बच्चों को समझाने का सही तरीका – सासू माँ की सीख देने वाली कहानी

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क्या आपका बच्चा भी जिद करता है? जानिए एक छोटी सी कहानी से बड़ा parenting मंत्र…   बच्चों को डांटने के बजाय प्यार और धैर्य से समझाना क्यों जरूरी है? पढ़िए सासू माँ की सीख देती यह प्रेरणादायक हिंदी कहानी। आरव की जिद और निधि की परेशानी माँजी, आरव बहुत जिद्दी है...।  मैंने उसे कितना समझाया, पर वो माना ही नहीं… और आपने तो पल भर में मना लिया। कैसे माँजी? आप कैसे मना लेती हैं उसे? उसे क्या, आप तो सभी बच्चों को मना लेती हैं… आश्चर्य भरी मुस्कान के साथ निधि अपनी सासू माँ से पूछ ही रही थी कि तभी प्रीति (देवरानी) ने किचन से आवाज लगाई— किचन में छोटी सी सीख “दीदी, ज़रा ये दूध पतीली में डाल दीजिए न…  मुझसे गिर जाता है। पैकेट से डालते वक्त दूध उछल कर बाहर गिर जाता है।” सिखाने का तरीका निधि किचन में गई और दूध पतीली में डालते हुए बोली— “अरे ! ऐसे कैसे गिर जाता है तुमसे दूध? देखो, धीरे-धीरे डालो… पतली धार में। अगर एकदम से ज्यादा दूध डालोगी, वो भी खाली पतीले में, तो उछलेगा ही न।” सासू माँ दूर से सब सुनकर मुस्कुरा रही थीं। थोड़ी देर बाद निधि चाय लेकर आई और सासू माँ को देते हुए फिर बोली— “अब ...

जाने कब खत्म होगा ,ये इंतज़ार......



old broken house in a plateau surrounded with water from all sides

 ये अमावस की अंधेरी रात
तिस पर अनवरत बरसती
       ये मुई बरसात
 टपक रही मेरी झोपड़ी
      की घास-फूस 
      भीगती सिकुड़ती
       मिट्टी की दीवारें 
     जाने कब खत्म होगा
          ये इन्तजार ?
      कब होगी सुबह..?
           और मिटेगा
        ये घना अंधकार !
       थम ही जायेगी किसी पल 
            फिर यह बरसात
      तब चमकेंगी किरणें रवि की 
       खिलखिलाती गुनगुनी सी ।
       सूख भी जायेंगी धीरे-धीरे 
          ये भीगी दीवारें
    गुनगुनायेंगी गीत आशाओं के,
    मिट्टी की सौंधी खुशबू के साथ ।
   झूम उठेगी इसकी घास - फूस की छत
           बहेगी जब मधुर बयार
 फिर भूल कर सारे गम करेंंगे हम 
         यूँ पूनम का इंतज़ार !
      जब घुप्प  रात्रि में भी
         चाँद की चाँदनी में
          साफ नजर आयेगी
  मेरी झोपड़ी,  अपने अस्तित्व के साथ ।

          
                                      
            चित्र - "साभार गूगल से"

टिप्पणियाँ

  1. बरसात में गरीबो की झोपड़ी में टपकते पानी से उन्हें कितनी तकलीफे होती है ये वो ही समझ सकते है। बहुत सुंदर रचना,सुधा दी।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद ज्योति जी!
      सस्नेह आभार।

      हटाएं
  2. उत्तर
    1. हार्दिक धन्यवाद आ.विश्वमोहन जी!
      सादर आभार।

      हटाएं
  3. जब झोपड़ी की छत न चुए तो पूनम है
    सुंदर सृजन

    जवाब देंहटाएं

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