मोबाइल फोन: सुविधा या लत? | मोबाइल के फायदे और नुकसान | हिंदी लेख

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 परिचय आधुनिक युग में विज्ञान का एक अद्भुत और महत्त्वपूर्ण उपहार मोबाइल फोन है। सुबह आँख खुलने से लेकर रात को विश्राम करने तक यह हमारे जीवन का लगभग अभिन्न साथी बन चुका है। जहाँ एक ओर इसने हमारे अनेक कार्यों को सरल बनाया है, वहीं दूसरी ओर इसका अत्यधिक उपयोग कई नई समस्याओं का कारण भी बन रहा है। प्रस्तुत लेख में मोबाइल फोन की उपयोगिता के साथ-साथ इसकी लत से होने वाले दुष्प्रभावों पर चर्चा की गई है।                                आज मोबाइल फोन ने पूरी दुनिया को मानो हमारी मुट्ठी में समेट दिया है। कुछ दशक पहले जिन कार्यों के लिए घंटों या कई दिनों का समय लगता था, वे आज कुछ ही क्षणों में पूरे हो जाते हैं। यह एक ऐसी तकनीकी सुविधा है जिसने मनुष्य के जीवन को पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सरल और सुविधाजनक बना दिया है। किसी से तुरंत संपर्क करना हो, पढ़ाई करनी हो, बैंकिंग का कार्य हो या मनोरंजन—अनेक कार्य अब एक ही मोबाइल फोन से सहजता से पूरे हो जाते हैं। यही कारण है कि आज यह बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर आयु वर...

समय तू पंख लगा के उड़ जा......




माँँ !  मुझे भी हॉस्टल में रहना है,मेरे बहुत से दोस्त हॉस्टल में रहते हैं, कितने मजे है उनके !....हर पल दोस्तों का साथ नहीं कोई डाँट-डपट न ही कोई किचकिच । मुझे भी जाना है हॉस्टल, शौर्य अपनी माँ से कहता तो माँ उसे समझाते हुए कहती "बेटा ! जब बड़े हो जाओगे तब तुम्हे भी भेज देंगे हॉस्टल ।फिर तुम भी खूब मजे कर लेना" ।
समझते समझाते शौर्य कब बड़ा हो गया पता ही नहीं चला, और आगे की पढ़ाई के लिए उसे भी हॉस्टल भेज दिया गया। बहुत अच्छा लगा शुरू-शुरू में शौर्य को हॉस्टल मेंं ।परन्तु जल्दी ही उसे घर और बाहर का फर्क समझ में आने लगा ।
अब वह घर जाने के लिए छुट्टियों का इन्तजार करता है,और घर व अपनोंं की यादों में कुछ इस तरह गुनगुनाता है ।



समय तू पंख लगा के उड़ जाकर
उस पल को पास ले आ ।
जब मैंं मिल पाऊँ माँ -पापा से ,
माँ-पापा मिल पायें मुझसे
वह घड़ी निकट तो ला !
समय तू पंख लगा के उड़ जा ।

छोटे भाई बहन मिलेंगे प्यार से मुझसे,
हम खेलेंगे और लडे़ंगे फिर से ।
वो बचपन के पल फिर वापस ले आ !
समय तू थोड़ा पीछे मुड़ जा !

तब ना थी कोई टेंशन-वेंशन ना था कोई लफड़ा,
ना आगे की फिकर थी हमको ना पीछे का मसला।
घर पर सब थे मौज मनाते खाते-पीते तगड़ा ।
खेल-खेल में हँसते गाते या फिर करते झगड़ा ।

माँ-पापा की डाँट डपट में प्यार छिपा था कितना !
अपने घर-आँगन में हम सब मौज मनाते इतना 
उन लम्होंं को रात नींद में रोज बना दे सपना !
समय तू कुछ ऐसा कर जा !
समय तू पंख लगा के उड़ जा।
मैं मिल पाऊँ अपनों से वह घड़ी निकट ले आ।
समय तू पंख लगा के उड़ जा !
     

टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 14 दिसम्बर 2022 को साझा की गयी है...
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार आपका । रचना को मंच प्रदान करने हेतु ।

      हटाएं
  2. माँ - बाप की टोका टाकी से बच्चों को आज़ादी चाहिए होती है लेकिन जब अलग रहना पड़ता है तब पता चलता है कि घर और बाहर रहने में क्या अंतर है ।

    जवाब देंहटाएं
  3. कविता और कहानी के माध्यम से बच्चों के मनोदशा का सुन्दर वर्णन 🙏

    जवाब देंहटाएं
  4. बचपन, माता-पिता और मायका कितनी भी उम्र हो यादों से कहां छूट पाया है।
    हृदय स्पर्शी रचना।

    जवाब देंहटाएं

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