मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा | गढ़वाली गीत
क्या आपका बच्चा भी जिद करता है? जानिए एक छोटी सी कहानी से बड़ा parenting मंत्र…
बच्चों को डांटने के बजाय प्यार और धैर्य से समझाना क्यों जरूरी है? पढ़िए सासू माँ की सीख देती यह प्रेरणादायक हिंदी कहानी।
उसे क्या, आप तो सभी बच्चों को मना लेती हैं…
आश्चर्य भरी मुस्कान के साथ निधि अपनी सासू माँ से पूछ ही रही थी कि तभी प्रीति (देवरानी) ने किचन से आवाज लगाई—
निधि किचन में गई और दूध पतीली में डालते हुए बोली—
अगर एकदम से ज्यादा दूध डालोगी, वो भी खाली पतीले में, तो उछलेगा ही न।”
सासू माँ दूर से सब सुनकर मुस्कुरा रही थीं।
थोड़ी देर बाद निधि चाय लेकर आई और सासू माँ को देते हुए फिर बोली—
“अब तो बताइए माँजी, आपने आरव को कैसे मना लिया? मैंने तो बहुत समझाया, पर वो माना ही नहीं…”
“बहू, तूने अभी छोटी बहू को क्या सिखाया?”
निधि थोड़ी सोच में पड़ गई—
“यही कि दूध धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा करके डालना चाहिए…”
सासू माँ ने प्यार से कहा—
“बस, यही बात बच्चों पर भी लागू होती है।
लेकिन अगर प्यार से, धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा समझाया जाए… तो वो भी मान जाते हैं।”
निधि मुस्कुरा उठी।
उसे अपने सवाल का जवाब मिल चुका था।
सीख:
बच्चों को डांटकर नहीं, प्यार और धैर्य से समझाया जाए तो वे खुद समझ जाते हैं ❤️
✨धन्यवाद🙏
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बहुत अच्छी सीख दी है सुधा जी आपने इस कहानी के द्वारा। यह मेरा भी अनुभवजन्य सत्य है।
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आ. जितेंद्र जी ! सुन्दर सकारात्मक समीक्षा से उत्साहवर्धन करने के लिए ।
जवाब देंहटाएंस्ंदर शिक्षा
जवाब देंहटाएंआभार
वंदन
हृदयतल से आभार एवं धन्यवाद आपका,उत्साहवर्धन करने के लिए ।
हटाएंबहुत ही बढ़िया शिक्षा देती कहानी। बच्चों को यदि प्यार से समझाया जाय तो वे आसानी से मान जाते है।
जवाब देंहटाएंतहेदिल से आभार एवं धन्यवाद ज्योति जी !
हटाएंहृदयतल से आभार आपका आदरणीय , मेरी रचना पाँच लिंको के आनंद मंच पर लिंक करने हेतु।
जवाब देंहटाएंसादर आभार ।
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंअच्छी कहानी
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद एव आभार आपका ।
हटाएंबूढ़ों पर भी लागू हो सकती है कहानी :) वो भी बच्चे हो जाते हैं |
जवाब देंहटाएंजी, आ. जोशी जी, धीरे धीरे एवं ।प्यार से भला कौ नहीं समझना चाहेगा...तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका ।
हटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
हटाएंकहानी के माध्यम से बहुत अनमोल सीख दी सुधा जी ! बच्चों को डांटकर नहीं, प्यार और धैर्य से समझाया जाए तो वे खुद समझ जाते हैं ।लाजवाब सृजन ।
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद एवं आभार मीनाजी !
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