परित्यक्ता नहीं..परित्यक्त | पति की बेवफाई और सास ससुर का साथ - हिन्दी कहानी

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परिचय क्या एक पत्नी सिर्फ इसलिए सब कुछ सहती रहे क्योंकि उसके पास मायके से विदा लेने बाद जाने के लिए कोई और ठिकाना नहीं है ? क्या प्रेम विवाह करने वाली स्त्री अपने ही रिश्तों में सबसे अधिक अकेली हो जाती है ? यह कहानी है सना की जिसे पति की बेवफाई ने तोड़ने की कोशिश की लेकिन उसके सास ससुर ने उसे परित्यक्ता नहीं बल्कि सम्मानित बेटी बनाकर दुनिया के सामने एक मिसाल कायम कर दी पढ़िए रिश्तों विश्वासघात और स्वाभिमान की हृदयस्पर्शी हिंदी कहानी दिल्ली की हल्की ठंडी सुबह थी। खिड़की से छनकर आती धूप ड्रॉइंग रूम के फर्श पर सुनहरी चादर बिछा रही थी, लेकिन सना के मन में जैसे धूप का एक कतरा भी नहीं बचा था। पिछले कुछ महीनों से वह प्रतीक के व्यवहार में बदलाव साफ महसूस कर रही थी। देर रात तक मोबाइल पर मुस्कुराकर बातें करना, उसके आते ही स्क्रीन लॉक कर देना, छोटी-छोटी बातों पर झल्ला उठना—सब कुछ बदलता जा रहा था। "प्रतीक! आज बच्चों के स्कूल में पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग है... तुम भी चलोगे?" सना ने धीमे स्वर में पूछा। प्रतीक ने मोबाइल से नजर उठाए बिना कहा— "मुझसे क्यों पूछ रही हो? अपने काम खुद नहीं कर ...

हायकु

    

Bird
चित्र, साभार picabay.com से

  

    [1]

कर स्पर्श से

लाजवन्ती सिकुड़ी ~

गाँव की राह

     

     [2]

मावठ भोर~

फटी बंडी की जेब

टटोले वृद्ध

    

    [3]

मकड़ीजाले~

जीर्ण झुग्गी में बैठे

वृद्ध युगल

      

     [4]

ठूँठ झखाड़~

झरोखे में चिड़िया

तिनका दाबे

 

      [5]

ज्येष्ठ मध्याह्न~

गन्ने लादे नारी के

नंगे कदम

   

      [6]

कुहासा भोर~

मुड़ा खत पकड़े

माँ दूल्हे संग

     

       [7]

भोर कुहासा~

बाला बाँधी फूलों की 

तिरंगी बेणी


     [8]

भोर लालिमा~

कूड़े के ढ़ेर संग

शिशु रूदन

 

     [9]

श्रावण साँझ~

दलदल में फँसा 

हाथी का बच्चा

    

    [10]

मावठ भोर~

लहसुन की क्यारी में

नन्ही चप्पल 


    [11]

फाग पूर्णिमा~

महिला मुख पर

गोबर छींटे


     [12]

गोस्त की गन्ध~

बालिका की गोद में

लेटा मेमना


     


टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुंदर हाइकु सुधा जी, सुंदर प्राकृतिक बिंबों के साथ।
    अभिनव सृजन।

    जवाब देंहटाएं
  2. हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.आलोक जी!

    जवाब देंहटाएं
  3. सभी हायकु एक से बढ़कर एक हैं। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं
  4. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार(२१-१०-२०२१) को
    'गिलहरी का पुल'(चर्चा अंक-४२२४)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हृदयतल से धन्यवाद प्रिय अनीता जी!
      मेरी रचना को चर्चा मंच पर स्थान देने हेतु...
      सस्नेह आभार।

      हटाएं
  5. जमीनी हकीकत बयां करते सुंदर दृश्य प्रस्तुत करते लाजवाब हाइकु ।

    जवाब देंहटाएं
  6. विविधरंगी भावों से सुसज्जित अत्यंत सुंदर हाइकु । लाजवाब सृजन सुधा जी !

    जवाब देंहटाएं
  7. उत्तर
    1. हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.गगन शर्मा जी!

      हटाएं
  8. हार्दिक धन्यवाद एवं आभार संजय जी!

    जवाब देंहटाएं
  9. बढ़िया हाइकु प्रिय सुधा जी । चाहकर है हाइकु सीख ना पाई पर थोड़े में कहने की अद्भुत कला है इस छोटे से हाइकु में।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार प्रिय रेणु जी!वाकई हायकु अद्भुत कला है।मैं भी प्रयास ही कर रही हूँ।आप भी शुरू कीजिए धीरे-धीरे सीख जायेंगे।

      हटाएं

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