तीन कुण्डलिया :- भारत महान, हार और विचलित

चित्र
अनुभूति पत्रिका में प्रकाशित  तीन कुण्डलिया कुण्डलिया हिन्दी साहित्य का एक लोकप्रिय छंद है जो अपनी लय, भाव और संदेश के कारण पाठकों को आकर्षित करता है। प्रस्तुत हैं तीन कुण्डलिया— 'भारत महान', 'हार' और 'विचलित'। इन रचनाओं में देशप्रेम, संघर्ष में सकारात्मक सोच तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया है।  भारत महान सारे जग मे हो रहा ,भारत का गुणगान । शुभ संस्कारी भावना, है इसकी पहचान ।  है इसकी पहचान, सभ्यता बड़ी निराली । सर्व धर्म सत्कार, बनाता गौरवशाली । कहे सुधा सुन मीत, लगा लो तुम भी नारे । भारत देश महान, कह रहे जग में सारे।। हार हार करें स्वीकार जो, होते नहीं निराश । सतत परिश्रम कर सदा,मन में रखते आस ।। मन में रखते आस, नहीं बाधा से डरते । गिरकर उठते रोज, कभी ना मन से थकते ।। कहे सुधा निज बात, है यही जीत का सार । करते रहें प्रयास, सौपान बनेगी हार ।। बिचलित विचलित गर मन हो रहा, कर लें प्राणायाम । साधें श्वास - प्रश्वास निज, मिले सुखद आराम ।। मिले सुखद आराम, धैर्य मन में है आता । मिटे बिचार विकार, भाव निर्मल हो जाता ।। कहे सुधा सुन मीत,श्वास साधें जो नियमित...

पाई-पाई जोड़ती

 

A women




कमाई अठन्नी पर खरचा रुपया है

तिस पे मंहगाई देखो कमर है तोड़ती


सिलटी दुफटी धोति तन लाज ढ़क रही 

पेट काट अपना वो पाई-पाई जोड़ती।


तीस में पचास सी बुढ़ायी गयी सूरत से

व्याधियां भी हाड़ -मांस सब हैं निचोड़ती


सूट-बूट पहन पति,नजर फेर खिसके आज

अकल पे निज अब , सर-माथ फोड़ती।


मन तोड़ पाई जोड़ , संचित करे जो धन

रोगन शिथिल तन ,  कुछ भी न सोहती


सेहत अनमोल धन, बूझि अब दुखी मन

मन्दमति जान अपन भाग अब कोसती।


चित्र साभार  ' pixabay .com'


🙏हार्दिक आभार आपका🙏

पढिये मेरी एक और रचना निम्न लिंक पर

● आज मौसम का रुख जब उसे समझ आया



टिप्पणियाँ

  1. किसी अभागी नारी का मार्मिक शब्द चित्र प्रिय सुधा जी | सच में विपन्नता अपने साथ अनेक मुसीबतें लेकर आती है |दरिद्रता में उम्र की गति बढ़ जाती है तो अवधि घाट जाती है |हार्दिक शुभकामनाएं भावपूर्ण लेखन के लिए |

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद सखी!आपका सराहनीय एवं स्नेहासिक्त प्रतिक्रिया से मेरा उत्साह द्विगुणित हो गया।
      सस्नेह आभार।

      हटाएं
  2. आपने एक गरीब औरत की मनोभावना को बड़े ही भावपूर्ण ढंग से चित्रित किया है, सच्चाई भी यही है, गरीबी जीवन भर का दुख है, एक ऐसी औरत के संघर्ष को नमन है ईश्वर उसे तन मन धन से पूर्णता दे, यही कामना है ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद जिज्ञासा जी!सारगर्भित प्रतिक्रिया द्वारा उत्साहवर्धन हेतु।
      सादर आभार।

      हटाएं
  3. बहुत बहुत सुन्दर सराहनीय रचना ।

    जवाब देंहटाएं
  4. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 17 मार्च 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हृदयतल से धन्यवाद आ.यशोदा जी! मेरी रचना को मंच प्रदान करने हेतु...
      सादर आभार।

      हटाएं
  5. गरीबी क्या होती हैं इसका बहुत ही मार्मिक चित्रण किया है सुधा दी आपने।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हृदयतल से धन्यवाद ज्योति जी!उत्साहवर्धन हेतु...
      सस्नेह आभार।

      हटाएं
  6. सिलटी दुफटी धोति तन लाज ढ़क रही

    पेट काट अपना वो पाई-पाई जोड़ती।
    मार्मिक चित्रण प्रस्तुत करती ब्यथा।भावपूर्ण। बहुत सुंदर।

    जवाब देंहटाएं
  7. महंगाई आधुनिक परिवेश ,एवं सेहत अनमोल बुद्धि अब दुख मन मार्मिक प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  8. मन तोड़ पाई जोड़ , संचित करे जो आज

    रोगन शिथिल तन , कुछ भी न सोहती

    गरीब स्त्री क्या क्या सहन कर पाई पाई जोड़ती है इसका बहुत मार्मिक चित्रण .

