मैं जो गई बाहर ( हिंदी कविता)

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मैं जो गई बाहर, स्त्री मन की अनुभूति  "यह एक भावनात्मक हिंदी कविता है जिसमें स्त्री के मन, घर से दूर जाने और जीवन में आए सूक्ष्म बदलावों को सुंदर रूप से व्यक्त किया गया है।" चार दिन.. बस चार दिन, मैं जो गई बाहर, कितना कुछ बदल गया ! हाँ, बदल सा गया  मेरा घर ! घर की दीवारें । इन दीवारों में पहले सी ऊष्मा तो ना रही रही तो बस ये निस्तब्धता अनचीन्ही सी  । चार दिन.. बस चार दिन, मैं जो गई बाहर, कितना कुछ बदल गया  । घर का आँगन,  आँगन मे रखे गमले, गमलों में उगे पौधे - रोज पानी मिलने पर भी इनकी पत्तियों में,  फूलों में वो मुस्कान तो ना रही, जो पहले रहती थी । चार दिन .. बस चार दिन,  मैं जो गई बाहर, जैसे सब कुछ बदल गया । हाँ, बदल सा गया  मेरा मन भी । मन के भाव, भावों की ये नदी अब  वैसे शांत तो नहीं बह रही जैसे पहले बहती थी । ये भावों की नदी जाने क्यों जैसे बेचैन सी भाग रही है, किसी अनजान से , सागर की ओर । और भावनाओं की सरगम भी - वैसे तो ना रही, जैसे पहले रहती थी । चार दिन .. बस चार दिन,  मेरे दूर जाते ही.. समय ने जैसे अपना रंग ही बदल लिया । सचमुच.. ...

मंगलमय नववर्ष हो

 नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

Happy new year


बीत गया पच्चीस अब, बिसरें बीती बात ।

मंगलमय नववर्ष हो, सुखमय हो दिन रात।

शुभता का संदेश ले,  आएगा  छब्बीस ।

दुर्दिन होंगे दूर अब , सुख की हो बरसात ।।


स्वागत आगत का करें , अभिनंदन कर जोर ।

सबको दे शुभकामना , आये स्वर्णिम भोर ।

घर आँगन खुशियाँ भरे, विपदा भागे दूर,

सुख समृद्धि घर में बसे, खुशहाली चहुँओर ।।



हार्दिक शुभकामनाओं के साथ एक और रचना निम्न लिंक पर

● और एक साल बीत गया


टिप्पणियाँ

  1. वाह्ह दी अति सुंदर सृजन।
    सस्नेह प्रणाम।
    सादर।
    ------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २ जनवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    नववर्ष २०२६ मंगलमय हो।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हार्दिक धन्यवाद एवं आभार प्रिय श्वेता ! रचना को मंच प्रदान करने हेतु ।

      हटाएं
  2. यह कविता पढ़ते ही मन अपने आप हल्का और सकारात्मक हो जाता है। आप बीते पच्चीस को सहजता से विदा करते हैं और नए वर्ष छब्बीस का खुले दिल से स्वागत करते हैं। मुझे इसकी सबसे अच्छी बात यह लगी कि आप उम्मीद, शुभकामना और विश्वास को बहुत सरल शब्दों में रखते हैं। नए साल की शुबकामनाएं

    जवाब देंहटाएं

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