परित्यक्ता नहीं..परित्यक्त | पति की बेवफाई और सास ससुर का साथ - हिन्दी कहानी
परिचय क्या एक पत्नी सिर्फ इसलिए सब कुछ सहती रहे क्योंकि उसके पास मायके से विदा लेने बाद जाने के लिए कोई और ठिकाना नहीं है ? क्या प्रेम विवाह करने वाली स्त्री अपने ही रिश्तों में सबसे अधिक अकेली हो जाती है ? यह कहानी है सना की जिसे पति की बेवफाई ने तोड़ने की कोशिश की लेकिन उसके सास ससुर ने उसे परित्यक्ता नहीं बल्कि सम्मानित बेटी बनाकर दुनिया के सामने एक मिसाल कायम कर दी पढ़िए रिश्तों विश्वासघात और स्वाभिमान की हृदयस्पर्शी हिंदी कहानी दिल्ली की हल्की ठंडी सुबह थी। खिड़की से छनकर आती धूप ड्रॉइंग रूम के फर्श पर सुनहरी चादर बिछा रही थी, लेकिन सना के मन में जैसे धूप का एक कतरा भी नहीं बचा था। पिछले कुछ महीनों से वह प्रतीक के व्यवहार में बदलाव साफ महसूस कर रही थी। देर रात तक मोबाइल पर मुस्कुराकर बातें करना, उसके आते ही स्क्रीन लॉक कर देना, छोटी-छोटी बातों पर झल्ला उठना—सब कुछ बदलता जा रहा था। "प्रतीक! आज बच्चों के स्कूल में पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग है... तुम भी चलोगे?" सना ने धीमे स्वर में पूछा। प्रतीक ने मोबाइल से नजर उठाए बिना कहा— "मुझसे क्यों पूछ रही हो? अपने काम खुद नहीं कर ...

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 27 जुलाई 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद आ.यशोदा जी!मेरी रचना को मंच प्रदान करने हेतु।
हटाएंसादर आभार।
समय के साथ माँ का व्यवहार बच्चे के जीवन को सही दिशा देने के लिए बदलता रहता है।
जवाब देंहटाएंबच्चे का मासूम प्रश्न।
बहुत सुंदर रचना प्रिय सुधा जी।
सस्नेह।
जी, पर बच्चे कहाँ समझते हैं या सब समझते हुए माँ से छूट लेने के लिए मासूम सवालों में उलझाते हैं...
हटाएंसहृय धन्यवाद एवं आभार आपका।
कुछ बच्चे बहुत भावुक होते हैं। उनके मन में अनगिन प्रश्न तैरते रहते हैं। उन्हें क्या पता------ मां एक काम अनेक। बच्चा जब अबोध होता है तो उसका हर काम मां की जिम्मेवारी होती है पर बड़ा होने पर भी उसके मन कहीं न कहीं ये लालसा बनी रहती है कि मां उसे बच्चा ही समझे। बालक के इन्हीं मासूम भावों में बंधी रचना के लिए बधाई।
जवाब देंहटाएंजी रेणु जी! रचना का भाव स्पष्ट कर सराहनासम्पन्न प्रतिक्रिया द्वारा उत्साहवर्धन हेतु हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार आपका।
हटाएंकविता पढ़ते पढ़ते बालपन में मन प्रवेश कर गया। यही कविता की उपलब्धि है। बधाई!!!
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार आपका।
हटाएंबच्चों के मासूम प्रश्न और माँ की सही ज़िम्मेदारी ...खूबसूरती से शब्दों में बांधा है ।
जवाब देंहटाएंबहुत प्यारी रचना
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपकाउत्साहवर्धन हेतु।
हटाएंउम्र के साथ साथ माँ का बच्चों के प्रति व्यवहार कैसा बदलता है और इससे बच्चे के मन मे कैसे कैसे सवाल आते है इसका बहुत ही सुंदर वर्णन किया है आपने सुधा दी।
जवाब देंहटाएंजी, हार्दिक धन्यवाद एवं आभार ज्योति जी! रचना का मर्म स्पष्ट करने हेतु।
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