बवाल मच गया — नारी स्वतंत्रता पर व्यंग्य कविता
परिचय
समाज में स्त्री और पुरुष के लिए बनाए गए मापदंड अक्सर एक जैसे नहीं होते। पुरुष के व्यवहार को सहजता से स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन वही स्वतंत्रता जब स्त्री अपने लिए चुनती है तो सवाल उठने लगते हैं।
‘बवाल मच गया’ इसी दोहरे दृष्टिकोण पर तीखा व्यंग्य करती कविता है। रचना के माध्यम से स्त्री की स्वतंत्र अभिव्यक्ति, उसकी अपनी पसंद और उसके अस्तित्व को लेकर समाज की मानसिकता पर सवाल उठाया गया है।
बवाल मच गया
सुन-सुन कान पक गए,
उसके तो उम्र भर...
इक लफ़्ज़ जो कहा तो बवाल मच गया!
झुक-झुक के ताकने की
कोशिश सभी किए थे,
घूरती नज़र के बाणों से
तन बिंधे थे।
ललचाई थीं निगाहें,
नज़रों से चाटते थे...
घूँघट स्वयं उठाया तो बवाल मच गया!
अपने ही इशारों पर नचाते
रहे सदियों से,
कठपुतली-सी उसे यूँ ही घुमाते
रहे अँगुलियों पर।
साधन विलास का उसे
समझा सदा तूने,
जब पाँव स्वयं थिरके तो बवाल मच गया!
सदा नाचते-गाते, घोड़ी पर चढ़े दूल्हे
अपने ही ब्याह में,
मनमौज में थे तुम तो,
वो फूँकती थी चूल्हे।
इस बार नाच ली दुल्हन
तो बवाल मच गया ।
निष्कर्ष
स्त्री की स्वतंत्रता को स्वीकार करना केवल उसके अधिकारों को मानना नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व और उसकी पसंद का सम्मान करना भी है। जब एक ही व्यवहार पुरुष के लिए सामान्य और स्त्री के लिए आपत्तिजनक माना जाए, तो सवाल केवल स्त्री पर नहीं, बल्कि उस सोच पर उठना चाहिए जो ऐसे दोहरे मापदंड बनाती है।
‘बवाल मच गया’ इसी विरोधाभास को व्यंग्य के माध्यम से सामने रखती है।
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 14 दिसम्बर 2022 को साझा की गयी है...
जवाब देंहटाएंपाँच लिंकों का आनन्द परआप भी आइएगा....धन्यवाद!
अत्यंत आभार एवं धन्यवाद सखी !
हटाएंसटीक !दोहरी मानसिकता पर प्रहार करती रचना।
जवाब देंहटाएंदिल से धन्यवाद एवं आभार कुसुम जी ! आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।
हटाएंसच है नारी का मौन बन्ध्या रूप सभी को प्रिय है।वह तभी तक संस्कारी मानी जाती है जब तक वह अपनी पीड़ा को भीतर ही भीतर पीती रहती हैं, जैसे ही उसने होंठ खोले बवाल नहीं भूकम्प और सुनामी सारे आ जाते हैं। एक बेबाक रचना के लिये बधाई प्रिय सुधा जी ❤
जवाब देंहटाएंरचना का सार स्पष्ट करती आपकी अनमोल प्रतिक्रिया हेतु दिल से धन्यवाद एवं आभार रेणु जी !
हटाएंक्या बात है दोहरी मानसिकता पर प्रहार करेंगी तो बवाल तो मचेगा ही न☺️
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