मुहावरों पर आधारित दोहे
परिचय
जीवन में छोटी-छोटी बातें कब बड़ा रूप ले लेती हैं, पता ही नहीं चलता। कभी हम बीती बातों को कुरेदते हैं, कभी भाग्य को दोष देते हैं और कभी अपनों के विश्वासघात से आहत होते हैं। इन्हीं जीवन-अनुभवों और आसपास की परिस्थितियों को मैंने कुछ प्रचलित मुहावरों के सहारे दोहों में पिरोने का प्रयास किया है।
आग बबूला हो रहे, छोटी-छोटी बात ।
तिल का ताड़ बना रहे , बिगड़ रहे हालात ।।
मुर्दे गड़े उखाड़कर, कुछ ना आता हाथ ।
बीती ताहि बिसार दे, तभी बनेगी बात ।।
सोते घोड़े बेचकर , किस्मत देते दोष ।
बैठे रोटी ना मिली, रहे भाग्य को कोस ।।
अंधे की लाठी था जो, उसका ऐसा हाल ।
नौ दो ग्यारह हो गया, लेकर घर का माल ।।
बाल न बाँका कर सके, मिलके शत्रु हजार ।
जिस पर कृपा ईश की, उसका बेड़ा पार ।।
निष्कर्ष
मुहावरों में जीवन का गहरा अनुभव छिपा होता है। मैंने इन्हीं अनुभवों को दोहों में ढालकर अपनी बात कहने का प्रयास किया है। आशा है, ये दोहे आपको भी कुछ सोचने को विवश करेंगे और जीवन की छोटी-बड़ी सीख याद दिलाएँगे।
✨धन्यवाद🙏
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