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"नववर्ष मंगलमय हो"

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                  नववर्ष के शुभ आगमन पर,                   शुभकामनाएं हैं हमारी।                   मंगलमय जीवन हो सबका,                   प्रेममय दुनिया हो सारी।                   हवा सुखमय मधुर महके,                   हरितिमा अपनी धरा हो।                   खुशनुमा  आकाश अपना,                   स्वर्ग सा संसार हो।                   नववर्ष ऐसा मंगलमय हो।                           आशाओं के अबुझ दीपक,                  अब जले हर इक सदन में। ...

"तुम हो हिन्दुस्तानी"

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   प्यारे बच्चों ! दुनिया में तुम नया सवेरा लाना,        जग में नाम कमाना ,कुछ नया-सा कर के दिखाना।          फैली तन्हाई, अब तुम ही इसे मिटाना,             ऐसा कुछ कर जाना..   गर्व करें हर कोई तुम पर "तुम हो हिन्दुस्तानी"।       क्षितिज का तुम भ्रम मिटाना,          ज्ञान की ऐसी ज्योति जगाना।             धरा आसमां एक बनाकर,                सारे भेद मिटाना....                 कुछ ऐसा करके दिखाना,  गर्व  करें हर कोई तुम पर "तुम हो हिन्दुस्तानी"।   अन्धकार मे भी प्रकाश सा उजियारा हो,         सत्य घोष हो हर तरफ जय का नारा हो।           जाति-पाँति का फर्क मिटाकर,              सबको एक बनाना..    गर्व करे हर कोई तुम पर "तुम हो हिन्दुस्तान...

माँ तुम इतना बदली क्यों? | बच्चों के मन से भावपूर्ण हिंदी कविता

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 परिचय   बच्चों के मन में माँ के लिए हमेशा एक खास जगह होती है। बचपन में माँ की ममता, दुलार और चिंता उन्हें बेहद सुखद लगती है, लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, माँ की जिम्मेदारियाँ और उसके प्रति अपेक्षाएँ भी बदलने लगती हैं। “माँ! तुम इतना बदली क्यों?” एक बच्चे के ऐसे ही मासूम सवालों और माँ की बदलती भूमिका को भावपूर्ण ढंग से व्यक्त करती हिंदी कविता है।                                                     माँ ! तुम इतना बदली क्यों ?                मेरी प्यारी माँ बन जाओ                बचपन सा प्यार लुटाओ यों                माँ ! तुम इतना बदली क्यों ?                                                 ...

राजनीति और नेता

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             आज मेरी लेखनी ने  राजनीति की तरफ देखा,  आँखें इसकी चौंधिया गयी  मस्तक पर छायी गहरी रेखा।                                                                                   संसद भवन मे जाकर इसने     नेता देखे बडे-बडे,  कुछ पसरे थे कुर्सी पर ,      कुछ भाषण देते खडे-खडे।                                 कुर्सी का मोह है ,         शब्दों में जोश है,  विपक्ष की टाँग खींचने का       तो इन्हें बडा होश है।                      लकीर के फकीर ये,और        इनके वही पुराने मुद्दे,   ...

प्रकृति की रक्षा ,जीवन की सुरक्षा

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       ो उर्वरक धरती कहाँ रही अब सुन्दर प्रकृति कहाँ रही अब  कहाँ रहे अब हरे -भरे  वन ढूँढ रहा है जिन्हें आज मन                            तोड़ा- फोड़ा इसे मनुष्य ने    स्वार्थ -सिद्ध करने  को      विज्ञान का नाम दे दिया     परमार्थ सिद्ध करने को     सन्तुलन बिगड़ रहा है  अब भी नहीं जो सम्भले   भूकम्प,बाढ,सुनामी तो   कहीं तूफान  चले    बर्फ तो पिघली ही  अब ग्लेशियर भी बह निकले   तपती धरा की लू से   अब सब कुछ जले                       विकास कहीं विनाश न बन जाये विद्युत आग की लपटों में न बदल जाए संभल ले मानव संभाल ले पृथ्वी को आविष्कार तेरे तिरस्कार न बन जायें कुछ कर ऐसा कि सुन्दर प्रकृति शीतल धरती हो हरे-भरे वन औऱ उपवन हों कलरव हो पशु -पक्षियों का वन्य जीवों का संरक्षण हो           ...

