धन्य-धन्य कोदंड (कुण्डलिया छंद)
💐विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं💐
पुरुषोत्तम श्रीराम का, धनुष हुआ कोदंड ।
शर निकले जब चाप से, करते रोर प्रचंड ।।
करते रोर प्रचंड, शत्रुदल थर थर काँपे।
सुनकर के टंकार, विकल हो बल को भाँपे ।।
कहे सुधा कर जोरि, कर्म निष्काम नरोत्तम ।
सर्वशक्तिमय राम, मर्यादा पुरुषोत्तम ।।
अति गर्वित कोदंड है, सज काँधे श्रीराम ।
हुआ अलौकिक बाँस भी, करता शत्रु तमाम ।।
करता शत्रु तमाम, साथ प्रभुजी का पाया ।
कर भीषण टंकार, सिंधु का दर्प घटाया ।।
धन्य धन्य कोदंड, धारते जिसे अवधपति ।
धन्य दण्डकारण्य, सदा से हो गर्वित अति ।
सादर अभिनंदन 🙏🙏
पढ़िए प्रभु श्रीराम पर एक और रचना मनहरण घनाक्षरी छंद में
● आज प्राण प्रतिष्ठा का दिन है

बहुत सुंदर भावपूर्ण, लाज़वाब रचनात्मक प्रयोग कुंडलियां दी।
जवाब देंहटाएंशुभ दशहरा
सस्नेह
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार ३ अक्टूबर २०२५ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
सुंदर
जवाब देंहटाएंसुंदर सृजन
जवाब देंहटाएंवाह !! मनमोहक सृजन ।अति सुन्दर कुण्डलियाँ सुधा जी !
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर वर्णन ... धनुष को बाखूबी लिखा आपने ...
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