मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा | गढ़वाली गीत

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  ✨ परिचय (Intro) गढ़वाल की वादियों में हर मौसम अपनी अलग कहानी लेकर आता है, लेकिन मोल्यारी मास (बसंत ऋतु) का सौंदर्य कुछ खास होता है। यह गीत उसी बसंती एहसास, पहाड़ की खुशबू, बचपन की यादों और लोकजीवन की सरलता को शब्दों में पिरोता है। कलीं कलीं वनफसा फूलीं, उँण्या कुण्याँ सँतराज खिल्याँ  मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा, डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ  बाट किनार बसींगा फूलीं छन रौली-खौली काली जीरी फूलीं  चल दगड़्यों म्याल खैयोला बण की डाली फलूण झूलीं उड़दि तितली रंग-बिरंगी भोंरा बि छन गुंजण लग्याँ मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा,डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ  ऊँची डाड्यूँ मा सुनेरी उल्यार रोली खोली हर्याली छयीं छुम बजांदि दाथुणि छुमका घास घस्याण घसेरी जयीं खुदेड़ गीतुंक गुणगुणाट आँख्यूँ मा टुपि दे आँसू बह्याँ। मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा, डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ पुराण दिन याद आदिन मैति मैत्युंक लोभ लग्याँ खुद लगदि ज्यु खुदेंदी फूलूँ दगड़ी भाव बग्याँ धरती म्यरि, म्यरु पहाड़्यों स्वरग जणि च भलि लग्याँ मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा, डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ फसल कटि, बिखौंति मनीगे जगा जगा ...

हायकु

    

Bird
चित्र, साभार picabay.com से

  

    [1]

कर स्पर्श से

लाजवन्ती सिकुड़ी ~

गाँव की राह

     

     [2]

मावठ भोर~

फटी बंडी की जेब

टटोले वृद्ध

    

    [3]

मकड़ीजाले~

जीर्ण झुग्गी में बैठे

वृद्ध युगल

      

     [4]

ठूँठ झखाड़~

झरोखे में चिड़िया

तिनका दाबे

 

      [5]

ज्येष्ठ मध्याह्न~

गन्ने लादे नारी के

नंगे कदम

   

      [6]

कुहासा भोर~

मुड़ा खत पकड़े

माँ दूल्हे संग

     

       [7]

भोर कुहासा~

बाला बाँधी फूलों की 

तिरंगी बेणी


     [8]

भोर लालिमा~

कूड़े के ढ़ेर संग

शिशु रूदन

 

     [9]

श्रावण साँझ~

दलदल में फँसा 

हाथी का बच्चा

    

    [10]

मावठ भोर~

लहसुन की क्यारी में

नन्ही चप्पल 


    [11]

फाग पूर्णिमा~

महिला मुख पर

गोबर छींटे


     [12]

गोस्त की गन्ध~

बालिका की गोद में

लेटा मेमना


     


टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुंदर हाइकु सुधा जी, सुंदर प्राकृतिक बिंबों के साथ।
    अभिनव सृजन।

    जवाब देंहटाएं
  2. हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.आलोक जी!

    जवाब देंहटाएं
  3. सभी हायकु एक से बढ़कर एक हैं। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं
  4. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार(२१-१०-२०२१) को
    'गिलहरी का पुल'(चर्चा अंक-४२२४)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हृदयतल से धन्यवाद प्रिय अनीता जी!
      मेरी रचना को चर्चा मंच पर स्थान देने हेतु...
      सस्नेह आभार।

      हटाएं
  5. जमीनी हकीकत बयां करते सुंदर दृश्य प्रस्तुत करते लाजवाब हाइकु ।

    जवाब देंहटाएं
  6. विविधरंगी भावों से सुसज्जित अत्यंत सुंदर हाइकु । लाजवाब सृजन सुधा जी !

    जवाब देंहटाएं
  7. उत्तर
    1. हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.गगन शर्मा जी!

      हटाएं
  8. हार्दिक धन्यवाद एवं आभार संजय जी!

    जवाब देंहटाएं
  9. बढ़िया हाइकु प्रिय सुधा जी । चाहकर है हाइकु सीख ना पाई पर थोड़े में कहने की अद्भुत कला है इस छोटे से हाइकु में।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार प्रिय रेणु जी!वाकई हायकु अद्भुत कला है।मैं भी प्रयास ही कर रही हूँ।आप भी शुरू कीजिए धीरे-धीरे सीख जायेंगे।

      हटाएं

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