ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया
परिचय
जीवन को समझना शायद उम्र बढ़ने के साथ-साथ स्वयं को समझने की भी एक यात्रा है। जीवन में आने वाली परिस्थितियाँ हमें बहुत कुछ सिखाती हैं। कभी कोई अनुभव मन को दुख देता है तो कभी वही अनुभव आगे बढ़ने की राह दिखाता है। जब हम जीवन के सुख-दुख को स्वीकार करना सीख जाते हैं, तब छोटी-छोटी खुशियाँ भी मन को मुस्कुराने का कारण दे जाती हैं।
इन्हीं भावों को शब्द देने का प्रयास है मेरा यह गीत ‘ज़िन्दगी! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया’।

अजब तेरे नियम देखे,गजब तेरे कायदे ।
रोते रोते समझ आए,अब हँसी के फ़ायदे ।
भीगी पलकों संग लब को खिलखिलाना आ गया ।
ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया ।
क्यों कहें संघर्ष तुझको, ये तो तेरा सिलसिला ।
नियति निर्धारित सभी, फिर क्या करें तुझसे गिला ।
सत्य को स्वीकार कर जीना जिलाना आ गया ।
ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया ।
हो पूनम की रात सुन्दर या तिमिर घनघोर हो ।
राहें हों कितनी अलक्षित, आँधियाँ चहुँ ओर हो ।
हर हाल में मेरे 'साँवरे' तेरे गुण गुनाना आ गया ।
ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया ।
निष्कर्ष
जीवन को उसकी हर परिस्थिति के साथ स्वीकार करना आसान नहीं होता, लेकिन अनुभव हमें धीरे-धीरे यही सिखाते हैं। जब सुख-दुख, उतार-चढ़ाव और अनिश्चितताओं को जीवन का हिस्सा मानकर आगे बढ़ना आ जाता है, तब मन में एक सहज मुस्कान जन्म लेती है। शायद यही जीवन को समझने की वह अवस्था है, जहाँ शिकायतें कम और स्वीकार भाव अधिक हो जाता है।
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■ चल जिंदगी तुझको चलना ही होगा
आप ने लिखा.....
जवाब देंहटाएंहमने पड़ा.....
इसे सभी पड़े......
इस लिये आप की रचना......
दिनांक 05/06/2023 को
पांच लिंकों का आनंद
पर लिंक की जा रही है.....
इस प्रस्तुति में.....
आप भी सादर आमंत्रित है......
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.कुलदीप जी !मेरी रचना पाँच लिंकों के आनंद मंच के लिए चयन करने हेतु ।
हटाएंबढ़िया भाव
जवाब देंहटाएंजी, सादर आभार एवं धन्यवाद आपका 🙏🙏
हटाएंबेहतरीन..
जवाब देंहटाएंभाई कुलदीप जी पता नहीं कैसे भूल गए सूचित करना
आज पांच लिंकों का आनंद की शोभा बढ़ाती रचना
सादर
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार सखी !आपने बताया तो स्पैम से लायी हूँ अभी सूचना...
हटाएंआजकल ये स्पैम भी न...
वाह !
जवाब देंहटाएंहर फ़िक्र को जब कोई धुंए में उड़ाना सीख जाता है
तो
फिर उसे ग़र्दिश में भी मुस्कुराना आ जाता है.
हार्दिक आभार एवन धन्यवाद आ.सर !🙏🙏🙏🙏
हटाएंहो पूनम की रात सुन्दर या तिमिर घनघोर हो ।
जवाब देंहटाएंराहें हों कितनी अलक्षित, आँधियाँ चहुँ ओर हो ।
हर हाल में मेरे 'साँवरे' तेरे गुण गुनाना आ गया ।
ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कराना आ गया ।
बहुत सुन्दर रचना।इसीलिए गुणातीत को गुनगुनाते रहिए और अपने में मगन रहिए।
बहुत सुंदर सृजन सुधा जी,
जवाब देंहटाएंसकारात्मक भाव जब उदित होते हैं सचमुच जिंदगी भी मुस्कुराने लगती है और जीना सहज सरल लगता है।
सस्नेह।
हर हाल में मुस्कुराना ज़रूरी है!
जवाब देंहटाएंसकारात्मक सुंदर भाव को उत्प्रेरित करता सुंदर गीत!
हर हाल में मुस्कुराना ज़रूरी है!
हटाएंसकारात्मक सुंदर भाव को उत्प्रेरित करता सुंदर गीत!
वाह! बहुत सुंदर दर्शन-सुधा!!!
जवाब देंहटाएंज़िन्दगी को समझ लिया तो सब आसान.. बहुत अच्छा सुन्दर गीत विभा जी
जवाब देंहटाएंक्षमा करें सुधा जी। भूलवश विभा जी लिख गया
जवाब देंहटाएंजिन्दगी समझा तुझे तो मुस्कराना आ गया ..बेहतरीन
जवाब देंहटाएंवाह!सुधा जी ,क्या बात कही है ...बहुत खूब!
जवाब देंहटाएंबेहद शानदार रचना, सुधा जी...
जवाब देंहटाएंसत्य को स्वीकार कर जीना जिलाना आ गया ।
ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया ।...प्रेरणादायी
सच है जिंदगी क्या होती है यदि यह समय पर समझ लिया तो फिर जिंदगी का रोना बचेगा ही नहीं
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंदुपहरी बेरंग बीती सांझ हर रंग भा गया ।
ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया ।
अजब तेरे नियम देखे,गजब तेरे कायदे ।
रोते रोते समझ आये,अब हँसी के फ़ायदे ।
भीगी पलकों संग लब को खिलखिलाना आ गया ।
ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया ।,,,,,बहुत सुंदर रचना ज़िंदगी को समझना ही जीवन है ।
हो पूनम की रात सुन्दर या तिमिर घनघोर हो ।
जवाब देंहटाएंराहें हों कितनी अलक्षित, आँधियाँ चहुँ ओर हो ।
हर हाल में मेरे 'साँवरे' तेरे गुण गुनाना आ गया ।
ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कराना आ गया ।
सरस मर्मस्पर्शी सुंदर सृजन