मंगलवार, 8 फ़रवरी 2022

मुझे बड़ा नहीं होना



A child and his grandfather
चित्र साभार shutterstock  से...


"दादू ! अब से न मैं आपको प्रणाम नहीं करूंगा"।हाथ से हाथ बाँधते हुए दादू के बराबर बैठकर मुँह बनाते हुए विक्की बोला।

"अच्छा जी ! तो हाय हैलो करोगे या गुड मॉर्निंग, गुड नाइट वगैरह वगैरह ? सब चलेगा छोटे साहब! आखिर हम मॉडर्न विक्की के सुपर मॉडर्न दादू जो हैं । और हम तुम्हें हर हाल में वही आशीर्वाद देंगे जो हमेशा देते हैं....खुश रहो और जल्दी से बड़े हो जाओ" !

"ओह्ह! शिट् ! दादू! फिर से ? (चिढ़कर अपने नन्हें हाथों से सोफे पर मुक्का मारते हुए) प्लीज दादू चेंज कीजिए न अपना आशीर्वाद! स्पैशिली सैकिंड वाला "!

"क्या ?  सैकिंड वाला आशीर्वाद !  चेंज करूँ ?  क्यों? बड़ा नहीं होना क्या" ? दादू ठठाकर हँस दिये।

"नो दादू ! सच्ची में बड़ा नहीं होना । आप इसकी जगह कोई और आशीर्वाद दीजिए न , कोई भी" । 

विक्की की बात सुनकर दादू ने आश्चर्यचकित होकर पूछा।

"पर क्यों ? कारण बतायेंगे हमारे छोटे साहब" ?

"दादू! मैं बड़ा हुआ तो मम्मी-पापा बूढ़े जायेंगे न,  आपकी तरह। सोचके डर लगता है मुझे ! इसीलिए दादू!  मुझे बड़ा होने का आशीर्वाद मत दीजिए प्लीज़! नहीं होना मुझे बड़ा"। 

दादा जी के सामने खड़े होकर आँखों में आँखें डाल समझाते हुए विक्की ने बड़ी गम्भीरता से कहा तो दादा जी भी निःशब्द हो गये ।



26 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

वाह ..... बच्चे भी न जाने क्या क्या सोच सकते हैं। मन को छू गयी ये लघुकथा ।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आ.संगीता जी! आपकी सराहनीय प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ।

Pammi singh'tripti' ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 9 फरवरी 2022 को लिंक की जाएगी ....

http://halchalwith5links.blogspot.in
पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
!

अथ स्वागतम् शुभ स्वागतम्

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार पम्मी जी! मेरी रचना पाँच लिंको का आनंद मंच पर चयन करने हेतु।

Jigyasa Singh ने कहा…

बदलते समाज और बदलती सोच को दर्शाती लघुकथा । बच्चे बहुत स्मार्ट हो गए हैं । उनकी सकारात्मक सोच समाज में,परिवार में एक स्वस्थ वातावरण का विकास करती है ।
सुंदर प्रेरक लघुकथा ।

आलोक सिन्हा ने कहा…

बहुत सुन्दर और रोचक भी ।

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर लघुकथा।

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार जिज्ञासा जी!

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद आ.आलोक जी!

Sudha Devrani ने कहा…

सहृदय धन्यवाद एवं आभार सखी!

जितेन्द्र माथुर ने कहा…

ऐसी संवेदनशील बातें निर्दोष बालक ही सोच सकते हैं क्योंकि वे मन के सच्चे होते हैं। राजेश रेड्डी साहब की एक ग़ज़ल का एक शेर है:

मेरे दिल के किसी कोने में एक मासूम-सा बच्चा
बड़ों की देखकर दुनिया बड़ा होने से डरता है

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.जितेन्द्र जी! अनमोल सराहनीय प्रतिक्रिया हेतु।आ.रेड्डी साहब की खूबसूरत गजल साझा कर आपने मेरे सृजन को सार्थक कर दिया....दिल से शुक्रिया।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बच्चों में निश्छल प्रेम होता है ...
भावुक करते भाव ... सोचने की बात ...

Unknown ने कहा…

सुंदर

Harash Mahajan ने कहा…

बहुत ही सुंदर लघु कथा ।

Kamini Sinha ने कहा…

विक्की की बातों से मैं भी सहमत हूं, मुझे भी बहुत डर लगता है बुढ़ापे से, बच्चे कहते हैं कि- हमें आप सभी के उम्र तक नहीं पहुंचना, बहुत ही सुन्दर लघुकथा सुधा जी, 🙏

MANOJ KAYAL ने कहा…

सुन्दर लघु कथा

Sudha Devrani ने कहा…

जी, अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आपका।

Sudha Devrani ने कहा…

बहुत बहुत धन्यवाद आपका।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.हर्ष जी!

Sudha Devrani ने कहा…

सही कहा कामिनी जी!तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार मनोज जी!

Meena sharma ने कहा…

सचमुच निःशब्द कर दिया बच्चे की बात ने ! याद आ गया कि अपने दादाजी की मृत्यु देखने के बाद मेरा बेटा बचपन में कई बार मुझसे लिपटकर कहता था, "मम्मी, आप कभी मरना मत !"

Sudha Devrani ने कहा…

जी, मीना जी बच्चे डर जाते हैं ऐसी घटनाओं से...
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका।

Meena Bhardwaj ने कहा…

अपनों से दूर होना या निःशक्त होना बच्चों को बहुत सालता है ।बहुत सुन्दर और हृदयस्पर्शी लघुकथा ।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार मीना जी!

गई शरद आया हेमंत

गई शरद आया हेमंत , हुआ गुलाबी दिग दिगंत । अलसाई सी लोहित भोर, नीरवता पसरी चहुँ ओर । व्योम उतरता कोहरा बन, धरा संग जैसे आलिंगन । तुहिन कण मोत...