जल संरक्षण कविता | पानी का करो संचय | मनहरण घनाक्षरी
परिचय जल ही जीवन का आधार है, फिर भी बढ़ती जनसंख्या, जल का अपव्यय, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। ऐसे समय में जल संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हम सभी की जिम्मेदारी है। प्रस्तुत मनहरण घनाक्षरी "पानी का करो संचय" जल बचाने, वर्षा जल संचयन, नदियों की स्वच्छता, वृक्षारोपण और प्रकृति के संतुलन का प्रेरक संदेश देती है। आइए, इस कविता के माध्यम से जल की प्रत्येक बूंद का महत्व समझें और उसे सहेजने का संकल्प लें । पानी का करो संचय मत करो अपव्यय जल से ही जीवन है जल को बचाइये । खेती - बाड़ी घर बार जल ही जीवन सार प्रभु का है वरदान सबको बताइये। बहता है अविरल नदियों में कल-कल नदियों को स्वच्छ कर मधुता बढ़ाइये जल है सभी की जान प्रकृति हितैषी मान बूँद बूँद संचय की मुहिम चलाइये जल तो है अनमोल नल नहीं व्यर्थ खोल इसका महत्व जान व्यर्थ ना बहाइये सुनो जल की जुबानी चुक रहा सब पानी कर लो जतन शीघ्र समय ना गंवाइये अतिवृष्टि अनावृष्टि बिगड़ी समस्त सृष्टि वन से है संतुलन वृक्ष भी लगाइये ग्रीष्म में बढ़ा है ताप जल कुंड बने भाप सूखती धरा है आ...

बहुत सुंदर हाइकु सुधा जी, सुंदर प्राकृतिक बिंबों के साथ।
जवाब देंहटाएंअभिनव सृजन।
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आ.कुसुम जी!
हटाएंसुन्दर सृजन
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार मनोज जी!
हटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.आलोक जी!
जवाब देंहटाएंवाह
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.जोशी जी!
हटाएंसभी हायकु एक से बढ़कर एक हैं। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार विरेन्द्र जी!
हटाएंजी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार(२१-१०-२०२१) को
'गिलहरी का पुल'(चर्चा अंक-४२२४) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
हृदयतल से धन्यवाद प्रिय अनीता जी!
हटाएंमेरी रचना को चर्चा मंच पर स्थान देने हेतु...
सस्नेह आभार।
खूबसूरत सृजन
जवाब देंहटाएंअत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.ओंकार जी!
हटाएंअति उत्तम हाइकू
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.अनीता जी!
हटाएंजमीनी हकीकत बयां करते सुंदर दृश्य प्रस्तुत करते लाजवाब हाइकु ।
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद जिज्ञासा जी!
हटाएंविविधरंगी भावों से सुसज्जित अत्यंत सुंदर हाइकु । लाजवाब सृजन सुधा जी !
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद मीना जी!
हटाएंक्या बात है ! बहुतसुंदर
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.गगन शर्मा जी!
हटाएंसुन्दर हाइकु
जवाब देंहटाएंअत्यंत आभार एवं धन्यवाद ज्योति जी!
हटाएंबहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंअत्यंत आभार प्रिय मनीषा जी!
हटाएंएक से बढ़कर एक हायकु
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार संजय जी!
जवाब देंहटाएंबढ़िया हाइकु प्रिय सुधा जी । चाहकर है हाइकु सीख ना पाई पर थोड़े में कहने की अद्भुत कला है इस छोटे से हाइकु में।
जवाब देंहटाएंहृदयतल से धन्यवाद एवं आभार प्रिय रेणु जी!वाकई हायकु अद्भुत कला है।मैं भी प्रयास ही कर रही हूँ।आप भी शुरू कीजिए धीरे-धीरे सीख जायेंगे।
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