'माँ ! तुम सचमुच देवी हो '

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किस मिट्टी की बनी हो माँ? क्या धरती पर ही पली हो माँ !? या देवलोक की देवी हो, करने आई हम पर उपकार। माँ ! तुम्हें नमन है बारम्बार!                                                     सागर सी गहराई तुममें,                     आसमान से ऊँची हो।.                     नारी की सही परिभाषा हो माँ !                     सद्गुणों की पूँजी हो। जीवन बदला, दुनिया बदली, हर परिवर्तन स्वीकार किया। हर हाल में धैर्य औऱ साहस से, निज जीवन का सत्कार किया।।                                                 सारे दुख-सुख दिल में रखकर,           ...

आइना' समाज का | शराब की लत और पत्नी की बेबसी पर मार्मिक संस्मरण

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परिचय सुबह की सैर केवल शरीर को नहीं, मन को भी अनेक अनुभव दे जाती है। उस दिन भी मैं रोज़ की तरह मॉर्निंग वॉक पर निकली थी। रास्ते में जो दृश्य देखा, उसने कदम तो आगे बढ़ा दिए, लेकिन मन बहुत देर तक उसी जगह अटका रहा। यह केवल एक शराबी व्यक्ति की कहानी नहीं थी, बल्कि उस पत्नी की भी थी, जो पति के गुस्से, अपमान और नशे के बावजूद उसे सुरक्षित घर ले आने की कोशिश में लगी रही। शराब केवल व्यक्ति को नहीं, पूरे परिवार को तोड़ती आज मॉर्निंग वॉक करते-करते मैं सामान्य से कुछ अधिक दूर निकल गई। सड़क किनारे बने बस स्टॉप की बेंच पर बैठकर थोड़ा विश्राम कर ही रही थी कि पास से किसी सिक्योरिटी गार्ड की तेज़ आवाज़ सुनाई दी। वह किसी पर गुस्सा कर रहा था। कुछ लोग भी वहाँ इकट्ठा होने लगे।। जिज्ञासावश मैं भी वहाँ पहुँची। देखा, एक व्यक्ति सड़क के बीचों-बीच नशे की हालत में पड़ा हुआ था। सिक्योरिटी गार्ड उसे डाँटते हुए उठाने की कोशिश कर रहा था ताकि कोई दुर्घटना न हो जाए। तभी लगभग अधेड़ उम्र की एक महिला तेज़ी से वहाँ पहुँची। उसने गार्ड के साथ मिलकर उस व्यक्ति को सड़क के किनारे बैठाया और गार्ड का धन्यवाद किया। अब समझ आ...

प्रकृति का संदेश

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हरी - भरी धरती नीले अम्बर की छाँव प्रकृति की शोभा बढाते ये गाँव। सूर्य चमक कर देता खुशहाली का सन्देश, हवा महककर बोली; "मैं तो घूमी हर देश"।। चँदा ने सिखाया देना सबको नया उजाला, तारे कहते ; गीत सुनाओ सबको मस्ती वाला। देना सीखो ये ही तो  है प्रकृति का सन्देश ! हवा महक कर बोली;"मैं तो घूमी सब देश"।। जीवन की जरूरत पूरी करते ये वृक्ष हमारे, बिन इनके तो अधूरे हैं जीवन के सपने सारे। धरती की प्यास बुझाना नदियों का लक्ष्य -विशेष, हवा महक कर बोली; "मै तो घूमी सब देश" ।। देखो ! आसमान ने पूरी, धरती को ढक डाला है, धरती ने भी तो सबको ,माँ जैसा सम्भाला है। अपनेपन  से सब रहना, ये है इनका सन्देश, हवा महक कर बोली; "मैं त़ो घूमी सब देश"।। पढिये प्रकृति पर आधारित मेरी एक और कविता  " प्रकृति की रक्षा, जीवन की सुरक्षा "

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