मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा | गढ़वाली गीत

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  ✨ परिचय (Intro) गढ़वाल की वादियों में हर मौसम अपनी अलग कहानी लेकर आता है, लेकिन मोल्यारी मास (बसंत ऋतु) का सौंदर्य कुछ खास होता है। यह गीत उसी बसंती एहसास, पहाड़ की खुशबू, बचपन की यादों और लोकजीवन की सरलता को शब्दों में पिरोता है। कलीं कलीं वनफसा फूलीं, उँण्या कुण्याँ सँतराज खिल्याँ  मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा, डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ  बाट किनार बसींगा फूलीं छन रौली-खौली काली जीरी फूलीं  चल दगड़्यों म्याल खैयोला बण की डाली फलूण झूलीं उड़दि तितली रंग-बिरंगी भोंरा बि छन गुंजण लग्याँ मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा,डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ  ऊँची डाड्यूँ मा सुनेरी उल्यार रोली खोली हर्याली छयीं छुम बजांदि दाथुणि छुमका घास घस्याण घसेरी जयीं खुदेड़ गीतुंक गुणगुणाट आँख्यूँ मा टुपि दे आँसू बह्याँ। मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा, डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ पुराण दिन याद आदिन मैति मैत्युंक लोभ लग्याँ खुद लगदि ज्यु खुदेंदी फूलूँ दगड़ी भाव बग्याँ धरती म्यरि, म्यरु पहाड़्यों स्वरग जणि च भलि लग्याँ मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा, डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ फसल कटि, बिखौंति मनीगे जगा जगा ...

बच्चों को समझाने का सही तरीका – सासू माँ की सीख देने वाली कहानी

क्या आपका बच्चा भी जिद करता है? जानिए एक छोटी सी कहानी से बड़ा parenting मंत्र…


 बच्चों को डांटने के बजाय प्यार और धैर्य से समझाना क्यों जरूरी है? पढ़िए सासू माँ की सीख देती यह प्रेरणादायक हिंदी कहानी।


जिद्दी बच्चों को समझाने का तरीका हिंदी कहानी


आरव की जिद और निधि की परेशानी

माँजी, आरव बहुत जिद्दी है...।  मैंने उसे कितना समझाया, पर वो माना ही नहीं… और आपने तो पल भर में मना लिया। कैसे माँजी? आप कैसे मना लेती हैं उसे?

उसे क्या, आप तो सभी बच्चों को मना लेती हैं…

आश्चर्य भरी मुस्कान के साथ निधि अपनी सासू माँ से पूछ ही रही थी कि तभी प्रीति (देवरानी) ने किचन से आवाज लगाई—


किचन में छोटी सी सीख

“दीदी, ज़रा ये दूध पतीली में डाल दीजिए न… 
मुझसे गिर जाता है। पैकेट से डालते वक्त दूध उछल कर बाहर गिर जाता है।”

सिखाने का तरीका

निधि किचन में गई और दूध पतीली में डालते हुए बोली—

“अरे ! ऐसे कैसे गिर जाता है तुमसे दूध? देखो, धीरे-धीरे डालो… पतली धार में।

अगर एकदम से ज्यादा दूध डालोगी, वो भी खाली पतीले में, तो उछलेगा ही न।”

सासू माँ दूर से सब सुनकर मुस्कुरा रही थीं।

थोड़ी देर बाद निधि चाय लेकर आई और सासू माँ को देते हुए फिर बोली—

“अब तो बताइए माँजी, आपने आरव को कैसे मना लिया? मैंने तो बहुत समझाया, पर वो माना ही नहीं…”


सासू माँ की समझदारी भरी सीख

सासू माँ ने चाय की चुस्की लेते हुए मधुर मुस्कान के साथ कहा—

“बहू, तूने अभी छोटी बहू को क्या सिखाया?”

निधि थोड़ी सोच में पड़ गई—

“यही कि दूध धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा करके डालना चाहिए…”

सासू माँ ने प्यार से कहा—

“बस, यही बात बच्चों पर भी लागू होती है।


बच्चों को समझाने का सही तरीका

बच्चों को भी अगर एकदम से बहुत सारी बातें समझाने लगो, तो वो भी ‘उछल’ जाते हैं… मानते नहीं।

लेकिन अगर प्यार से, धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा समझाया जाए… तो वो भी मान जाते हैं।”

निधि मुस्कुरा उठी।

उसे अपने सवाल का जवाब मिल चुका था।


सीख:

बच्चों को डांटकर नहीं, प्यार और धैर्य से समझाया जाए तो वे खुद समझ जाते हैं ❤️


✨धन्यवाद🙏


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● सुरक्षा या सजा

● पुनर्जन्म


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टिप्पणियाँ

  1. बहुत अच्छी सीख दी है सुधा जी आपने इस कहानी के द्वारा। यह मेरा भी अनुभवजन्य सत्य है।

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  2. तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आ. जितेंद्र जी ! सुन्दर सकारात्मक समीक्षा से उत्साहवर्धन करने के लिए ।

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  3. उत्तर
    1. हृदयतल से आभार एवं धन्यवाद आपका,उत्साहवर्धन करने के लिए ।

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  4. बहुत ही बढ़िया शिक्षा देती कहानी। बच्चों को यदि प्यार से समझाया जाय तो वे आसानी से मान जाते है।

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  5. हृदयतल से आभार आपका आदरणीय , मेरी रचना पाँच लिंको के आनंद मंच पर लिंक करने हेतु।
    सादर आभार ।

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. बूढ़ों पर भी लागू हो सकती है कहानी :) वो भी बच्चे हो जाते हैं |

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    उत्तर
    1. जी, आ. जोशी जी, धीरे धीरे एवं ।प्यार से भला कौ नहीं समझना चाहेगा...तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका ।

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    2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  8. कहानी के माध्यम से बहुत अनमोल सीख दी सुधा जी ! बच्चों को डांटकर नहीं, प्यार और धैर्य से समझाया जाए तो वे खुद समझ जाते हैं ।लाजवाब सृजन ।

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