परित्यक्ता नहीं..परित्यक्त | पति की बेवफाई और सास ससुर का साथ - हिन्दी कहानी
परिचय क्या एक पत्नी सिर्फ इसलिए सब कुछ सहती रहे क्योंकि उसके पास मायके से विदा लेने बाद जाने के लिए कोई और ठिकाना नहीं है ? क्या प्रेम विवाह करने वाली स्त्री अपने ही रिश्तों में सबसे अधिक अकेली हो जाती है ? यह कहानी है सना की जिसे पति की बेवफाई ने तोड़ने की कोशिश की लेकिन उसके सास ससुर ने उसे परित्यक्ता नहीं बल्कि सम्मानित बेटी बनाकर दुनिया के सामने एक मिसाल कायम कर दी पढ़िए रिश्तों विश्वासघात और स्वाभिमान की हृदयस्पर्शी हिंदी कहानी दिल्ली की हल्की ठंडी सुबह थी। खिड़की से छनकर आती धूप ड्रॉइंग रूम के फर्श पर सुनहरी चादर बिछा रही थी, लेकिन सना के मन में जैसे धूप का एक कतरा भी नहीं बचा था। पिछले कुछ महीनों से वह प्रतीक के व्यवहार में बदलाव साफ महसूस कर रही थी। देर रात तक मोबाइल पर मुस्कुराकर बातें करना, उसके आते ही स्क्रीन लॉक कर देना, छोटी-छोटी बातों पर झल्ला उठना—सब कुछ बदलता जा रहा था। "प्रतीक! आज बच्चों के स्कूल में पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग है... तुम भी चलोगे?" सना ने धीमे स्वर में पूछा। प्रतीक ने मोबाइल से नजर उठाए बिना कहा— "मुझसे क्यों पूछ रही हो? अपने काम खुद नहीं कर ...

सादर नमस्कार ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (23-3-21) को "सीमित है संसार में, पानी का भण्डार" (चर्चा अंक 4014) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
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कामिनी सिन्हा
सादर धन्यवाद एवं आभार कामिनी जी!मेरी रचना को मंच प्रदान करने हेतु।
हटाएंबहुत सुन्दर , बहुत सुन्दर सराहनीय |
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद आ. आलोक जी!
हटाएंमुँह में राम बगल में छुरी दबा के बैठा है।
जवाब देंहटाएंमदद की गुहारें भी हवा में दफन होती हैं यहाँ
वर्तमान के परिक्षेत्र में आपकी रचना सटीक बैठती है
हार्दिक धन्यवाद राजपुरोहित जी!
हटाएंब्लॉग पर आपका स्वागत है।
वाह, सुधा जी बिना बोले आप ने कइयों को आईना दिखाया होगा।और। समझने वाले को समझ भी आया होगा ।। सार्थक रचना के लिए आपको बधाई ।
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद जिज्ञासा जी!
हटाएंसुधा जी, समझने वाले समझ गए हैं, ना समझे वो अनाड़ी है ।
जवाब देंहटाएंकलयुगी व्यास अब वीडियो बनाने बैठा है। वाह। क्या बात है। बहुत खूब। सार्थक सृजन। आपको बधाई।
जवाब देंहटाएंहृदयतल से धन्यवाद विरेन्द्र जी!
हटाएंक्या खूब कहा है ... बहुत बढ़िया ।
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार अमृता जी!
हटाएंमहाभारत हुआ तो अहा ! कितने 'व्यूअर' होंगे !
जवाब देंहटाएंकलयुगी व्यास अब वीडियो बनाने बैठा है।
बहुत सुंदर और सटीक अभिव्यक्ति,सुधा दी।
अत्यंत आभार एवं धन्यवाद ज्योति जी!
हटाएंवाह कलयुगी व्यास वीडियो बनाने बैठा है इसका जवाब नहीं
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार आपका।
हटाएंमहाभारत हुआ तो अहा ! कितने 'व्यूअर' होंगे !
जवाब देंहटाएंकलयुगी व्यास अब वीडियो बनाने बैठा है।
वाह!!बेहतरीन सृजन सखी।
सहृदय धन्यवाद एवं आभार सखी!
हटाएंमहाभारत हुआ तो अहा ! कितने 'व्यूअर' होंगे !
जवाब देंहटाएंकलयुगी व्यास अब वीडियो बनाने बैठा है।
सटीक भावाभिव्यक्ति सुधा जी ।
तहेदिल से धन्यवाद मीना जी!
हटाएंवाह! बहुत ख़ूब 👌
जवाब देंहटाएंसराहनीय ।
सहृदय धन्यवाद एवं आभार प्रिय अनीता जी!
हटाएंबहुत सुन्दर कहा है....
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद, नैनवाल जी!
हटाएंकोरोना के चक्कर में सिनेमा हॉल्स में तो मेगा-बजट वाली महाभारत चल नहीं पाएगी, सिर्फ़ इन्टरनेट का ही आसरा रहेगा.
जवाब देंहटाएंयानी कि घाटे का सौदा !
जी, सही कहा आपने ...
हटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार सर!
तमाशा देखने को हैं कितने आतुर देखो !
जवाब देंहटाएंमुँह में राम बगल में छुरी दबा के बैठा है।
वाह! लाज़वाब!!
हृदयतल से धन्यवाद आ. विश्वमोहन जी!
हटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद मनोज जी!
हटाएंसही कहा आपने।
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार, आ. सर!
हटाएंआज कल दिखावे के ही बोलबाला है । लाइमलाइट में रहने के लिए शायद यही सब ज़रूरी लगता ।
जवाब देंहटाएंसार्थक व्यंग्य ।
जी, अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आपका।
हटाएंव्यंग की तीखी धार नज़र आ रही है हर पंक्ति में ...
जवाब देंहटाएंआज के समय को पैनी नज़र से देखने और लिखने का बाखूबी प्रयास किया है इस व्यंग में आपने ...
बहुत प्रभावशाली रचना ...
हृदयतल से धन्यवाद नासवा जी!
हटाएंवाह, बहुत ख़ूब
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद हिमकर श्याम जी!
हटाएंब्लॉग पर आपका स्वागत है।
कलयुग की महिमा का खूबसूरत वर्णन
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद प्रीति जी!
हटाएंब्लॉग पर आपका स्वागत है।
सटीक महिमा मंडन हमारे कलयुगीन व्यास माहाशयों का। वैदिक साहित्य रचियताओं ने गूढ़ ज्ञान में डुबकी लगाई तो वैदिक संपदा का अर्जन किया था पर इन कुटिल ज्ञानियों की मात्र एक क्लिक पर सब कुछ उपलब्ध है। बहुत बढिया व्यंग लिखा आपने। हार्दिक शुभकामनाएं ❤❤🙏🌹🌹
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद सखी रचना के भाव एवं सार को समझने व स्पष्ट करने हेतु...
हटाएंसस्नेह आभार।
अब मेल से मिल जाती हैं आपकी रचनाएँ प्रिय सुधा जी। हार्दिक स्नेह आपके लिए❤❤🌹🌹🙏
जवाब देंहटाएंआपकी कोशिश कामयाब रही सखी!मैं तो कुछ भी सुधार नहीं कर पायी...।
हटाएंअभी भी कोशिश ही कर रही हूँ।