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से आभार एवं धन्यवाद संगीता जी!
      ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

      हटाएं
  9. निर्धन स्त्री की दशा का हृदयस्पर्शी चित्रण किया है आपने सुधा जी!
    साधुवाद 🙏

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत ही हृदयस्पर्शी सृजन सुधा जी ।

    जवाब देंहटाएं
  11. तहेदिल से धन्यवाद प्रिय श्वेता जी मेरी रचना को मंच प्रदान करने हेतु।
    सस्नेह आभार।

    जवाब देंहटाएं
  12. जीवंत और मार्मिक शब्द चित्र!!!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद आ. विश्वमोहन जी!
      सादर आभार।

      हटाएं
  13. आप कम लिखती हैं सुधा जी लेकिन जब लिखती हैं तो उत्कृष्टता के चरम पर ही पहुँचती है आपकी रचना । चाहे शिल्प हो या शैली, कथ्य हो या संदेश; आपका सृजन औपचारिक प्रशंसा की सीमाओं के परे ही होता है । इस असाधारण रचना की प्रशंसा मैं भला क्या करूं ? मैं स्वयं को इस योग्य ही अनुभव नहीं करता । केवल आपके भीतर की संवेदनशील कवयित्री को नमन करता हूँ ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करने हेतु हृदयतल से धन्यवाद आ. जितेन्द्र जी!....परन्तु ये जो आपने लिखा....
      इस असाधारण रचना की प्रशंसा मैं भला क्या करूं ? मैं स्वयं को इस योग्य ही अनुभव नहीं करता ।
      ये तो अतिशयोक्ति है आदरणीय!आपसे ही सीखा है ....फिर.?
      सादर आभार आपका।

      हटाएं
  14. विपदा की मारी स्त्री की
    मनोदशा का मार्मिक चित्रण
    सच बात है जब दुख आते हैं तो कई तरह के आटे हैं
    जिनसे जूझना दुखदायी होता है
    भावपूर्ण रचना

    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आदरणीय सर!सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया द्वारा उत्साहवर्धन करने हेतु।

      हटाएं
  15. समय की मारी नारी की व्यथा..सत्य को उकेरती हृदयस्पर्शी रचना।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद पम्मी जी!उत्साहवर्धन हेतु...
      सादर आभार।

      हटाएं
  16. मन तोड़ पाई जोड़ , संचित करे जो आज
    रोगन शिथिल तन , कुछ भी न सोहती
    मार्मिक भावाभिव्यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं
  17. इतना हृदय स्पर्शी चित्र खिंचा है आपने सुधा जी,
    अप्रतिम सृजन।

    जवाब देंहटाएं
  18. मार्मिक कविता सुधा जी !
    लेकिन कब तक नारी की निस्वार्थ-सेवा, पूर्ण समर्पण, त्याग और बलिदान की यह कहानी चलती रहेगी?

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हृदयतल से धन्यवाद आदरणीय सर!
      सादर आभार।

      हटाएं
  19. बहुत ही सुंदर हृदयस्पर्शी रचना

    जवाब देंहटाएं
  20. महंगाई, नारी, अज का माहोल और विषय को बाखूबी उतारा है इन शेरो में आपने ...
    बहुत अच्छी रचना है ...

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

फ़ॉलोअर

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विश्वविदित हो भाषा

करते रहो प्रयास (दोहे)

मंगलमय नववर्ष हो

लेबल

गजल11 गढ़वाली कविता एवं उसका हिन्दी रूपांतरण1 गढ़वाली गीत1 गर्मी पर कविता1 गर्मी पर बाल कविता1 गीत18 चौपाई1 जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वार्मिंग1 दोहा मुक्तक3 दोहे6 नवगीत15 पारिवारिक कहानी1 पुस्तक समीक्षा1 प्रसंग1 प्रार्थना3 प्रेणादायक आलेख1 प्रेरक लघुकथा1 प्रेरणादायक कहानी1 बाल कविता3 भावनात्मक रचना1 मन1 मनहरण घनाक्षरी छंद6 मुक्तक4 मुहावरे पर आधारित लघुकथा2 रिश्ते1 रोला छंद2 लघु कथा2 लघु कहानी6 लघुकथा20 लेख4 व्यंग कविता1 व्यंग लेख1 शिक्षा -परीक्षा1 संस्मरण1 संस्मरणात्मक लेख1 सकारात्मक सोच1 समीक्षा2 साहित्य1 हाइबन1 हायकु3 हास्यव्यंग कविता1 हास्यव्यंग लघुकथाएं1 हिंदी भावनात्मक कहानी1 हिंदी साहित्य1 हिन्दी कविता1
ज़्यादा दिखाएं