दादू ! सच्ची में बड़ा नहीं होना । आप इसकी जगह कोई और आशीर्वाद दीजिए न , कोई भी" । 

 दादू ने हैरानी से पूछा,

"पर क्यों ? छोटे साहब ?" 

विक्की धीमी आवाज़ में बोला ,

"दादू...अगर मैं बड़ा हो गया तो मम्मी-पापा भी बूढ़े जायेंगे...आपकी तरह । मुझे बहुत डर लगता है ये सोच कर । इसीलिए दादू... मुझे बड़ा होने का आशीर्वाद मत दीजिए..प्लीज़ ! नहीं होना मुझे बड़ा ।"

विक्की की मासूम बात सुनकर दादू निःशब्द रह गए। उनकी आँखों में हल्की नमी तैर गई, और होंठों पर एक गहरी मुस्कान ठहर गई।

कहानी का संदेश-

बच्चों का दिल बहुत साफ होता है। वे रिश्तों को खोने से डरते हैं। उनकी मासूम सोच हमें सिखाती है कि अपनों के साथ बिताया हर पल कितना अनमोल होता है , हमें अपनों का ख्याल रखना चाहिए ।




सादर आभार 🙏🙏

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टिप्पणियाँ

  1. वाह ..... बच्चे भी न जाने क्या क्या सोच सकते हैं। मन को छू गयी ये लघुकथा ।

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    1. तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आ.संगीता जी! आपकी सराहनीय प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ।

      हटाएं
  2. हार्दिक धन्यवाद एवं आभार पम्मी जी! मेरी रचना पाँच लिंको का आनंद मंच पर चयन करने हेतु।

    जवाब देंहटाएं
  3. बदलते समाज और बदलती सोच को दर्शाती लघुकथा । बच्चे बहुत स्मार्ट हो गए हैं । उनकी सकारात्मक सोच समाज में,परिवार में एक स्वस्थ वातावरण का विकास करती है ।
    सुंदर प्रेरक लघुकथा ।

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    1. हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार जिज्ञासा जी!

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  4. ऐसी संवेदनशील बातें निर्दोष बालक ही सोच सकते हैं क्योंकि वे मन के सच्चे होते हैं। राजेश रेड्डी साहब की एक ग़ज़ल का एक शेर है:

    मेरे दिल के किसी कोने में एक मासूम-सा बच्चा
    बड़ों की देखकर दुनिया बड़ा होने से डरता है

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.जितेन्द्र जी! अनमोल सराहनीय प्रतिक्रिया हेतु।आ.रेड्डी साहब की खूबसूरत गजल साझा कर आपने मेरे सृजन को सार्थक कर दिया....दिल से शुक्रिया।

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  5. बच्चों में निश्छल प्रेम होता है ...
    भावुक करते भाव ... सोचने की बात ...

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  6. विक्की की बातों से मैं भी सहमत हूं, मुझे भी बहुत डर लगता है बुढ़ापे से, बच्चे कहते हैं कि- हमें आप सभी के उम्र तक नहीं पहुंचना, बहुत ही सुन्दर लघुकथा सुधा जी, 🙏

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    1. सही कहा कामिनी जी!तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार।

      हटाएं
  7. सचमुच निःशब्द कर दिया बच्चे की बात ने ! याद आ गया कि अपने दादाजी की मृत्यु देखने के बाद मेरा बेटा बचपन में कई बार मुझसे लिपटकर कहता था, "मम्मी, आप कभी मरना मत !"

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जी, मीना जी बच्चे डर जाते हैं ऐसी घटनाओं से...
      तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका।

      हटाएं
  8. अपनों से दूर होना या निःशक्त होना बच्चों को बहुत सालता है ।बहुत सुन्दर और हृदयस्पर्शी लघुकथा ।

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