मंगलवार, 19 अक्तूबर 2021

हायकु

    

Bird
चित्र, साभार picabay.com से

  

    [1]

कर स्पर्श से

लाजवन्ती सिकुड़ी ~

गाँव की राह

     

     [2]

मावठ भोर~

फटी बंडी की जेब

टटोले वृद्ध

    

    [3]

मकड़ीजाले~

जीर्ण झुग्गी में बैठे

वृद्ध युगल

      

     [4]

ठूँठ झखाड़~

झरोखे में चिड़िया

तिनका दाबे

 

      [5]

ज्येष्ठ मध्याह्न~

गन्ने लादे नारी के

नंगे कदम

   

      [6]

कुहासा भोर~

मुड़ा खत पकड़े

माँ दूल्हे संग

     

       [7]

भोर कुहासा~

बाला बाँधी फूलों की 

तिरंगी बेणी


     [8]

भोर लालिमा~

कूड़े के ढ़ेर संग

शिशु रूदन

 

     [9]

श्रावण साँझ~

दलदल में फँसा 

हाथी का बच्चा

    

    [10]

मावठ भोर~

लहसुन की क्यारी में

नन्ही चप्पल 


    [11]

फाग पूर्णिमा~

महिला मुख पर

गोबर छींटे


     [12]

गोस्त की गन्ध~

बालिका की गोद में

लेटा मेमना


     


29 टिप्‍पणियां:

मन की वीणा ने कहा…

बहुत सुंदर हाइकु सुधा जी, सुंदर प्राकृतिक बिंबों के साथ।
अभिनव सृजन।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आ.कुसुम जी!

MANOJ KAYAL ने कहा…

सुन्दर सृजन

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.आलोक जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार मनोज जी!

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

Vocal Baba ने कहा…

सभी हायकु एक से बढ़कर एक हैं। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

अनीता सैनी ने कहा…

जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार(२१-१०-२०२१) को
'गिलहरी का पुल'(चर्चा अंक-४२२४)
पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद प्रिय अनीता जी!
मेरी रचना को चर्चा मंच पर स्थान देने हेतु...
सस्नेह आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार विरेन्द्र जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.जोशी जी!

Onkar ने कहा…

खूबसूरत सृजन

anita _sudhir ने कहा…

अति उत्तम हाइकू

जिज्ञासा सिंह ने कहा…

जमीनी हकीकत बयां करते सुंदर दृश्य प्रस्तुत करते लाजवाब हाइकु ।

Meena Bhardwaj ने कहा…

विविधरंगी भावों से सुसज्जित अत्यंत सुंदर हाइकु । लाजवाब सृजन सुधा जी !

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

क्या बात है ! बहुतसुंदर

ज्योति-कलश ने कहा…

सुन्दर हाइकु

Manisha Goswami ने कहा…

बहुत सुन्दर

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.ओंकार जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.अनीता जी!

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद जिज्ञासा जी!

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद मीना जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.गगन शर्मा जी!

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद ज्योति जी!

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार प्रिय मनीषा जी!

संजय भास्‍कर ने कहा…

एक से बढ़कर एक हायकु

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार संजय जी!

रेणु ने कहा…

बढ़िया हाइकु प्रिय सुधा जी । चाहकर है हाइकु सीख ना पाई पर थोड़े में कहने की अद्भुत कला है इस छोटे से हाइकु में।

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार प्रिय रेणु जी!वाकई हायकु अद्भुत कला है।मैं भी प्रयास ही कर रही हूँ।आप भी शुरू कीजिए धीरे-धीरे सीख जायेंगे।

लघुकथा - विडम्बना

 "माँ ! क्या आप पापा की ऐसी हरकत के बाद भी उन्हें उतना ही मानती हो " ?   अपने और माँ के शरीर में जगह-जगह चोट के निशान और सूजन दिखा...