मंगलवार, 16 मार्च 2021

पाई-पाई जोड़ती

 

A women




कमाई अठन्नी पर खरचा रुपया कर

तिस पे मंहगाई देखो कमर है तोड़ती


सिलटी दुफटी धोति तन लाज ढ़क रही 

पेट काट अपना वो पाई-पाई जोड़ती।


तीस में पचास सी बुढ़ायी गयी सूरत से

व्याधियां भी हाड़ -मांस सब हैं निचोड़ती


सूट-बूट पहन पति,नजर फेर खिसके आज

अकल पे निज अब , सर-माथ फोड़ती।


मन तोड़ पाई जोड़ , संचित करे जो आज

रोगन शिथिल तन ,  कुछ भी न सोहती


सेहत अनमोल धन, बूझि अब दुखी मन

मन्दमति जान अपन भाग अब कोसती।


चित्र साभार  ' pixabay .com'



43 टिप्‍पणियां:

रेणु ने कहा…

किसी अभागी नारी का मार्मिक शब्द चित्र प्रिय सुधा जी | सच में विपन्नता अपने साथ अनेक मुसीबतें लेकर आती है |दरिद्रता में उम्र की गति बढ़ जाती है तो अवधि घाट जाती है |हार्दिक शुभकामनाएं भावपूर्ण लेखन के लिए |

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद सखी!आपका सराहनीय एवं स्नेहासिक्त प्रतिक्रिया से मेरा उत्साह द्विगुणित हो गया।
सस्नेह आभार।

Jigyasa Singh ने कहा…

आपने एक गरीब औरत की मनोभावना को बड़े ही भावपूर्ण ढंग से चित्रित किया है, सच्चाई भी यही है, गरीबी जीवन भर का दुख है, एक ऐसी औरत के संघर्ष को नमन है ईश्वर उसे तन मन धन से पूर्णता दे, यही कामना है ।

आलोक सिन्हा ने कहा…

बहुत बहुत सुन्दर सराहनीय रचना ।

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 17 मार्च 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद जिज्ञासा जी!सारगर्भित प्रतिक्रिया द्वारा उत्साहवर्धन हेतु।
सादर आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद आदरणीय...
सादर आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद आ.यशोदा जी! मेरी रचना को मंच प्रदान करने हेतु...
सादर आभार।

Jyoti Dehliwal ने कहा…

गरीबी क्या होती हैं इसका बहुत ही मार्मिक चित्रण किया है सुधा दी आपने।

शैलेन्द्र थपलियाल ने कहा…

सिलटी दुफटी धोति तन लाज ढ़क रही

पेट काट अपना वो पाई-पाई जोड़ती।
मार्मिक चित्रण प्रस्तुत करती ब्यथा।भावपूर्ण। बहुत सुंदर।

Ritu asooja rishikesh ने कहा…

महंगाई आधुनिक परिवेश ,एवं सेहत अनमोल बुद्धि अब दुख मन मार्मिक प्रस्तुति

Abhilasha ने कहा…

मर्मस्पर्शी रचना सखी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

मन तोड़ पाई जोड़ , संचित करे जो आज

रोगन शिथिल तन , कुछ भी न सोहती

गरीब स्त्री क्या क्या सहन कर पाई पाई जोड़ती है इसका बहुत मार्मिक चित्रण .

Dr Varsha Singh ने कहा…

निर्धन स्त्री की दशा का हृदयस्पर्शी चित्रण किया है आपने सुधा जी!
साधुवाद 🙏

शुभा ने कहा…

बहुत ही हृदयस्पर्शी सृजन सुधा जी ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत बढ़िया .

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार १८ मार्च २०२१ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार १८ मार्च २०२१ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद ज्योति जी!उत्साहवर्धन हेतु...
सस्नेह आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

सस्नेह आभार एवं धन्यवाद भाई।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार रितु जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार सखी!

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से आभार एवं धन्यवाद संगीता जी!
ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद वर्षा जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद शुभा जी!
सादर आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

बहुत बहुत धन्यवाद आपका।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद प्रिय श्वेता जी मेरी रचना को मंच प्रदान करने हेतु।
सस्नेह आभार।

विश्वमोहन ने कहा…

जीवंत और मार्मिक शब्द चित्र!!!

जितेन्द्र माथुर ने कहा…

आप कम लिखती हैं सुधा जी लेकिन जब लिखती हैं तो उत्कृष्टता के चरम पर ही पहुँचती है आपकी रचना । चाहे शिल्प हो या शैली, कथ्य हो या संदेश; आपका सृजन औपचारिक प्रशंसा की सीमाओं के परे ही होता है । इस असाधारण रचना की प्रशंसा मैं भला क्या करूं ? मैं स्वयं को इस योग्य ही अनुभव नहीं करता । केवल आपके भीतर की संवेदनशील कवयित्री को नमन करता हूँ ।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद आ. विश्वमोहन जी!
सादर आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करने हेतु हृदयतल से धन्यवाद आ. जितेन्द्र जी!....परन्तु ये जो आपने लिखा....
इस असाधारण रचना की प्रशंसा मैं भला क्या करूं ? मैं स्वयं को इस योग्य ही अनुभव नहीं करता ।
ये तो अतिशयोक्ति है आदरणीय!आपसे ही सीखा है ....फिर.?
सादर आभार आपका।

Jyoti khare ने कहा…

विपदा की मारी स्त्री की
मनोदशा का मार्मिक चित्रण
सच बात है जब दुख आते हैं तो कई तरह के आटे हैं
जिनसे जूझना दुखदायी होता है
भावपूर्ण रचना

सादर

Pammi singh'tripti' ने कहा…

समय की मारी नारी की व्यथा..सत्य को उकेरती हृदयस्पर्शी रचना।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आदरणीय सर!सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया द्वारा उत्साहवर्धन करने हेतु।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद पम्मी जी!उत्साहवर्धन हेतु...
सादर आभार।

Meena Bhardwaj ने कहा…

मन तोड़ पाई जोड़ , संचित करे जो आज
रोगन शिथिल तन , कुछ भी न सोहती
मार्मिक भावाभिव्यक्ति ।

मन की वीणा ने कहा…

इतना हृदय स्पर्शी चित्र खिंचा है आपने सुधा जी,
अप्रतिम सृजन।

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद मीना जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार कुसुम जी!

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

मार्मिक कविता सुधा जी !
लेकिन कब तक नारी की निस्वार्थ-सेवा, पूर्ण समर्पण, त्याग और बलिदान की यह कहानी चलती रहेगी?

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद आदरणीय सर!
सादर आभार।

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

बहुत ही सुंदर हृदयस्पर्शी रचना

दिगम्बर नासवा ने कहा…

महंगाई, नारी, अज का माहोल और विषय को बाखूबी उतारा है इन शेरो में आपने ...
बहुत अच्छी रचना है ...

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