छटाँक भर का

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  "ओ गॉड ! ये तो मेरे साथ चीटिंग है " ! एयरपोर्ट से बाहर निकलते बेटे के मुँह से ऐसे शब्द सुनते ही शर्मा जी और उनकी पत्नी एक दूसरे का मुँह ताकने लगे । बेटे से मिलने का उत्साह जैसे कुछ ठंडा सा पड़ गया ।   सोचने लगे कहाँ तो हमें लगा कि इतने समय बाद हमें देखकर बेटा खुश होगा पर ये तो भगवान को ही कोसने लगा है" । तभी बेटा आकर दोनों के पैर छूकर गले मिला और फटाफट सामान को गाड़ी में रखवा कर तीनों जब बैठ गए तब पापा ने चुटकी लेते हुए कहा , " क्यों रे ! किसका इंतजार था तुझे ? कौन आयेगा तुझे लेने यहाँ..?.. हैं ?... अच्छा आज तो वेलेंटाइन डे हुआ न तुम लोगों का ! कहीं कोई दोस्त तो नहीं आयी है लेने ! हैं ?..  बता दे "? बेटा चिढ़ते हुए - "मम्मी ! देख लो पापा को ! कुछ भी बोल देते हैं" । "सही तो कह रहे तेरे पापा" - मम्मी भी मुस्कुराते हुए बोली,  "हमें देखकर भगवान को जो कोसने लगा तू !  क्या कह रहा था ये- " ओ गॉड ! ये तो मेरे साथ चीटिंग है " दोनों ने एकसाथ दोहराया और हँसने लगे । "शिट ! तो आप लोगों ने सुन लिया"  ? "बेवकूफ ! गॉड ने हमें भी...

बधाई शुभकामनाएं

 

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आओ लौटें ब्लॉग पर, लेखन सुलेख कर

एक दूसरे से फिर, वही मेल भाव हो ।


पंच लिंक का आनंद,मंच सजे सआनंद

हर एक लिंक सार, पढ़ने का चाव हो ।


सम्मानित चर्चाकार, सम्भालें हैं कार्यभार

स्थापना दिवस आज, पूरा हर ख़्वाव हो ।


शुभकामना अनेक, मंच फले अतिरेक

ऐसे नेक कार्य हेतु, मन से लगाव हो ।


पंच लिंक की चौपाल, सजे यूँ ही सालों साल

बधाई शुभकामना, शुद्ध मन भाव हो ।



मेरी एक और रचना निम्न लिंक पर 👇

ब्लॉग से मुलाकात.. बहुत समय के बाद 








टिप्पणियाँ

  1. आहा दी क्या खूब आह्वान किया है आपने बहुत सुंदर बधाई संदेश लिखा है... बहुत बहुत बहुत आभार 🙏

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    उत्तर
    1. जी नमस्ते,
      आपकी लिखी रचना शुक्रवार २७ जून २०२५ के लिए साझा की गयी है
      पांच लिंकों का आनंद पर...
      आप भी सादर आमंत्रित हैं।
      सादर
      धन्यवाद।

      हटाएं
  2. बहुत ही सुंदर आह्वान संदेश

    जवाब देंहटाएं
  3. सम्मानित चर्चाकार, सम्भालें हैं कार्यभार । वाह ! बहुत सुन्दर

    जवाब देंहटाएं

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